सत्ता लोलुपता,घुसपैठिया संरक्षण,तुष्टिकरण तथा भ्रष्टाचारके साथ ही नारी शक्ति पर अत्याचार एवं सनातन हिन्दू संस्कृति को बर्बाद करने का प्रयास किया गया।
नया सवेरा बंगाल में अपनी गौरवमयी संस्कृति व विरासत को पुनः स्थापित कर उत्साह, उमंग के साथ विकास की नई इबारत लिखने को लेकर आएगा।
स्वतंत्रता के बाद देश में कई बार बड़ी कठिन व विकट परिस्थितियाँ आई लेकिन हर बार कुछ समय सहने के पश्चात देश ना केवल उससे उबर पाया अपितु गर्व से मस्तक उठा कर सम्पूर्ण विश्व समुदाय में अपनी श्रेष्ठता भी सिद्ध की है।
ताज़ातरीन उदाहरण बंगाल में सत्ता परिवर्तन का है।
मध्यप्रदेश में वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार में मंत्री रहे संत कवि एवं राजनेता स्व.पवन दीवान की एक प्रसिद्ध रचना की पंक्तियाँ, "मर मर कर जीता है मेरा देश, अँधियारा पीता है मेरा देश...." बरबस ही स्मरण हो आती हैं।
ताज़ातरीन उदाहरण बंगाल में सत्ता परिवर्तन का है।
@RailMinIndia In train tickets booking, remaining balance amount in eWallet is not transferable to the customer's bank account. It is violation of customers'rights. Pl. ammend the rules and make the transactions in eWallet more flexible, transparent, popular & consumer friendly.
Balance amount in eWallet is not transferable to the customer's bank account. I think, it is violation of customers'rights. Please ammend the rules and make the transactions in eWallet more flexible, transparent, popular and consumer friendly.
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रेल मार्गों व पटरीयों पर रेल्वे डिपार्टमेंट व रेल्वे पुलिस द्वारा लगातार निगरानी हेतु मॉडर्न टेक्नोलॉजी से समृद्ध मजबूत खुफिया तंत्र आपसी को-ऑर्डिनेशन से हो ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाना चाहिए। रेल मार्गो पर सी.सी. टीवी कैमरों व द्रोन आदि से निगरानी की भी व्यवस्था की जाना चाहिए।
यदि परिस्थितियां अनुकूल रहे तो केजरीवाल के लिए 'आप' पार्टी में भी परिवारवाद की स्थापना का सुनहरा अवसर है (जैसा कि भारतीय फिल्मों में पॉपुलर वाक्य है, "मौका भी है और दस्तूर भी")
लालू प्रसाद-राबड़ी देवी की तरह केजरीवाल भी पत्नी सुनीता को मुख्यमंत्री बनवा सकते हैं लेकिन, तब और अब में यह फर्क हैं कि बिहार में उस समय लालू प्रसाद का एक तरफा वर्चस्व एवं बाहुबली इमेज़ कायम थी जबकि केजरीवाल के केस में 'आप' पार्टी में इस प्रकार की सर्वानुमति बनना मुश्किल लगता है।
यद्यपि अंग्रेजी एक भाषा ही है और इसे एक भाषा की तरह ही महत्व दिया जाना चाहिए लेकिन, सैकड़ों वर्षों की गुलामी ने हमारी मातृभाषा, संस्कृति, स्वाभिमान और आत्मविश्वास को बुरी तरह रौंदा है एवं हमारा सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक परिवेश असीमित रूप से कुंठाग्रस्त हुआ है।
यही कारण है कि देश में अंग्रेजी की दबंगता और रुतबा इस कदर हावी है कि इसके प्रभाव से हम अपनी सर्वसमर्थ मातृभाषा हिंदी को उसके समक्ष तुच्छ समझने की भूल करते हैं तथा हिंदी के बजाय अंग्रेजी को अपनाने वालों को हमारा अपना ही समाज अधिक श्रेष्ठ समझता है।
कई उदाहरण हैं कि मुख्य विषयों का पर्याप्त ज्ञान व उनमें सक्षमता ना होने के बावजूद अंग्रेजी भाषा में अच्छा कमांड होने से नौकरी के लिए चुन लिया जाता है वहीं दूसरी ओर मुख्य विषयों में विशेष योग्यता होने पर भी केवल अंग्रेजी भाषा ज्ञान में कुछ कमजोर रहने से नौकरी नहीं मिलती है।
सरकारी नौकरियों एवं यू पी एस में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म करने से हिंदी विषयक सुधार हुआ है तथा प्रशासनिक कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
अतः इससे आम जनता में अंग्रेजों की तरह गुलामी का वातावरण व रोब जमाने वाले देशी-अंग्रेजों का भाषाई अहंकार अवश्य ही कम हुआ है।
विश्व के सर्वाधिक देशों के शीर्ष नेता जब भी किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं तो उन्हें अंग्रेजी पर अच्छी कमांड होने के बावजूद वे अपनी मातृभाषा में ही भाषण या बयान देते हैं तथा इस पर गर्व भी करते हैं।
हमारे देश के गौरव व "भारत रत्न" पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर एक उत्कृष्ट परम्परा की नींव रखी थी। वर्तमान प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी भी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अधिकतर हिंदी में ही भाषण देते हैं।
इस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युग में ऐसे आधुनिक सॉफ्टवेयर व एप्स आ गए हैं कि बोला या लिखा गया कोई भी वक्तव्य तत्काल विश्व की किसी भी भाषा में रूपांतरित किया जा सकता है। अतः वर्तमान में अंग्रेजी ज्ञान होने का मिथ्याभिमान एवं इसका कम ज्ञान होने पर कुंठित होना गुलामी का प्रभाव ही है।
विपक्ष की भूमिका में नकारात्मकता बढ़ती जा रही है। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नेता विदेशों में अलगाववादियों व देश विरोधियों के पक्ष में भारी गैरजिम्मेदाराना बयान देते फिर रहे हैं। वे विदेशों में देश की छबि धूमिल कर देश की तरक्की में बाधक साजिशों के लिए सहायक सिद्ध हो रहे हैं।