सत्ता और लोकप्रियता के खतरों को समझने की दुर्लभ क्षमता जवाहरलाल नेहरू में शुरुआती दौर से ही दिखाई देती थी।
1937 में Modern Review पत्रिका में उन्होंने “चाणक्य” नाम से एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने अपने ही सार्वजनिक व्यक्तित्व की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि कोई नेता “एक विजयी सीज़र की तरह” बन सकता है और “थोड़े से बदलाव” के साथ तानाशाही की ओर बढ़ सकता है।
यह सिर्फ आत्मचिंतन नहीं था, बल्कि लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश था — कोई भी नेता, चाहे कितना भी लोकप्रिय या शक्तिशाली क्यों न हो, सवालों और आलोचना से ऊपर नहीं होना चाहिए।
मजबूत लोकतंत्र वही है जहाँ संस्थाएँ मजबूत हों, सत्ता जवाबदेह हो और नेता खुद भी अपने अधिकारों पर सवाल उठाने का साहस रखें।
Absolute Cinema in Lok Sabha .
Rahul Gandhi : There are 3 types of people
One is a student who questions
One is an Idiot
& another is an Andhbhakt who follows that Idiot
All BJP MPs started crying, Rijiju said Rahul Gandhi is targeting us.
RaGa : But i didn’t take any name, how did you understand it was about you 😭😭😭😭😭
राहुल गांधी: “भाजप हिंसक आहे.”
मोदी (उभे राहून): “राहुल गांधी संपूर्ण हिंदू धर्मालाच हिंसक म्हणत आहेत.”
राहुल गांधी: “नरेंद्र मोदी म्हणजे हिंदू धर्म नाही, भाजप म्हणजे हिंदू धर्म नाही आणि आरएसएस म्हणजेही हिंदू धर्म नाही.”
मोदी पुन्हा बसले!! 😂😂
ब्रह्मपुरी में घर-घर दस्तक, जनता से सीधा संवाद। ✋🇮🇳
आज ब्रह्मपुरी में डोर-टू-डोर जनसंपर्क अभियान के दौरान क्षेत्रवासियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं, सुझावों और उम्मीदों को सुना।
जनता के बीच जाना, उनकी बात सुनना और उनके हक़ की आवाज़ बनना ही हमारी राजनीति का उद्देश्य है।
न कोई दूरी, न कोई दिखावा—
जनता के बीच रहकर, जनता के लिए संघर्ष।
ब्रह्मपुरी की हर गली, हर घर और हर परिवार से जुड़ने का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।
जनता का विश्वास • हमारा संकल्प
ब्रह्मपुरी का विकास • हमारी प्राथमिकता
सवाल— संविधान के 75 साल होने के बावजूद लोग कह रहे हैं कि गोडसे ने गांधी को मार कर अच्छा किया।
सच्चाई यह है कि हमारे समाज में अधिकांश लोगों को अच्छी पढ़ाई लिखाई नहीं मिलती है।
और जिनको अच्छा पढ़ना लिखना नहीं मिलता तो वो लोग व्हाट्सएप को ही यूनिवर्सिटी मान लेता है।
और उस पर आए वीडियो को ही सच समझ बैठते हैं।
— विकास दिव्यकीर्ति
यह 2004 में प्रधानमंत्री के तौर पर डॉ. मनमोहन सिंह का पहला शपथ ग्रहण समारोह था।
जब वे शपथ लेने पहुँचे, तो सीधे बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं जैसे एल.के. आडवाणी और निवर्तमान प्रधानमंत्री अटल वाजपेयी से मिलने गए। 🫡
उन्होंने उन्हें ऐसे गले लगाया जैसे कोई पार्टी सिस्टम ही न हो और उनका आशीर्वाद लिया। न कोई नारेबाज़ी हुई, न ही कोई मज़ाक उड़ाया गया। बस एक बेहतरीन और गरिमापूर्ण व्यवहार देखने को मिला।
6 साल विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में आने के बावजूद, डॉ. मनमोहन सिंह ने कभी बदले की भावना वाली राजनीति नहीं की।
2014 से पहले की राजनीति।