केंद्र पर लगातार हमलावर हैं हेमंत, पर बेहद संयमित ढंग से
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हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं. केंद्र की नीतियों की तर्क के साथ आलोचना कर रहे हैं. हालांकि इस दौरान उनकी भाषा और गेस्चर, दोनों की बेहद सधी हुई, संयमित और गरिमा से भरी हुई दिखती है. उनकी यह शिकायत तो बिल्कुल जायज है कि इस बार के बजट में झारखंड का कहीं जिक्र ही नहीं किया गया.
केंद्रीय बजट 2026-27 में मध्यम वर्ग
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देश के मध्यम वर्ग को दानवीर कर्ण मान लिया गया है : मध्यम वर्ग के लिए हमेशा की तरह इस बार भी बजट में कुछ नहीं है. देश की सरकार ने इस वर्ग को दानवीर कर्ण मान लिया है. उसकी भूमिका सिर्फ देने की है और खुश रहने की इस बात में कि राष्ट्र के विकास में वह अपनी भूमिका निभा रहा है.
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(नोट : दी गयी तस्वीर मेरे लिखे कंटेंट के आधार पर एआइ ने तैयार की है.)
संदर्भ : यूजीसी बवाल
बहुत निर्बल है इंसान...
यूजीसी की नयी गाइडलाइन पर बवाल मचा हुआ है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है. यह पूरा प्रकरण मूलतः राजनीति की उपज है. सत्ता हासिल करने के लिए बड़े वोटर वर्ग को साधना हर राजनीतिक दल की मजबूरी बन चुकी है. इसमें कोई एक पार्टी शामिल नहीं है. हर दल इस होड़ में है कि वह दूसरे से एक कदम आगे कैसे निकले. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दुखद पहलू यह है कि हमारे-आपके बगल में बैठने वाले, साथ काम करने वाले और पड़ोस में रहने वाले लोग इस विवाद के बाद एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हो गये हैं. किसी के भी तर्क में न्याय का कोई सिद्धांत नहीं है, और न ही किसी को उससे कोई सरोकार है. सबको सिर्फ और सिर्फ अपनी जाति की पड़ी है. जहां पूरा समाज इस मानसिकता से ग्रस्त हो, जहां पढ़े-लिखे और खुद को बुद्धिजीवी कहने वाले लोग भी जाति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हों, वहां न्याय की बात करना बेमानी हो जाता है. सबसे ज्यादा कोफ्त तब होती है, जब इसी सोच से जकड़े लोग न्याय, सिद्धांत, नीति और ज्ञान की दुहाई देने लगते हैं.
अपना-पराया, मेरी जाति, उसकी जाति, मेरा करीबी, मेरा खास, जब फैसले इन्हीं कसौटियों पर किये जा रहे हों, तो यह एहसास और गहरा हो जाता है कि इंसान कितना निर्बल है. तमाम मानवीय दुर्गुणों से भरा हुआ. फिर भी खुद को महान समझने वाला.
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उन नेताओं में से हैं, जिनकी जड़ें गहराई से ज़मीन से जुड़ी हैं, लेकिन जिनकी सोच और दृष्टि वैश्विक स्तर तक फैली हुई है. उनका व्यक्तित्व सादगी और संकल्प का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है. एक ओर वे गाँव, किसान, आदिवासी समाज और स्थानीय मुद्दों को निकट से समझने वाले जननेता हैं, तो दूसरी ओर विकास, निवेश, पर्यावरण संतुलन और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर आधुनिक और दूरदर्शी सोच रखते हैं.
उनकी कार्यशैली में संवाद, संवेदनशीलता और संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है. वे केवल प्रशासनिक निर्णय लेने वाले नेता नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं को समझने वाले प्रतिनिधि के रूप में उभरते हैं. परंपरा और प्रगति के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने झारखंड की पहचान को नई मजबूती दी है. यही कारण है कि वे स्थानीय धरातल पर भरोसे का चेहरा हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आत्मविश्वास से झारखंड की आवाज़ रखते हैं.
अब आसमान में भी ट्रैफिक जाम, रांची में उड़ानें हो रहीं लेट
रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से विभिन्न राज्यों को जानेवाली फ्लाइट लगातार विलंब से उड़ रही हैं. वजह आसमान में ट्रैफिक जाम होना बताया जा रहा है. तो भइया.....अब तक तो हम जमीन पर ही ट्रैफिक जाम से बेहाल थे और अब आसमान में भी वही हाल है....मतलब कहीं चैन नहीं है....
रांची पुलिस ने मानव तस्करी के संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 12 बच्चों को मुक्त कराया है। ये वे मासूम हैं, जिन्हें तब उठा लिया गया था जब वे दो, तीन या चार साल के नन्हे बच्चे थे—मां की गोद से, पिता की उंगली थामने की उम्र में। इस गिरोह ने इन बच्चों से उनका बचपन छीन लिया.
रांची जिला प्रशासन ने अत्यधिक ठंड को देखते हुए अब 10 जनवरी तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है. इससे पहले शिक्षा विभाग ने राज्यभर में 08 जनवरी तक के लिए स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया था.
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
इन तस्वीरों को देखें. लोगों से जिस आत्मीयता से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मिलते हैं, वह सबको उनका कायल बना देता है. हेमंत सोरेन पर कभी भी सत्ता का नशा नहीं चढ़ा. वह आम आदमी के बीच उन्हीं की तरह आम दिखते हैं. यह किसी नेतृत्व का सबसे प्रभावी गुण है.
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
बधाई हेमंत सोरेन जी
झारखंड में लगातार दूसरी बार हेंमत सरकार बन रही है. हेंमत और कल्पना सोरने की मेहनत रंग लायी. झामुमो ने न सिर्फ अपनी परंपरागत सीटें बचायीं, बल्कि नयी सीटें हासिल की और कांग्रेस का भी बेड़ा पार लगा दिया.
ऐसा लग रहा है कि किसी राजतंत्र में हमलोग रहते हैं. प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर दिन के 10 बजे से ही पूरे शहर की सड़कों को बंद करके रांची जिला प्रशासन ने अपनी अक्षमता का ही परिचय दिया है. इससे अच्छा तो यही होता कि जिला प्रशासन आज शहर में कर्फ्यू ही घोषित कर देता.
इससे अच्छा तो कर्फ्यू ही लगा देते हुजूर.....
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आज रांची शहर में पीएम के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने जिस तरह से शहर में अघोषित कर्फ्यू लगा दिया है, उसे देखकर नहीं लगता कि हमलोग किसी लेकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं.