बड़े ही दुख के साथ सूचित किया जाता है की हमारे पूज्यनीय पिताजी श्री राजवीर सिंह जी का स्वर्गवास दिनांक 15/01/2025 को हो गया है। प्रभु की ऐसी ही इच्छा थी। जिनका अंतिम संस्कार दिनांक 17/01/2025 को सुबह 10 बजे पैतृक ग्राम खेड़ा गदाई, तहसील उन, जनपद शामली में किया जाएगा।
शोकाकुल:-
अभिषेक बेनीवाल, मोहित बेनीवाल,
एवं समस्त बेनीवाल परिवार ||
(Khera Gadai, District Shamli) :-
https://t.co/bxOpTWujSa
मेरे जीवन का सूर्य, जिनकी रोशनी ने जीवन में हमेशा उजाला किया, जिनकी उंगली पकड़कर चलना सीखा, जिनके जीवन से हमेशा सच्चाई, दृढ़ संकल्प, परिश्रम, समाजसेवा व ईमानदारी की प्रेरणा मिली, श्रद्धेय पिताजी आदरणीय श्री राजबीर सिंह जी आज हम सबको छोड़ कर चले गए ....
दबदबा जाटों का था, दबदबा जाटों का है, दबदबा जाटों का रहेगा।
दबदबा अपना सीना चौड़ा करने में नहीं बल्कि दबदबा 140 करोड़ देशवासियों का सीना चौड़ा कर देने में है।
अभी तो मेडल इस देश के खिलाड़ी जीत रहे हैं मगर हम सबने पिछले दिनों इन्हीं खिलाड़ियों को जातियों में बंधते देखा था
पहलवान बेटियों को जाति देखकर उनके हक़ के लिए समर्थन और टारगेट किया गया था।
दिल्ली की 50% भूमि के मालिक थे जाट!
पंजाब की 98% भूमि जाटों के पास है
हरियाणा की 85% भूमि जाटों के पास है
राजस्थान की 68% भूमि जाटों के पास है
पश्चिमी यूपी की 60% भूमि जाटों के पास है
सिंध तो जाटों की जनक भूमि है ही
कहने का अर्थ पुरे आयवर्त पर जाटों का राज पहले भी था और आज भी है
हरियाणा,राजस्थान से लेकर यूपी तक जाट के ठाट !!
10 सालों से खोई राजनीतिक चौधर फिर से स्थापित कर दी।
बाड़मेर से लेकर बागपत तक
चूरू से लेकर रोहतक,हिसार,सोनीपत तक
नतीजा उठाकर देख लीजिए…तेजल सुपर-डुपर ही सुनाई देगा।
Warm tributes to Madhavrao Sadashivrao Golwalkar (Guruji),the 2nd Sarsanghchalak of @RSSorg .
He inspired countless individuals through his teachings and his vision emphasized the importance of cultural nationalism and the preservation of India's heritage.
उन्हें संस्कारी प्रेमिकाएं नहीं चाहिए
बिंदास होनी चाहिए
मस्त बोलती हुई लहराती हुई
नजाकत करती नफासत दिखाती
घर जाने की जल्दी तो उनमें कतई नहीं होनी चाहिए
प्रेमिकाओं को लेकर चौकन्ने रहते है ये पुरुष
बजार में कौन सी दुकान हॉट कपड़े बेचती इन्हें पता होता है
जबकि उन्हीं दुकानों से नजर नीचे किए गालियां देते ये गुजर जाते हैं
आखिरी कैसे बेशर्म औरतें ऐसा पहनती है
पत्नी साधारण बरसों से चले आ रहे ब्रांड को रिपीट किए जा रही
आखिर इनर वियर का क्या ही काम जो पैसे खर्च किए जाए ऐसा सुनती आ रही
तो पारदर्शी दुकानों से प्रेमिकाएं वही रंग उठा रही जिसमें
देखने की तमन्ना लिए प्रेमी बैठा है
पिछली मुलाकात से तुनका है
अरे यार सेट वाला पहनना था ना
तुम नहीं समझोगी तुम्हें ऐसे वैसे कपड़ों में देखना चाहता हूं
इतना सा मन नहीं रख सकती
प्रेमिकाएं मन रख रही
ये जानती नहीं ये फरेब में हैं
कौन बीमार दिवस रात्रि देह से जुड़ी बाते करता है भला
सुनो ना
वो पीछे एक नॉट वाला ब्लाउज बनवा लो
साड़ी इतनी नीची पहनें की कमर के बल दिखे
तुम्हारे पेट के समतल पर सर ही पटक कर जान दे दूं किसी रोज
तुम्हारे पैर के गुलाबी तलवे को चूमना किसी पंखुरी से नाजुक अहसास है प्रिय
घर की औरत का जिक्र आते इनके मन मलिन हो जाते हैं
अरे क्या है
बस झेल रहा हूं
सत्तर तरह के व्रत
दस तरह की रोक टोक
फरमाइश भी वही
पूजा के फूल अगरबत्ती
वही साड़ी और मैक्सी की बोरिंग कांबिनेशन
प्यार में पागल होने की बजाय
इनसे पूछना मेरी दोस्त
क्या कभी ऐसी दुकानों का पता पत्नियों से शेयर किया जहां
पारदर्शी कपड़े मिलते हैं
कभी इन्हें कहा के बड़े गले का ब्लाउज क्यू नहीं पहनती
कभी इनके कमर के बल पर अपने उदीप्त होठ धरे
कभी इन्हें भोर की बेला में अलसायीं बाहों में भरा
नहीं किया
ये दो दुनियां का मजा लेते हुए जीना चाहते हैं
एक जो संस्कार से भरी इनका घर चलाए
इनके हुकुम सुनें
इन्हें हर बला से बचाए
दूसरी तुम देह भर मेरी जान
ये आठों पहर देह पर कीड़े की तरह रेंगती इनकी नजर को पहचानो
ये तुमसे प्यार नहीं कर रहे
ये अपनी फैंटेसी जी रहे
इन्हें बीमार समझो
कमर के बल ब्लाउज की अकेली डोरी को खीच
तुम्हें निर्वस्त्र करने की कल्पना से भरा आदमी बीमार होता है
ये पारदर्शी कपड़े
ये इनके आह उफ़ में
एक जाल की मानिंद तड़प के रह जाओगी
इनका मन भरते ये वहीं लौटेंगे
अपनी आठों पहर पूजा करने वाली औरत के पास
तुम बस इनके खाली और बीमार समय की शिकार भर हो.....
- शैलजा पाठक
One of the best lines by Gulzar Sahab :-
“ek samandar hai jo
mere kaabu mein hai,
aur ek katra hai jo mujhse
sambhala nahin jaata,
ek umr hai jo bitaani hai
uske bagair,
aur ek lamha hai jo mujhse
guzaara nahin jaata”.
When irfan khan said:
“zindagi chhoti nahi hoti, ham jeena hi der se shuru karte hai.
jab tak raaste samajh me aate hai, tab tak lautne ka waqt ho jata hai”
Every inch of my body felt that 💔.