क्या आपने NaMo App के India Positive सेक्शन को देखा है?
यहाँ आपको देशभर से प्रेरणादायक और सकारात्मक ख़बरें देखने को मिलती हैं। इतना ही नहीं, आप भी अपनी सकारात्मक खबरें इस सेक्शन पर साझा कर सकते हैं और देश की सकारात्मक कहानियों का हिस्सा बन सकते हैं।
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#HamaraAppNaMoApp.
जब गांवों, कस्बों और दूरदराज़ क्षेत्रों के युवा खिलाड़ियों को पहचान, प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का मंच मिलेगा, तब भारत से अनेक नए चैंपियन उभरेंगे। #ProBoxingLeague 2026 केवल विजेताओं का चयन नहीं करेगी, बल्कि पूरे देश में मुक्केबाजी की संस्कृति को मजबूत करेगी और युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास तथा राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रेरणा जगाएगी।
आइए, इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करें और #भारतीय_बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के इस अभियान का हिस्सा बनें।
#PBL2026 #BoxingForBharat #ChampionIndia
बॉटमलाइन ये है कि बच्चे की एग्जाम की तैयारी नहीं है। एग्जाम देने से बचने के लिए उसने जानबूझ कर सेंटर अबुधाबी का डाला। अब जब NTA ने इस पर भी सेंटर चेंज कर दिया है तो वो डिप्रेशन में आ गया है। इसके दोषी माँ बाप हैं जो बच्चों की मर्जी के खिलाफ एग्जाम में झोंक रहे हैं।
बताइए, 29 सांसद हैं लोकसभा में ममता जी के और इनको इस्तीफा एक मजलूम अल्पसंख्यक का ही चाहिए। पर महुआ मैडम तो कहीं थीं कि गुजराती पर भरोसा मत करना। फिर दीदी कैसे गलती कर गईं? सांसद तो कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा जैसों को भी बनाया है, उनसे खाली करवाओ सीट।
#HamaraAppNaMoApp का वॉलंटियर होने का अवसर और आज प्रधानमंत्री जी से मिलने का अवसर मेरे जीवन के सबसे स्मरणीय पल हैं।
जिनको देखकर,सुनकर मेरे जैसे असंख्य नागरिकों को लगा कि राजनीति तथा सामाजिक जीवन में पूर्ण समर्पण,शुचिता, सकारात्मकता संभव है।
मुख्यमंत्री @gupta_rekha जी स्वयं मैदान में उतरकर सरकारी कार्यालयों की व्यवस्था का निरीक्षण कर रही हैं, ताकि आम जनता को समय पर, पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के सेवाएं मिल सकें। जनता की समस्याओं को समझना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और सेवाओं को सरल बनाना ही जनसेवा के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सुशासन का अर्थ यही है कि सरकार जनता के दरवाजे तक पहुंचे और हर नागरिक को सम्मानपूर्वक सुविधा मिले।
मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ने से छात्राओं में संकोच कम होगा, वे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग बनेंगी और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति भी बढ़ेगी। स्वच्छ शौचालय और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएँ छात्राओं को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण प्रदान करेंगी। यह पहल बेटियों की शिक्षा में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर कर उन्हें बिना किसी डर, झिझक या असुविधा के आगे बढ़ने का अवसर देती है। भाजपा सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि बेटियों का स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा ही विकसित समाज की मजबूत नींव है।
यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायक कदम है। यह मॉडल रोजगार, कौशल विकास और सांस्कृतिक विरासत, तीनों को एक साथ आगे बढ़ाता है। जब शिल्पकार महिलाओं को सही प्रशिक्षण, सही बाजार और सही नेतृत्व मिलता है, तो उनका हुनर परिवार की आय बढ़ाने के साथ समाज में नई पहचान भी बनाता है। @nitin_gadkari जी के समर्थन से यह पहल महिला शक्ति को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रभावी उदाहरण बन रही है।
#MereRam
रहा न नगर बसन घृत तेला।
बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला॥
इस चौपाई से हमें सीख मिलती है कि जब मन में प्रभु पर विश्वास, उद्देश्य की स्पष्टता और धर्म का बल होता है, तो बड़ी से बड़ी विपत्ति भी अवसर बन सकती है। हनुमान जी की तरह हमें संकट में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि बुद्धि, साहस और विश्वास के साथ उसका सामना करना चाहिए।
आदरणीय @nitin_gadkari जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपका दूरदर्शी नेतृत्व, विकास के प्रति समर्पण और देश को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का संकल्प हमेशा प्रेरणा देता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर ऊर्जा प्रदान करें, ताकि आपके नेतृत्व में देश प्रगति के नए आयाम छूता रहे।
जिनका काशी से किसी भी तरह का सम्बन्ध रहा है, वे जानते हैं कि @narendramodi जी ने महादेव की काशी के रहवासियों के भले के लिए किस तरह के प्रकल्प किये हैं। विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, चिकित्सा व्यवस्था और महादेव की काशी का संरक्षण, संवर्धन, सब अद्भुत किया है मोदी जी ने
#KashiKeModiJi
भाजपा भाजपा के पार्षदों ने कहा कि टैक्स के नाम पर बिना आधार के जनता को परेशान और अपमानित करने के साथ साथ धमकी देने वाले अधिकारी चिन्हित किए जाएंगे।
कहते हैं अभी तुंरत नहीं जमा करेंगे तो नल काट देंगे और साथ में आरी और अन्य उपकरण लेकर डराने का काम करते हैं
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करना केवल मानवता ही नहीं, बल्कि कानून द्वारा संरक्षित अधिकार भी है।
#RahVeer पहल के माध्यम से मदद करने वाला व्यक्ति अपनी पहचान गुप्त रख सकता है।
आइए डर नहीं, दायित्व निभाएँ .... एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।
📞 सड़क दुर्घटना सहायता हेतु 1033 पर कॉल करें।
अधिक जानकारी: https://t.co/1PIsTEljWw
@MORTHIndia@nitin_gadkari@PMOIndia@PIB_India
#RoadSafety #GoodSamaritan #SaveLives #SadakSuraksha
@ajeetbharti@dpradhanbjp रोहित बेमुला की आत्महत्या से द्रवित होकर सरकार यूजीसी एक्ट लेकर आई है क्या अदिति मिश्रा की आत्महत्या से द्रवित होकर कटआफ सिस्टम में बदलाव किया जायेगा, बिष्णु तिवारी की बरबादी से द्रवित होकर सरकार एस्ट्रोसिटी एक्ट में बदलाव लायेगी।क्या सरकारी नज़र में सामान्य वर्ग की कोई कीमत नहीं
जब 1989 की मीटिंग का “आई-विटनेस” Wi-Fi युग में पैदा हुआ हो
तस्वीर देखकर एक मासूम सा सवाल अपने-आप उठता है:
“भाई साहब, 1989 में आप किस क्लास में थे?”
क्योंकि 1989 में जब यह कथित “ऐतिहासिक मीटिंग” हो रही थी,
तब:
देश में *मोबाइल नहीं थे
इंटरनेट नहीं था
सोशल मीडिया तो दूर, ऑरकुट भी भविष्य में था
और इस तस्वीर वाले युवा…
या तो पैदा ही नहीं हुए थे, या नर्सरी के ब्रह्मांड में थे
फिर भी पोस्ट ऐसे लिखी गई है जैसे
SP की कुर्सी के पीछे खड़े होकर नोट्स लिए हों 😄
व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी का नया कोर्स:
“मैं वहाँ नहीं था, लेकिन मुझे सब याद है”
पोस्ट पढ़कर लगता है:
* मीटिंग का कमरा याद है
* अफसरों की “खामोशी” याद है
* नेताजी के शब्द word-to-word याद हैं
लेकिन…
सरकारी रिकॉर्ड, आँकड़े और नतीजे याद नहीं हैं
यानी
📜 स्क्रिप्ट पूरी है
📊 डेटा ग़ायब है
अब मज़ाक छोड़कर - तथ्य बोलते हैं
1. 1989-91: अगर कानून का राज था, तो अपराध क्यों बढ़ा?
NCRB और राज्य स्तर के ट्रेंड साफ़ दिखाते हैं:
हत्या, डकैती, अपहरण कम नहीं हुए
* 1990–92 में अपहरण for ransom एक “मॉडल” बन गया
* पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में डकैत गैंग्स पीक पर थे
अगर उस मीटिंग से वाकई सिस्टम बदल गया होता,
तो 2–3 साल में असर दिखता -
लेकिन ज़मीन पर उल्टा हुआ।
2. “राजनीतिक सिफ़ारिशों पर तबादले रुके” - सच में?
रिकॉर्ड कहता है:
* 1989–90 में DM–SP की औसत पोस्टिंग महीनों में सिमट गई
* तबादले क़ानून के आधार पर नहीं, समीकरणों पर हुए
* यही वह दौर था जब पुलिस के अंदर यह लाइन चल पड़ी:
> “थाना कानून से नहीं, पहचान से चलता है”
अगर पुलिस आज़ाद थी,
तो 90s में यूपी पुलिस की विश्वसनीयता क्यों गिरी?
*3. डकैत विरोधी अभियान: पोस्ट में तेज़, ज़मीन पर धीमा
* चंबल–बुंदेलखंड की समस्या 1970s से चली आ रही थी
* 1989–91 में
* कई डकैत खुले रहे
* कई राजनीतिक मध्यस्थता से सरेंडर हुए
* चयनात्मक कार्रवाई की शिकायतें आम थीं
अगर अभियान निर्णायक होता,
तो 1990s के मध्य तक डकैत इतिहास बन जाते - पर ऐसा नहीं हुआ।
*4. 1990: मंडल आंदोलन - कानून का राज या कंट्रोल फेल?
* यूपी के कई शहरों में हिंसा
* पुलिस फायरिंग में मौतें
* सार्वजनिक संपत्ति का व्यापक नुकसान
* प्रशासन proactive नहीं, reactive रहा
कानून का राज वह होता है जहाँ
राज्य आग बुझने से पहले पानी डालता है,बाद में बयान नहीं देता।
5. असली विरासत: अपराध + राजनीति का गठजोड़
1989-91 में:
* अपराधी राजनीति में आए
* बाहुबल “लोकप्रिय” बना
* आगे चलकर कई अपराधी विधायक-सांसद बने
यह कहना कि यही दौर अपराध पर निर्णायक वार था,
इतिहास से आँख मिलाकर झूठ बोलना है।
सबसे मज़ेदार सवाल (और सबसे गंभीर भी)
अगर 1989 में:
* पुलिस स्वतंत्र हो गई थी
* अपराध टूट गया था
* कानून की नींव पड़ चुकी थी
तो फिर:
❓ 1990s को यूपी का सबसे अराजक दशक क्यों कहा जाता है?
❓ “माफिया-राज” शब्द क्यों पैदा हुआ?
❓ हर अगली सरकार को
*“अब कानून का राज आएगा”*
क्यों कहना पड़ा?
क्योंकि…
कानून का राज आया ही नहीं था।
इतिहास रील से नहीं, रिकॉर्ड से लिखा जाता है।और जो लोग
1989 की मीटिंग को ऐसे बयान कर रहे हैं
जैसे लाइव स्ट्रीम देखी हो,
उन्हें कम से कम यह बताना चाहिए:
> “यह स्मृति नहीं, श्रद्धा-कथा है।”
आस्था अपनी जगह ठीक है,
लेकिन इतिहास भावनाओं से नहीं, परिणामों से तय होता है।