मैं डॉ. अनिल कुमार मीणा (MOIC, PHC दासपा ,भीनमाल ,जालोर )। दिनांक 20 जून 2026 को ड्यूटी के दौरान मेरे और स्टाफ पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के बाद से मुझे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। अब दासपा सरपंच द्वारा FIR वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जान से मारने की धमकी दी जा रही है और बिना किसी परमिशन के मेरे सरकारी क्वार्टर की चेकिंग जैसी हरकतें की जा रही हैं। इस घोर असुरक्षा के माहौल में भी मुझे अभी तक प्रशासन से कोई न्याय या सुरक्षा नहीं मिली है। चिकित्सा विभाग के सभी चिकित्सकों और साथियों से विनम्र अपील है कि इस तानाशाही के खिलाफ एकजुट हों और मेरा साथ दें ताकि हम सुरक्षित रहकर अपनी सेवाएं दे सकें ।कृपया इस मामले को पुरजोर तरीके से उठाएं। आज मेरे साथ हुआ है, कल किसी और के साथ हो सकता है। जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, हमें शांत नहीं बैठना है। , न्याय की लड़ाई में मेरा साथ दें । 🙏🏻
राजस्थान में सेवा दे रहे डॉक्टरों पर हमला कब रुकेगा? PHC दासपान में ड्यूटी के दौरान मेरे साथ हुई मारपीट, जातिसूचक अपमान और बंधक बनाने की घटना पूरी चिकित्सा व्यवस्था पर हमला है। हमें काम करने के लिए सुरक्षित माहौल चाहिए।दोषियों पर तुरंत कठोर कार्रवाई करे
@sarkari_doctor
Acche din for doctors in Rajasthan
Govt has decided to cut salary of contract doctors from Rs 56,000 per month to Rs 28,000
Master stroke of over producing doctors, then hiring them for peanuts?
Then govt should expect gamechanger quality of services?
https://t.co/MpoOAE1Yf0.
*पहले भारी फीस दो फिर 28000 वेतन लो*
मेरे शहर में राज मिस्त्री ((Mason) की दिहाड़ी 1100 रुपए प्रतिदिन है।यदि वह प्रतिमाह 26 दिन काम करता है तो उसका मासिक वेतन 28600 रुपए होता है।
राजस्थान में अब चिकित्सकों का वेतन 28000 प्रतिमाह निर्धारित किया है ।
MBBS की पढ़ाई की फीस की बात की जाए तो राजस्थान के सरकारी कॉलेजेस की पचास प्रतिशत सीट्स पर यह फीस पचास लाख से लेकर एक करोड़ चालीस लाख तक है एवं निजी मेडिकल कॉलेजेस की सभी सीट्स पर लगभग एक करोड़ है। *यानि प्रस्तावित वेतन पर यदि कोई MBBS डॉक्टर काम करे तो उसे अपनी फीस के बराबर राशि सरकार से लेने के लिए तीस चालीस साल तक नौकरी करनी होगी।*
राज मिस्त्री से तुलना करूं तो उसका कार्य मुझे कहीं अधिक सरल दिखाई देता है।
न दस बारह साल की पढ़ाई, न करोड़ों की फीस। काम करते समय कोई चूक हो जाए तो न पिटाई का डर न कंज्यूमर कोर्ट या थाने में शिकायत का खौफ। काम के घंटे भी फिक्स हैं, न कोई नाइट ड्यूटी, न कोई इमरजेंसी। राज मिस्त्री से प्लंबिंग या इलेक्ट्रिशियन का काम करने के लिए भी नहीं कहा जायेगा लेकिन MBBS डॉक्टर को प्रसूता की डिलीवरी भी करवानी है, नवजात शिशु से लेकर वृद्ध का इलाज भी करना है, पोस्ट मॉर्टम भी करना है और सभी सरकारी कार्यक्रमों को लागू करने का दायित्व भी उठाना है।
कार्यस्थल पर हिंसा की बात करो तो अदालत का स्पष्ट कहना है, *"डर लगता है तो प्रोफेशन छोड़ दो।"*
हर साल बीस लाख से अधिक बच्चे भारत में नीट देते हैं।
लगभग साठ हजार बच्चों को सरकारी सीट मिलती है और लगभग इतने ही छात्र प्राइवेट कॉलेज को सीट लेते हैं।
मैं इस पोस्ट के माध्यम से भारत के उन होनहार बच्चों को हतोत्साहित नहीं करना चाहता। न ही मैं उन माता पिता का स्वप्न तोड़ने का प्रयास कर रहा हूं जो अपने बच्चों को MBBS की डिग्री दिलवाने के लिए अपना घर और जमीन बेचने तक से नहीं हिचकिचाते। मै केवल आपका परिचय एक कड़वी वास्तविकता से करवाने का प्रयास कर रहा हूं। यदि आपके पास करोड़ों रुपए व्यर्थ लॉकर्स में पड़े हैं तो बच्चे को MBBS ही नहीं MD ,MS MCh,DM सब करवाएं लेकिन यदि ऐसा नहीं है और बच्चा अफॉर्डेबल फीस वाली सीट लेने में सक्षम नहीं है तो MBBS में प्रवेश दिलवाने से पहले दो बार नहीं दस बार सोचें। एक गलत निर्णय आपका और आपके बच्चे का भविष्य अंधकार में धकेल देने के लिए काफी है।
इस देश में कोई नेता सात बार विधायक या सांसद बने तो उसे सात पेंशन मिलती हैं लेकिन एक MBBS डॉक्टर साढ़े पांच साल पढ़ाई करके नौकरी ढूंढे तो उसका वेतन किसी श्रमिक जितना होगा। ऐसी दरिद्रता तो सोमालिया में भी न होगी।
धन्य है मेरा देश और इसके नीति निर्माता।
-डॉ राज शेखर यादव @8PMnoCM@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@Dr_Vinod_Bagra@Drgopalsingh@DrMehtaOfficial@BidiyasarDr@drlakshyamittal@UDF_BHARAT@DrDhruvchauhan@1stIndiaNews@AHindinews@anilsaini8563@arvindchotia@ashok_Jodhpurii@ashokshera94@BJP4Rajasthan@dineshbohrabmr@DrDSSaini@drajaychuru@ml_vikas@sarkari_doctor@Sarkaridoctor12@Rajendra4BJP@DrSatishPoonia@ramlalsharmabjp@Xpress_edex@TikaRamJullyINC@SachinPilot@ashokgehlot51@VasundharaBJP@VasudevDevnani@PMOIndia@RajCMO@JPNadda@DrBharatPareek8@BJPbhagwan
A disturbing incident has unfolded at Saharanpur Medical College, UP, where doctors were brutally assaulted by attendants of a critically ill road traffic accident patient.
The resident doctors suffered severe injuries, including head and clavicle trauma.
The NBEMS does not provide raw scores, response sheets, or answer keys, making it difficult for candidates to verify their results
This lack of transparency has led to legal challenges, which demands the release of these details.
#neetpg2025#NEETPG#neetug2025#neetpg25
एसडीएम सरकार के प्रतिनिधि हैं और वही एसडीएम बदतमीजी करे, प्रताड़ित करे तो क्या सरकार से न्याय ना मांगें?
और यह एसडीएम तो पहले भी रिश्वतखोरी में, दो बार गिरफ्तार भी हो चुका है!
भजनलाल सरकार खुद को संवेदनशील बताती है और सुशासन का दावा करती है, लेकिन सच आपके सामने है.
@BhajanlalBjp
शासन प्रशासन चिकित्सकों के धैर्य की परीक्षा ना ले पिछले 7 दिन से गांधीगिरी साथ शांतिपूर्वक संघर्ष कर रहे है राजस्थान के सेवारत डॉक्टर्स अब धीरे धीरे अपना धैर्य खो रहे है जो किसी भी समय सामूहिक रूप संपूर्ण आउट डोर सेवाओं के बहिष्कार तक जा सकते है
The unfortunate incident involving Dr. Ramswaroop in Sedwa, Barmer, is highly condemnable. Such cases of defamation are repeatedly occurring as some officials seek to gain fame through social media reels. The doctors' fraternity will no longer tolerate such humiliation. Strict legal action should be taken against the Sedwa SDM under various sections of the BNS, and immediate suspension should be enforced. The dignity and respect of doctors must be upheld, and such actions against medical professionals must be stopped. We stand united against this injustice.
Dr. Jakir Khan
Director, Doctors Welfare Federation (DWF)
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