Naktadana electricity distribution unit in Pilibhit district, under Madhyanchal electricity board Uttar Pradesh is currently working in a completely autocratic manner. Breakdowns are too frequent to count. Customers' calls are never attended. Sir , please do the needful.
किस प्रकार के संगठन जिनका आकार और कार्य किसी देश को एक बड़े आकार के रूप में प्रभावित कर रहे हो, जो अपने को किसी भी जवाबदेही से मुक्त रखते हैं और वह संगठन रजिस्टर्ड भी ना हो। क्या ऐसे संगठनों संवैधानिकता प्रदान की जा सकती है?
कॉकरोच जनता पार्टी को भारत के युवाओं के द्वारा दिया जा रहा अपार समर्थन यह सिद्ध करता है कि देश की वर्तमान राजनीतिक पार्टियों से जनता का मोह भंग हो गया है। जनता को एक नए विकल्प की तलाश है जो देश को एक नई दिशा दे सके। शायद यह विकल्प उन्हें इस पार्टी में दिखाई दे रहा हो।
वर्तमान सरकार की अगर कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार से आलोचना करता है आलोचना सकारात्मक हो या नकारात्मक।और ऐसा करना प्रत्येक नागरिक की जागरूकता को दर्शाता है। लेकिन हिंदू समाज के एक छोटे से वर्ग का पेट बहुत जल्दी खराब हो जाता है और वह पागलों की तरह गाली गलौज करने लगता है।
भारत रूस से 50 डॉलर प्रति बैरल तेल खरीद रहा था।
अमेरिका ने कंप्रोमाइज़्ड मोदी को धमकाया और रूसी तेल बंद हो गया।
जंग शुरू हुई, तेल के दाम बढ़े तो ट्रम्प ने कहा रूस से तेल ख़रीदो।
कंप्रोमाइज़्ड मोदी खुश हुए। लेकिन अब रूस की बारी थी उसने कहा- कोई छूट नहीं, 90 डॉलर प्रति बैरल तेल मिलेगा।
अब मोदी जी लगभग दोगुनी क़ीमत में तेल ख़रीदेंगे, अंबानी की रिफाइनरी पैसे बनाएगी और हम सब उसकी क़ीमत चुकाएंगे।
कमज़ोर और कायर नेताओं से आप अगर उम्मीद रखेंगे तो यही होगा। वे अपने हित साधने के लिए देश को दाँव पर लगा देंगे।
यह विक्षिप्त मानसिकता के द्वारा दिया गया एक शर्मनाक फैसला है। यह हमारे न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी एक बहुत ही शर्मनाक और गंभीर सवाल खड़ा करता है।
"पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना और इजैक्यूलेट करना रेप नहीं"
~ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
ये हमारे जज है, और आप इनके खिलाफ नहीं बोल सकते! Contempt of court लग जाएगा!
मगर ऐसे फैसलों का सम्मान कोई कैसे कर सकता है?
Shame!
गलगोटिया विश्वविद्यालय का ओरियो रोबोडॉग का शर्मनाक एपिसोड देश में हो रहे अंधे निजीकरण का परिणाम है। इसे निजीकरण भी नहीं कहा जा सकता। यह देश के संसाधनों की लूट है क्योंकि देश की सारी संपत्ति को सत्ता पक्ष अपने निकट संबंधियों को ओने पौने दामों में समर्पित की जा रही है।
Professor Irfan Habib is a renowned historian and author, his contribution to the academia is immense. I strongly condemn the shameful incident of throwing water on him within the premises of DU.
@CMOfficeUP
Respected sir,
This news clipping about the widely rampant corruption in the office of Inspector of Schools in Pilibhit is a tip in the iceberg, nothing moves here without greasing the palm.This allegedly accused clerk roots the rules in the DIOS office.
आज 25 दिसंबर 2025 क्रिसमस के दिन हिंदू धर्म के नाम पर गिरजा घरों के सामने जो कुछ वे रोकटोक किया जा रहा है उससे संपूर्ण हिंदू समाज का सिर शर्म से झुक गया है । ऐसा कृत्य करने वाले कभी भी सच्चे हिंदू नहीं हो सकते। यह केवल गुंडे हैं हिंदू धर्म गंगा जमुनी तहजीब को सिखाता है।
देश के हिंदी भाषी प्रदेशों में जिस तरीके से पिछड़ों ओर दलितों के साथ अमानवीय व अपमानजनक घटनाओं की एक बाढ़ सी आ गई है और जिस तरीके से इन घटनाओं को अंजाम देने वालों को समर्थन मिल रहा है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि देश में मनुस्मृति को अघोषित रूप से लागू कर दिया गया है।
राजनीतिक पार्टियों को व्यापारियों के द्वारा चंदा देने की संस्कृति जब तक जारी रहेगी, देश आप प्रदेशों की सरकारें जनता के हित में कभी भी काम नहीं करेगी। नेता कुर्सी, व्यापारी पैसे की पूजा करता है।
21 सितंबर 2025 के द टाइम्स आफ इंडिया में प्रकाशित यह खबर व्यापक रूप से फैली हुई अशिक्षा अंधविश्वास की ओर इशारा करती है लेकिन ऐसे अल्प शिक्षित या बिल्कुल अशिक्षित लोग इस तरह की प्रेरणा कहां से लेते हैं देने वाले कौन है ? ऐसे सभी प्रश्नों पर विचार आवश्यक हो जाता है।
नेपाल में Gen Z के द्वारा नेपाल के राजनेताओं और उनके घरों पर हुए हमले नेताओं और सामान्य जनता के बीच की दूरी व राजनीति में पाई जाने वाली गंदगी का एक जीता जागता प्रमाण है नेपाल के राजनेताओं व राजनीति व अन्य देशों के राजनेताओं , राजनीति मैं कोई फर्क नहीं है। फर्क जनता का है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनकी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति के संबंध में हुए कुछ खुलासे यह सिद्ध करते हैं कि सरकार की सभी नीतियां यद्यपि वे जनता के हितों के नाम पर बनती हैं को सचमुच राजनेताओं व उनके सगे संबंधियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।