ये है भाजपा ‘कालीन’ विकास… सुना तो ये था कि दरारों को कालीनों से ढका जाता है लेकिन यहाँ तो गंगा एक्सप्रेसवे के ���ड्ढे ढके जा रहे हैं, कुछ दिनों पहले कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पंखे लगे थे। भाजपा एक्सप्रेसवे को अपने भ्रष्टाचार का ड्राइंग रूम बना रही है क्या?
भाजपा ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए संपन्न पश्चिमी उप्र में साम्प्रदायिकता व जातिगत विभाजन पैदा करके सिस्टेमेटिक तरीक़े से यहाँ की अर्थव्यवस्था पर चोट करी है (खेती-किसानी, उद्योग चौपट, हैंडीक्राफ़्ट-एक्सपोर्ट बर्बाद, भर्ती नहीं, खेल को प्रोत्साहन नहीं, शिक्षा छीन रहे, कला के वैकल्पिक व्यवसाय पर 18 राउंड गोली मारी, श्रमिक असंतोष को बढ़ने दिया जिससे कि कारख़ाने ख़त्म हो जाएं)
- किसानों पर अत्याचार
- किसानी की ज़मीन को छीनने का प्रयास
- 3 काले क़ानून
- किसान यूनियनों में दरार डाली (जो अब किसानों और खापों की समझदारी से पट रही है। सबसे बड़ी बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत और गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह बावड़ी जी साथ आ गये हैं)
- जीएसटी के भ्रष्टाचार से छोटे व्यापारियों को मारा
- खिलाड़ियों का अपमान
- शिक्षा का हनन : स्कूल व गौहर यूनिवर्सिटी बंद करने की साज़िश
- नारी को डराकर घर बैठाना न पढ़ने देना, न खेलने देना
- कला के वैकल्पिक व्यवसाय को 18 राउंड गोली मारकर ख़त्म करना (रंगदारी)
- नोएडा में पचासों हज़ार श्रमिकों का आंदोलन
- दुकानदारी मारी - मेरठ का सेंट्रल मार्केट प्रतीक बना
- इस दस्तकारी-हस्तकारी प्रधान क्षेत्र को जानबूझकर ख़त्म किया
- अमेरिकी डील का सबसे ज़्यादा नुक़सान प. उप्र को हुआ है क्योंकि यहाँ के किसान भी मारे गये और टैरिफ़ बढ़ने से मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ और बाक़ी जगह के कारख़ाने और हस्तशिल्प भी।
- यहाँ श्रमिकों का इतना बड़ा आंदोलन हुआ।
- सामाजिक सौहार्द बिगाड़कर कारोबारियों को डराया
- गौतम बेटी को मारकर पीडीए पर अत्याचार किया, पुलिस से राठी पर मुँह पर लात मरवाई और जाटव भाई के साथ जुल्म-ज़्यादती कर��।भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए 2027 के चुनाव में सबसे अप्रत्याशित परिणाम पश्चिमी उप्र से ही आएगा।
पश्चिमी उप्र के वोटों का सौदा कोई नहीं कर पायेगा क्योंकि 10-15 सालों से लगातार हो रहे उत्पीड़न, उपेक्षा, अत्याचार से अब यहाँ का किसान, मज़दूर-श्रमिक, हस्तकार, युवा, महिला, खिलाड़ी, कलाकार, दुकानदार, व्यापारी-कारोबारी, एक्सपोर्टर, उद्योगपति सब ��ागरूक हो गये हैं, वो अब किसी के बहकावे में नहीं आएंगे।
भाजपाइयों की ठहरी हुई सोच पर सिर्फ़ काई जमती है या मुर्चा-ज़ंग लगती है।
एक तरफ़ आज़ादी के आंदोलन में शहीदों के ख़िलाफ़ उपनिवेशवादियों के लिए ���ुख़बिरी करनेवाले धोखाजीवी संगी-साथियों का भूमिगत काला इतिहास हमेशा ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ का विरोधी रहा है; तो दूसरी तरफ़ दक़ियानूसी भाजपाइयों का पुरातनपंथी तंग नज़रिया ‘आधुनिकता और प्रगति’ का विरोधी है।
भाजपा और उनके संगी-साथियों को न इतिहास की पीढ़ियाँ माफ़ करेंगी न भविष्य की, और वर्तमान की पीढ़ियों के गुनाहगार वो हैं ही।
भाजपा ख़त्म!
#JPNIC_Lucknow
सिर पर ‘सत्ता-सजातीय’ हाथ है
इसीलिए इनकी मूंछों पर ताव है
ऐस लोगों से क्या होना इंसाफ़ है
पर अब ये कुछ दिनों की बात है
क्योंकि ��स्तक दे रहा बदलाव है
हम निलंबन की माँग नहीं करेंगे!
DM पर तो नाजायज़ काम करने पर, हाईकोर्ट के जुर्माने की फटकार पड़ गई लेकिन उनका क्या होगा, जिनके दिशा-निर्देश में ये सब प्रतिशोधात्मक काम हो रहा है?
D से पहले तो C आता है ना?
बाक़ी… जनता समझदार है।
उप्र भाजपा सरकार अगर अपनी इस रोमांचक-लोमहर्षक युद्ध-कला पर टिकट लगा दे तो 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनते देर न लगे।
‘14 दिनों’ में छुट्टा पशुओं से छुटकारे का वादा किया गया था या ‘14 साल’… शायद जनता से ही सुनने में गलती हुई होगी… भाजपावाले तो कभी झूठ बोलते नहीं है।
भाजपा याद रखे जनता अब ये सब और देखने-सहने के मूड में नहीं है।
घोर निंदनीय!
समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश
19, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ
प्रकाशन/प्रसारण हेतु- दिनांकः 03.09.2026
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प���र्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा ने राजनीतिक फायदे के लिए संपन्न पश्चिमी उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिकता व जातिगत विभाजन पैदा करके सिस्टेमेटिक तरीके से अर्थव्यवस्था पर चोट की है। भाजपा सरकार ने खेती-किसानी, उद्योग चौपट कर दिया। हैंडीक्राफ्ट-एक्सपोर्ट बर्बाद कर दिया। सरकारी नौकरी में भर्ती नहीं हो रही है। खेल को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। शिक्षा छीनी जा रही हैं। कल�� के वैकल्पिक व्यवसाय पर 18 राउंड गोली मारी जा रही है। श्रमिक असंतोष को बढ़ने दिया जिससे कि कारखाने खत्म हो जाए।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में किसानों पर अत्याचार हो रहा है। किसानी की जमीन को छीनने का प्रयास हो रहा है। जीएसटी के भ्रष्टाचार से छोटे व्यापारियों को मारा जा रहा है। खिलाड़ियों का अपमान हो रहा है।
श्री यादव ने कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रही है। स्कूल व जौहर यूनिवर्सिटी बंद करने की साजिश हो रही है। नारी को डराकर घर बैठाने की साजिश हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दस्तकारी-हस्तकारी को जानबूझकर खत्म किया जा रहा है। अमेरिकी डील का सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हुआ है। क्योंकि यहाँ के किसान भी मारे गये और टैरिफ बढ़ने से मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ और बाकी जगह के कारखाने और हस्तशिल्प भी। श्रमिकों का इतना बड़ा आंदोलन हुआ। सामाजिक सौहार्द बिगाड़कर कारोबारियों को डराया गया। गौतम बेटी को मारकर पीडीए पर अत्याचार किया। पुलिस से राठी के मुँह पर लात मरवाई और जाटव भाई के साथ जुल्म-ज्यादती की। भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए 2027 के चुनाव में सबसे अप्रत्याशित परिणाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही आएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वोटों का सौदा कोई नहीं कर पायेगा, क्योंकि 10-15 सालों से लगातार हो रहे उत्पीड़न, उपेक्षा, अत्���ाचार से अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, मजदूर-श्रमिक, हस्तकार, युवा, महिला, खिलाड़ी, कलाकार, दुकानदार, व्यापारी-कारोबारी, एक्सपोर्टर, उद्योगपति सब जागरूक हो गये हैं, वो अब किसी के बहकावे में नहीं आएंगे।
(राजेन्द्र चौधरी)
मुख्य प्रवक्ता
ये है पीडीए के अपनेपन से बना कच्चे धागों का पक्का रिश्ता… ये रिश्ता हमने हमेशा निभाया है, हम निभा रहे हैं, हम निभाएंगे…
हमारे लिए रक्षा बंधन बहनों, बेटियों, माताओं के लिए संरक्षित-सुरक्षित वातावरण के निर्माण के लिए वचनबद्धता और समाज के सौहार्दपूर्ण संबंधों का पर्व है।
उप्र के मुख्यमंत्री जी जाट समाज में व्याप्त आक्रोश और मारे गये लोकप्रिय युवा गायक अंकित बालि��ान के ‘दुखी पिता’ की सुनेंगे या उनसे भी लखनऊ के अग्निकांड में मारे गये बच्चे की ‘दुखी माँ’ की तरह धमकी भरे अंदाज़ में ये कहकर निकल जाएंगे कि ‘भाषण सुनने के मूड में नहीं हैं।’
भाजपा सिर्फ़ वोटों की सगी है, जाट या किसी अन्य समाज की नहीं। आज जो जाट नेता भाजपा के साथ अपने स्वार्थवश खड़े हैं, संपूर्ण जाट समाज उनसे जवाब माँग रहा है। भाजपा के सहयोगी जाट नेता ��हाँ भूमिगत हो गये हैं। युवा जाट आज उन्हें तलाशते फिर रहे हैं।
बे-बस बहन : रक्षाबंधन पर मुफ़्त बस का वादा करके बस ही हटवा दी!
“प्राण जाए पर वचन न जाए” कहनेवाले रघुवंशियों तक को ठग लेनेवाले ये भाजपाई क्या वचन निभाएंगे।
‘विश्व आदिवासी दिवस’ की शुभकामनाओं के साथ उनके जल, जंगल, ज़मीन के अधिकार के सरंक्षण का संकल्प दोहराते हैं।
पीडीए में शामिल आदिवासी समाज प्रकृति के सबसे निकट रहनेवाला पर्यावरण संरक्षक होता है। यदि आदिवासी ज्ञान का गहन अध्ययन किया जाए तो पता चलेगा कि आज की शिक्षा और शोध के अनेक विषयों का मूल स्रोत उनकी परंपरा में ही निहित है। मूल निवासी ही हमारे मूल ज्ञान के आधार हैं।
सिर्फ़ सरकारी बस का ही नहीं, डबल इंजन सरकार का भी डबल धुंआ निकल ग���ा है। न उधर बचेंगे, न इधर।
इलाहाबाद के आक्रोशित छात्र पूछ रहे हैं कि ये बस वाया ��्रयागराज, लखनऊ से गोरखपुर जा रही है क्या?
विशेष उल्लेख : जागरूकता जगानेवाली, जन-ज़िम्मेदारी भरी ‘Main Street Media’ को दुस्साहसी पत्रकारिता के लिए बधाई। Mainstream Media इनसे कुछ सीखे।