Seth Chajju Ram Foundation launches “VAKALAT 39A” — a Legal Aid & Court Access initiative for rural Haryana, focused on distressed farming communities and other marginalized persons who need free legal support.
Grateful to celebrate Seth Chajju Ram's birthday at Gandhi Bhawan, Punjab University. Honored by Mr. Ravinder Singh Dhull's presence as chief guest and Dr. Mahender Singh's insightful words as the main speaker. Dr. Ashu's guidance and Parvinder Lamba's eloquence made the seminar
आज सेठ छाजू राम फाउंडेशन एवं Department of Gandhian Studies, Panjab University Chandigarh द्वारा आयोजित सेमिनार में सेठ चौधरी छाजू राम जी के महान व्यक्तित्व पर कुछ शब्द रखने का अवसर प्राप्त हुआ।
सेठों के सेठ चौधरी छाजू राम हरियाणा के कुछ महानतम व्यक्तित्वों में से एक हैं जिनके बारे में हम सब लोग बहुत कम जानते हैं लेकिन उनके बारे में जानना हम सब के लिए बेहद आवश्यक है।
आज सेठ चौधरी छाजू राम जी की जयंती भी है। उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धेय वंदन!
आज सेठ छाजू राम फाउंडेशन एवं Department of Gandhian Studies, Panjab University Chandigarh द्वारा आयोजित सेमिनार में सेठ चौधरी छाजू राम जी के महान व्यक्तित्व पर कुछ शब्द रखने का अवसर प्राप्त हुआ।
सेठों के सेठ चौधरी छाजू राम हरियाणा के कुछ महानतम व्यक्तित्वों में से एक हैं जिनके बारे में हम सब लोग बहुत कम जानते हैं लेकिन उनके बारे में जानना हम सब के लिए बेहद आवश्यक है।
आज सेठ चौधरी छाजू राम जी की जयंती भी है। उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धेय वंदन!
महान दानवीर चौधरी सेठ छाज्जूराम लाम्बा जी की आज 80वीं पुण्यतिथि है।
इतिहास उन्हें हमेशा मिट्टी के एक शानदार पुत्र के रूप में याद रखेगा, जो न केवल एक समृद्ध और सफल व्यवसायी बने बल्कि लोक कल्याण के महान कीर्तिमान स्थापित किए।
आज फिर से समाज को सेठ छाजूराम जी की तलाश है ।#ChajjuRam
एक चौधरीं जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के ब्रिटिश दौर में भी सेठों का सेठ बिजनेस किंग था।जिसने रहबर ए आज़म जैसी शख्सियत तराशी।जाट समाज को एजुकेशनल सोयायटी दी।
महान दानवीर चौधरी सेठ छज्जूराम लाम्बा जी आज उनकी 80वीं पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।
फिर से जाट समाज को सेठ छाजूराम जी की तलाश है ।
Chajju Ram made most of his fortune in Calcutta in the 1920s and 30s. Bhagat Singh stayed in his haveli in 1928 when he escaped from Lahore after Saunders murder.