भ्रष्ट प्रशासन की भेंट चढ़ा बिश्नोई समाज का होनहार युवा मनोहर...😢
सरकार से निवेदन है कि इस मामले की जांच करके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा प्रदान करें।
भाई मनोहर को शत शत नमन 🙏🏻
@BhajanlalBjp@RajCMO@grok
मुझे आज बड़ी शर्म आ रही है, मैं जिस सुधांशु त्रिवेदी और संबित पात्रा की तारीफ़ करता था, वो चुप रहे।
लेकिन प्रियंका जी ने UGC पर संसद में भाजपा के धागे खोल दिये।
भारत के 40 करोड़ मेरिट समर्थक लोग आपके पीछे खड़े है।
@priyankac19 🔥✅
“बेपरवाह सत्ता, संकट में प्रकृति!”
बीकानेर में खेजड़ी की रक्षा के लिए बिश्नोई समाज पिछले कई दिनों से संघर्षरत हैं।
खेजड़ी बचाओ आंदोलन पर्यावरण, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है।
इस संघर्ष में साधु-संत, माताएँ-बहनें, बच्चे और बुज़ुर्ग तक खेजड़ी की रक्षा के लिए भूखे-प्यासे अनशन पर बैठे हैं, अपने त्याग और संकल्प से सत्ता को ललकार रहे हैं। लेकिन अफ़सोस कि सरकार ने अब तक आंदोलनकारियों की बात सुनना तक ज़रूरी नहीं समझा।
सत्ता में बैठे लोगों की यह चुप्पी सरकार की बेपरवाही और असंवेदनशील रवैये को उजागर करती है—
जहाँ प्रकृति की पुकार और समाज का संघर्ष, दोनों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
@BhajanlalBjp@RajCMO
#NirmalChoudhary
सांचौर निवासी श्री मनोहर लाल जी बिश्नोई को न्याय दिलाने की मांग में
अपने घर से लगभग 500 किलोमीटर दूर राजधानी जयपुर में
SMS अस्पताल की मोर्चरी के बाहर सड़क पर धरने पर बैठे उनके परिजनों के बीच पहुंचा।
यह दृश्य सत्ता की संवेदनहीनता पर करारा आरोप है—
जहां एक शोकाकुल परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है,
और सत्ता मौन साधे बैठी है।
#NirmalChoudhary
जनता ने अभी इस तरीके से सवाल पूछना शुरू भी नहीं किया है,
अभी तो सिर्फ बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने ही UGC पर सवाल उठाए हैं…
और हालत ये है कि नेताजी के पसीने ही छूट गए..!!
जयपुर में सस्पेंड व्याख्याता मनोहर लाल भादू की झकझोर देने वाली मृत्यु केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि भाजपा सरकार में प्रशासनिक तंत्र द्वारा उत्पन्न परिस्थितियों का गंभीर परिणाम प्रतीत होती है।
मृतक के सुसाइड नोट में SOG के अधिकारियों पर गंभीर आरोपों को नज़रअंदाज़ करना न्याय की हत्या है। ये मामला न केवल SOG की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकार की उस कार्यप्रणाली को भी बेनक़ाब कर रहा है, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक दबाव, प्रताड़ना और कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। राज्य में ऐसे अनेक प्रकरण सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकारियों और कर्मचारियों को डराने और फंसाने का खेल चल रहा है।
राज्य सरकार को इस प्रकरण की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए, ताकि दोषियों की पहचान कर कार्रवाई हो एवं सच सामने आए जिससे भविष्य में कोई और कार्मिक सिस्टम का शिकार न हो।
@RajCMO
व्याख्याता मनोहर SOG से प्रताड़ित होकर कि आत्महत्या..
न्याय के लिए अभिमन्यु पुनियां के साथ पूरा परिवार SMS मोर्चरी के सामने न्याय की गुहार लगा रहा है, सरकार का कोई नुमाइंदा हाल-चाल पूछने नही गया,
कुछ देर में छात्रनेता निर्मल चौधरी भी आने वाले है🙏
#व्याख्याता_मनोहर_को_न्याय_दो
“यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम की हत्या है!”
सांचौर निवासी सस्पेंड व्याख्याता श्री मनोहर लाल भादू जी की पीड़ादायक मृत्यु के विरोध में आज SMS मोर्चरी जयपुर के बाहर चल रहे धरने में शाम 05:30 बजे पहुंच रहा हूं।
यह सिर्फ़ शोक नहीं,
न्याय की मांग और व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाकर रहेंगे।
#मनोहर_लाल_भादू_को_न्याय_दो
#NirmalChoudhary
SMS अस्पताल जयपुर के बाहर व्याख्याता स्व. मनोहर लाल भादू जी के परिजनों व साथियों द्वारा दिए जा रहे धरने पर पीड़ित परिवारजनों, नागरिकों से मुलाकात कर सम्पूर्ण घटनाक्रम की जानकारी ली। अधिकारियों की प्रताड़ना व सरकार की संवेदनहीनता से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया, इतने गंभीर मामले के बावजूद अब तक सरकार का कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि परिजनों की सुध लेने मौके पर नहीं पहुंचा है जो अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस कठिन समय में हम हर परिस्थिति में पीड़ित परिवार के साथ खड़े है। सरकार अतिशीघ्र न्यायोचित जांच कर दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई करें व पीड़ित परिवार की मांगे मानकर उनको न्याय दें। @BhajanlalBjp
सांचौर के खारा निवासी प्रतिभावान छात्र मनोहर भादू द्वारा SOG की प्रताड़ना से आहत होने के आरोप लगाते हुए आत्महत्या किया जाना अत्यंत दुखद, पीड़ादायक एवं शर्मनाक घटना है।
सरकार से दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष, कठोर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए जाने हेतु मांग करता हूँ।
कल देर रात मनोहर भादू का सुसाइड नोट पढ़ा। उसके बाद से मन लगातार यही सोच रहा है कि कुछ लिखा जाए लेकिन क्या यह महज़ एक खबर भर है?
उसके लिखे शब्द सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते, वे भीतर तक चीर देते हैं। उसके शब्द बताते हैं कि वह किस तरह की जिजीविषा रखने वाला नौजवान था। एक ऐसा युवक, जिसे परिवार के प्रत्येक सदस्य की चिंता है फिर भी उस व्यक्ति ने मौत को चुनने का साहस कैसे जुटाया होगा?
इतनी प्रबल जिजीविषा रखने वाले नौजवान को व्यवस्था ने किस स्तर तक अपमानित किया होगा कि तमाम जिम्मेदारियों और रिश्तों के बावजूद उसे मौत ही एकमात्र विकल्प लगी। क्या कोई व्यवस्था इतनी निर्दयी हो सकती है कि वह आरोपी को इंसान न समझने की भूल कर बैठे?
मनोहर इन जटिल और अमानवीय व्यवस्थाओं के जाल में उलझकर खत्म हो गया, लेकिन वह अपने साथ कई सवाल छोड़ गया है। आख़िर इन व्यवस्थाओं में बैठे लोगों को यह अधिकार किसने दिया कि वे किसी के जीवन-संघर्ष से उसका मोहभंग कर दें और उसे मौत के मुंह तक धकेल दें?
यह सिर्फ़ एक देह का आत्मा छोड़ देना नहीं है। यह हम सबके लिए अनगिनत सवाल छोड़ जाने जैसा है। कुछ दिनों तक इस मौत पर राजनीतिक गिद्ध अपनी रोटियाँ सेंकेंगे, फिर सब कुछ शांत हो जाएगा। न व्यवस्था बदलेगी, न ज़िम्मेदारों को कठोर दंड मिलेगा।
जैसे पहले चार दिन पुराने अख़बार पर गर्म समोसे खाते हुए खबरें भुला दी जाती थीं, अब मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉल करते हुए किसी नचनिया की ठुमकों से भरी रील आएगी और मनोहर हम सबके लिए बीते युग की बात बन जाएगा।
मैं कुछ नहीं कहता। बस मनोहर के शब्दों में ही आप व्यवस्था की भयावह जटिलता को समझिए क्योंकि यह आत्महत्या भर नहीं है।
में मरा नहीं हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज ने मेरी "इरादतन" हत्या कर डाली, पुलिस ने ऐसे और भी किया है, 3-4 ऐसे लोग है, उनकी कोई गलती नही (1% भी), विश्वास नही है तो सेन्ट्रल जेल में जाकर देखिएगा, मेरा ऐसा हाल होता... बार बार इनके हाथों से मरने से बेहतर है एकबार खुद ही खत्म हो जाना...
बहुत ही दुखद...मनोहर लाल भादू व्याख्याता सस्पेंड करने के बाद अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था...मनोहर ने दोस्तो को नोट मे लिखा की ... मैं मरा नहीं हूं पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या की है।
मनोहर के नोट देखकर इसकी जांच करनी चाहिए...ताकि मनोहर और उसके परिवार को न्याय मिल सके।
में मरा नही हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज मेरी इरादतन हत्या कर डाली 😢
एसओजी के जोशीले तेवर ने मुझे में उस भट्टी में डाल दिया, जहां नित-रोज के खुलासे हो रहें थे, लेकिन में इस मामलों में इतना शरीक नही था
हाँ कुछ गलतियां थीं, 2022 वर्ष या उससे पहले की. अब मेरा जीवन नये संवेरे की तरह था ✨
लेकिन..... बात यह है
अजमेर SOG ब्रांच में दर्ज रमेश कुमार (हिंदी विषय ग्रेड-2) की FIR में मेरा कोई नाम नही, उसके बाद रमेश जब अरेस्ट हुआ, उसके चालान में भी मेरा कही नाम तक नही , उस समय के जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मेरा 6-7 जनों को पूछा, जो उस समय कार्यवाही में पकड़े गये (जैसे- डॉ. सुरेश, शैलेश खीचड़ इत्यादि.. और भी नाम है) की मनोहर कौन है, इसके पास कितना पैसा है, अब यह क्या करता है...
इन्होने खूब कोशिश की मेरे से रूपये ऐंठने की (लेकिन मेरे पास कितना रुपया है, आज 4 साल से प्रतिमाह दोस्तों से हेल्प लेता आया हूं..
5000 से 20,000 तक राशि की)
तब तक उसका ट्रांसफर हो जाता है, और मामला सालभर के लिये ठंडे बस्ते में चला जाता है , लेकिन जब रमेश राणा के चालान में दिनेश कुमार (वर्तमान पदस्थापित KVS टीचर TGT हिंदी -जम्मू कश्मीर) गिरफ्तार हुआ तब, उससे मेरा नाम उड़ेल दिया...
श्यामसुंदर बिश्नोई (हाल जांच अधिकारी अजेमर एसओजी) को मुकेश सोनी स्पष्ट व्हाट्सप्प कॉल पर कहता है-
"इस मामले में मनोहर भादू के अलावा किसी का नाम मत डालना, उसको 4 मामलों में आप घसीट सकते हो, उससे डरा धमकाकर कुछ भी करवा सकते हो, में उसे पकड़ लेता, लेकिन तब तक मेरा ट्रांसफर हो गया "
और श्यामसुंदर ने उससे जबरन मेरा नाम 2 और मामलों मे डलवाया, देखिये की मूल कैंडिडेट नाम नही ले रहा मेरा कही भी और नीचे से यह मुझे मल्टी एंगल तरीके से आरोपी बना रहें है 🙏🙏🙏
पहली बार मुझे जब मेरी ख़ुद की एग्जाम देते पकड़ा (सितंबर 2021) तब से लेकर मेरी तीसरी चार्जशीट तक मेरे पर सभी आरोप है, उसमें यह बयांन देख लो की मनोहर लाल को एग्जाम देते पाया गया (मुझे बाहर से उठाकर मुल्ज़िम बनाया जाता रहा.. और आज भी वह सिलसिला ख़त्म नही हुआ है)
आप लोग मेरे घर जाकर मेरे माँ-बाप (💞) मेरे पांचो प्यारे लाड़ले बच्चें 3 मेरे और 2 भाई के), पत्नी, भाई रमेश-भाभी और तीनों बहिनो (एलची, गंगा और बबीता) की हालत देख लेना.. उचित लगे तो इस कच्ची उम्र की मौत बदले घर वालों को न्याय दिलवाना, मेरी माँ तू चिंता मत करना 🙌 जरूर न्याय मिलेगा
मेरी व्याख्याता पोस्ट पर किसी न किसी को अनुकम्पा मिलनी चाहिए, वरना 70-80 वर्ष की उम्र के माँ बाप ????
डिअर रमेश भाई..💞 अपन खूब लड़ते थे. मगर प्यार से, कोई ना प्रेम से रहना परिवार से मिलजुलकर
यहा आकर रोना आया है मुझे...
हाथ कांप रहें है.. लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही ख़त्म हो रही है, वो ईश्वर जानता है,
एकबात पुनः कहना चाहता हूं, मेरा शरीर समाप्त हुआ है, लेकिन आत्मा मे मेरे को याद रखना, मैं हाजिर मिलूंगा , यह ब्रह्मांड असीम है और इसी मे आगे समाहित रहूंगा.. कही नही जा सकता, क्योंकि मेरा Willl Power आज भी बच्चों जैसा है, भला मेरी आत्मा को कैसे शांति मिल सकती है
मेरे खूब अच्छे मित्र है, सब अच्छी नेक नियति के है, आपको भविष्य मे सपोर्टीव रखेंगे
मित्रों मैं मेरे घर के 20 सदस्यों मे अकेला था, जो सबको लेकर चलता था,
आप मेरी जगह लेकर बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करन , मेरे सभी बच्चें पढ़ाई मे टैलेंट है, आजमाकर देखना यह मेरा वादा भूलना मत plzz.. यह बच्चें बड़े होकर आपका एहसान जरूर चुकाएंगे
🙏🙏
मेरी क्षमता छिन ली गयी/ख़त्म कर दी गयी, अब मेरे हाथ में कुछ नही है, वरना इतना बड़ा पाप करने जा रहा हूं, शर्म की बात है
मे इतना कमजोर ही नही हूं, लेकिन गलत तरीके से मेरे पर यह आरोप सहन नही हो रहे,
आरोप तो पहले भी थे मेरे पर.. उनसे मैं नही मरा, रही कसर कोर्ट कचहरी के खर्चे इस महंगाई में अब संभव नही है,विकट हालात के साथ बढ़ती आर्थिक समस्याएं ,
अब इतने केस डाल दिये बिना कहें की देखें तो हर 10-20 दिन मे एक कोर्ट तारीख... अकेला इंसान क्या करें ??
में मरा नही हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज ने मेरी "इरादतन" हत्या कर डाली , पुलिस ने ऐसे और भी किया है, 3-4 ऐसे लोग है, उनकी कोई गलती नही (1%भी), विश्वास नही है तो सेन्ट्रल जेल में जाकर देखिएगा, मेरा ऐसा हाल होता... बार बार इनके हाथों से मरने से बेहतर है एकबार ख़ुद ही ख़त्म हो जाना... 😢
✍️ : मनोहर लाल भादू, खारा (सांचौर)
यह सुसाइड नोट लिख इतिहास व्याख्याता ने जयपुर में सुसाइड कर लिया है @RajPoliceHelp@PoliceRajasthan@hanumanbeniwal@RavindraBhati__@GovindDotasra@ashokgehlot51@AbhimanyuP00NIA@MlaSanchore@PSKhachariyawas
में मरा नही हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज मेरी इरादतन हत्या कर डाली 😢
एसओजी के जोशीले तेवर ने मुझे में उस भट्टी में डाल दिया, जहां नित-रोज के खुलासे हो रहें थे, लेकिन में इस मामलों में इतना शरीक नही था
हाँ कुछ गलतियां थीं, 2022 वर्ष या उससे पहले की. अब मेरा जीवन नये संवेरे की तरह था ✨
लेकिन..... बात यह है
अजमेर SOG ब्रांच में दर्ज रमेश कुमार (हिंदी विषय ग्रेड-2) की FIR में मेरा कोई नाम नही, उसके बाद रमेश जब अरेस्ट हुआ, उसके चालान में भी मेरा कही नाम तक नही , उस समय के जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मेरा 6-7 जनों को पूछा, जो उस समय कार्यवाही में पकड़े गये (जैसे- डॉ. सुरेश, शैलेश खीचड़ इत्यादि.. और भी नाम है) की मनोहर कौन है, इसके पास कितना पैसा है, अब यह क्या करता है...
इन्होने खूब कोशिश की मेरे से रूपये ऐंठने की (लेकिन मेरे पास कितना रुपया है, आज 4 साल से प्रतिमाह दोस्तों से हेल्प लेता आया हूं..
5000 से 20,000 तक राशि की)
तब तक उसका ट्रांसफर हो जाता है, और मामला सालभर के लिये ठंडे बस्ते में चला जाता है , लेकिन जब रमेश राणा के चालान में दिनेश कुमार (वर्तमान पदस्थापित KVS टीचर TGT हिंदी -जम्मू कश्मीर) गिरफ्तार हुआ तब, उससे मेरा नाम उड़ेल दिया...
श्यामसुंदर बिश्नोई (हाल जांच अधिकारी अजेमर एसओजी) को मुकेश सोनी स्पष्ट व्हाट्सप्प कॉल पर कहता है-
"इस मामले में मनोहर भादू के अलावा किसी का नाम मत डालना, उसको 4 मामलों में आप घसीट सकते हो, उससे डरा धमकाकर कुछ भी करवा सकते हो, में उसे पकड़ लेता, लेकिन तब तक मेरा ट्रांसफर हो गया "
और श्यामसुंदर ने उससे जबरन मेरा नाम 2 और मामलों मे डलवाया, देखिये की मूल कैंडिडेट नाम नही ले रहा मेरा कही भी और नीचे से यह मुझे मल्टी एंगल तरीके से आरोपी बना रहें है 🙏🙏🙏
पहली बार मुझे जब मेरी ख़ुद की एग्जाम देते पकड़ा (सितंबर 2021) तब से लेकर मेरी तीसरी चार्जशीट तक मेरे पर सभी आरोप है, उसमें यह बयांन देख लो की मनोहर लाल को एग्जाम देते पाया गया (मुझे बाहर से उठाकर मुल्ज़िम बनाया जाता रहा.. और आज भी वह सिलसिला ख़त्म नही हुआ है)
आप लोग मेरे घर जाकर मेरे माँ-बाप (💞) मेरे पांचो प्यारे लाड़ले बच्चें 3 मेरे और 2 भाई के), पत्नी, भाई रमेश-भाभी और तीनों बहिनो (एलची, गंगा और बबीता) की हालत देख लेना.. उचित लगे तो इस कच्ची उम्र की मौत बदले घर वालों को न्याय दिलवाना, मेरी माँ तू चिंता मत करना 🙌 जरूर न्याय मिलेगा
मेरी व्याख्याता पोस्ट पर किसी न किसी को अनुकम्पा मिलनी चाहिए, वरना 70-80 वर्ष की उम्र के माँ बाप ????
डिअर रमेश भाई..💞 अपन खूब लड़ते थे. मगर प्यार से, कोई ना प्रेम से रहना परिवार से मिलजुलकर
यहा आकर रोना आया है मुझे...
हाथ कांप रहें है.. लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही ख़त्म हो रही है, वो ईश्वर जानता है,
एकबात पुनः कहना चाहता हूं, मेरा शरीर समाप्त हुआ है, लेकिन आत्मा मे मेरे को याद रखना, मैं हाजिर मिलूंगा , यह ब्रह्मांड असीम है और इसी मे आगे समाहित रहूंगा.. कही नही जा सकता, क्योंकि मेरा Willl Power आज भी बच्चों जैसा है, भला मेरी आत्मा को कैसे शांति मिल सकती है
मेरे खूब अच्छे मित्र है, सब अच्छी नेक नियति के है, आपको भविष्य मे सपोर्टीव रखेंगे
मित्रों मैं मेरे घर के 20 सदस्यों मे अकेला था, जो सबको लेकर चलता था,
आप मेरी जगह लेकर बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करन , मेरे सभी बच्चें पढ़ाई मे टैलेंट है, आजमाकर देखना यह मेरा वादा भूलना मत plzz.. यह बच्चें बड़े होकर आपका एहसान जरूर चुकाएंगे
🙏🙏
मेरी क्षमता छिन ली गयी/ख़त्म कर दी गयी, अब मेरे हाथ में कुछ नही है, वरना इतना बड़ा पाप करने जा रहा हूं, शर्म की बात है
मे इतना कमजोर ही नही हूं, लेकिन गलत तरीके से मेरे पर यह आरोप सहन नही हो रहे,
आरोप तो पहले भी थे मेरे पर.. उनसे मैं नही मरा, रही कसर कोर्ट कचहरी के खर्चे इस महंगाई में अब संभव नही है,विकट हालात के साथ बढ़ती आर्थिक समस्याएं ,
अब इतने केस डाल दिये बिना कहें की देखें तो हर 10-20 दिन मे एक कोर्ट तारीख... अकेला इंसान क्या करें ??
में मरा नही हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज ने मेरी "इरादतन" हत्या कर डाली , पुलिस ने ऐसे और भी किया है, 3-4 ऐसे लोग है, उनकी कोई गलती नही (1%भी), विश्वास नही है तो सेन्ट्रल जेल में जाकर देखिएगा, मेरा ऐसा हाल होता... बार बार इनके हाथों से मरने से बेहतर है एकबार ख़ुद ही ख़त्म हो जाना... 😢
✍️ : मनोहर लाल भादू, खारा (सांचौर)
बेशक आरोपी था लेकिन आत्महत्या जैसा कदम और जांच एजेंसी पर आरोप लगाना,निश्चय ही बड़े स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया में जांच जरूरी है।आप गुनहगारों को पकड़ो जो गुनाह किया है लेकिन हर गुनाह में उनका नाम मत लपेटो।
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