@PatnaPolice24x7@sp_rural_patna https://t.co/T7wtfTXQoY यह समाचार आर्टिकल पुलिस की आलोचना कम आंखों को खोलने वाला ज्यादा है। आग्रह है कि-पढिये,और जो उचित हो उस पर अमल व कार्यवाही करने की कृपा किजिए।🙏
बिना पुख्ता तैयारी के अभिनय की जा रही नाटक के मंचन को नहीं झेल पाये दर्शक,लोगों का आरोप नाटक कम चित्रहार ज्यादा था।
दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर अथमलगोला रेलवे स्टेशन परिसर में पूरे 1977 से लगातार नाटकों का मंचन होते आ रहा है,( दो वर्ष कोरोना काल छोड़कर) शुरुआत की बात की जाय तो एक जमाना था जब इतनी अत्याधुनिक तकनीक नही होने के वाबजूद भी नाटक का मंचन किया जाता था। और उस दौर में नाटक के प्रति सच्ची श्रद्धा और प्रेम का भाव रखने वाले दर्शकगण भी पाए जाते थे। क्योंकि वह दौर भौतिकता से कहीं कोसो दूर था। वर्तमान परिस्थिति की तरह आधुनिकता हावी नही थी। मनोरंजन का कोई माध्यम नही था। उसी दौर में चलचित्र को पर्दे पर उतारने का एक मात्र माध्यम नाटक था। दर्शकों का अथाह प्यार मिलता था। प्रारंभ में धार्मिक और ऐतिहासिक नाटकों का प्रचलन ज्यादा था। लोगों का उत्साह इतना था की गैस लाइट में और चौंकी को स्टेज बना कर तिरपाल कर नाटक खेलते थे। वो एक जमाना था। पर जैसे जैसे समय का पहिया धीरे धीरे आगे बढ़ा। नाटक के प्रति लोगों का सोच और झुकाव भी बढ़ता और घटता रहा। धार्मिक और ऐतिहासिक नाटक के बाद सामाजिक नाटक और फिल्म स्टोरी जैसी नाटकों के प्रति लोग का झुकाव होने लगा। और इस परिपेक्ष्य में भारतेंदु नाट्य कला परिषद बहादुर अथमलगोला स्टेशन ने तेरे नाम,(2003) धड़कन, (2004) जो स्वर्गीय डाक्टर तनीक प्रसाद सिंह के स्वर्णीम निर्देशन काल में मंचन किया गया था और अब लगभग 20 वर्षों के बाद गदर 2 (2023) जैसे नाटकों का सफल मंचन कर दर्शकों से खूब तालियां बटोरी। पर कहते है न आप कुछ भी कर ले,कितना भी बेहतरीन हो जाए,आलोचना करने वाले बुराइयां ढूंढ ही लेते है। जी हां हम वर्ष 2024 में हुए भारतेंदु नाट्य कला परिषद बहादुरपुर के नाटक की बात कर रहे है। विगत पिछले साल 2023 में गदर 2 और हथकड़ी खोल दो जैसे नाटकों का सफल मंचन कर लोगों के दिलों पर छाप छोड़ने वाली यह वही भारतेंदु नाट्य कला परिषद जो कभी युवा सितारों से गुलजार हुआ करती थी। लोगों को भारतेंदु का इंतजार होता था। पर कुछ स्वार्थी तत्व के लोग अपना स्वस्वार्थ सिद्ध करने के लिए भारतेंदु का गला घोंट दिए। अपनी एक अलग पहचान रखने वाला भारतेंदु संघ आज के परिप्रेक्ष्य मे बिना पुख्ता तैयारी के नाटक मंचन के नाम पर चित्रहार करने का आरोप लिए बैठा है। इसमें भारतेंदु संघ का कोई दोष नही है। दोष तो उसका है जिसमें उसके आंचल तले सब कुछ सिखा,सब कुछ जाना और अपने हित के लिए,अपने खुशी के लिए उसके दामन को दाग कर गया। यह कहना बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं है की आज भारतेंदु संघ की आत्मा कराह रही है। तानाशाह की तरह अपने पद पर आसीन लोग नाटक की गरिमा, उसकी परिभाषा तक भूल गए है। इसका परिणाम यह है की भारतेंदु नाट्य कला परिषद ने इस बार जीत जन्नत,इज्जत नामक नाटक के द्वारा नाटक का बिलकुल ही असफल और आलोचनात्मक मंचन किया। नाटक शुरुआती क्षण में कुछ देर तक दर्शकों को रोक कर रखने में सफल तो रही लेकिन बस दो चार दृश्य के बाद लोगों का अपने घर के तरफ रुख शुरू हो गया। जाते हुए महिला दर्शकों ने कहा की हम पिछले साल के कलाकारों को ढूंढने आए थे। हमे लगा गदर 2 जैसा माहौल मिलेगा। लेकिन यहां न तो पिछले साल के कलाकार दिखाई दिए और न उनके जैसा कोई अभिनय करने वाला दिखाई दिया। इसका एक कारण यह भी है की नाटक के नाम पर चित्रहार प्रस्तुत किया जा रहा था। हर दृश्य में संगीत का समावेश होने से मूल नाटक हत्या की जैसे हो रही थी,वो संगीत की बिसात भी मेरी ही बिछाई हुई थी,कहीं से उसको अलग गीत नहीं मिला,खाली दरिया और मुरझाए लोग इस बात की गवाह है। इस साल नाटक का मंचन अत्यंत ही अनुशासनहीनता से किया गया और नाटक के नाम पर चित्रहार परोसा गया,20 /25 वर्षों के बाद कुछ फूके हुए कारतूस कलाकारों के लाया गया था जो मिस्फायर हो गये।बाबजूद इसके रात्रि साढे नौ बजे के बाद स् शुरू हुआ प्रोग्राम दो घंटे में ही दम तोड़ दिया,अंत समय में गिने चुने पुरुषों की उपस्थति इस बात का सबूत है कि आपने नाटक के नाम पर सिर्फ तमाशा किया। जहां 2023 मे दर्शकों से परिसर अंत तक खचाखक भरा रहता था वहां सिर्फ रात्रि ग्यारह बजे के बाद इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे। इसका कारण बस एक ही दिखाई देता है और वह नाटक जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजनीति का हस्तक्षेप व युवा कलाकारों को संस्था से दूर कर दिया जाना।।(त्वरित टिप्पणी दिल की कलम ✍️✍️ से)
मेरे परिचित जगजीत सिंह जो काशी जनशताब्दी से पटना जंक्शन उतरे सभी वैध टिकट होने के बावजूद पटना जंक्शन पर कार्यरत टिकट संग्राहकों द्वारा गलत व्यवहार किया गया। @AshwiniVaishnaw@drmdnr@RailMinIndia@RailwaySeva
आज से 04 वर्ष पहले जब कोरोना लाॅक डाउन हुआ तब यह उम्मीद नहीं थी की... फिर कभी जब ट्रेनों का परिचालन समान्य होगा तो @athmalgola रेलवे स्टेशन से ZBTT के नाम पर ट्रेन संख्या 18625 /26 पूर्णियाँं कोर्ट हटिया कोसी एक्सप्रेस, 13235 /36 साहिबगंज दानापुर इंटरसिटी, 13287 /88 दुर्ग आरा दक्षिण बिहार एक्सप्रेस व 18622 /21 पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का ठहराव यहां से निरस्त कर दिया जाएगा,समय बीता और जब ट्रेनों का परिचालन समान्य परिचालन हुआ तो उक्त सभी ट्रेनों का ठहराव यहां से निरस्त किया जा चुका था,जो जनहित में क्षेत्र के हजारों लाखों जनता की भावनाओं पर एक गहरा आघात था.... उस दिन,मैं,ट्रेन से गया की यात्रा कर रहा था और मैं व्यक्तिगत रूप से रेलवे के इस निर्णय से बहुत मर्माहत था...? क्योंकि उपयुक्त सभी ट्रेनों के ठहराव के लिए मैने उस समय के क्षेत्रीय लोकसभा सांसद (मुंगेर लोकसभा बिहार) के माध्यम से बहुत लम्बा संघर्ष करके यह उपलब्धि हासिल की थी.... बावजूद इसके मैंने अपने उपर निराशा को हावी होने नहीं दिया,उसी समय मुझे आभास हुआ की जनहित एक लम्बा संवैधानिक संघर्ष मुझे पुकार रहा है...... मैनें कलम की जोर पर अपने बिहार दैनिक यात्री संघ शाखा अथमलगोला के माध्यम से संघर्ष शुरू किया... कभी कभी अथमलगोला रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा के मामले में सन्नाटा देखकर बहुत खेद होता था.... तीन साल हर हर माध्यम से जी तोड़कर संघर्ष किया.... मेरे संघर्ष की सबसे बड़ी खूबसूरती ये थी कि तब से लेकर अब तक मैनें संवैधानिक और कलम का संघर्ष किया,मैने कभी भी किसी भी प्रकार का असंवैधानिक रास्ता इख्तियार नहीं किया.. इन लगभग तीन वर्षों में मैंने 100 से अधिक पत्र अपने लोकसभा सांसद के अलावा रेलवे के सक्षम प्राधिकार व अन्य जनप्रिय प्रतिनिधियों को पत्र लिखा,50 से ज्यादा बार DRM कार्यालय दानापुर व महाप्रबंधक कार्यालय हाजीपुर की यात्रा की,सक्षम पदाधिकारी से मिलता रहा.. बताता रहा... सुनाता रहा..गुहार लगाता रहा..रेलवे बोर्ड नई दिल्ली में भी अपने प्रतिनिधि को भेजकर कोचिंग अधिकारीयों को जनहित की समस्या से अवगत करवाया,तीन बार माननीय प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा... इस दरमियान हमारे क्षेत्रीय मीडिया बंधुओं ने भी हमारा बहुत साथ दिया.. हर खबर को प्रमुखता दी... और अंततः 15 मार्च रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार रेलवे ने उपयुक्त सभी ट्रेनों के ठहराव को अथमलगोला रेलवे स्टेशन पर पुनर्बहाल कर दिया... सबसे बडी़ बात है कि इसमें सभी लोगों ने हमारी पीपुुल फ्रेंडली संवैधानिक संघर्ष की सराहना की ओर मदद की... आप यूं ना कहें वहां ठहराव पुनर्बहाल कर दिया....इसमें तीन वर्षों का खून - पसीना - संघर्ष - भावना - आंसू - धैर्य... आदी का मिश्रण है..... आप सभी सम्मानित माननीय /आदरणीय पदाधिकारियों का मैं तहे दिल से शुक्रिया और ह्दय पूर्ण आभार प्रकट करता हूं सर... @PMOIndia@AshwiniVaishnaw@KailashBaytu@LalanSingh_1@DrmDnr @adrm_dnr @ECRlyHJP@GM_ECRly 🙏🙏
@adrm_dnr इस जनम में तो आपका कर्ज नहीं उतर पाएगा आधार बाबू,आप नाम से ही नहीं बल्कि काम से भी जन जन के आधार हैं., यूं ही नहीं कोई आधार राज बन जाता. 🙏♥️💐✍️
More than 06 MPs recommended the resumption of stoppage of 18625/26, 13235/36, 13287/88, 18622/21, which had been stopping for more than three years before Corona,and the local Lok Sabha MP Raised the issue till Parliament sir? @KailashBaytu@AshwiniVaishnaw@DrmDnr@ECRlyHJP
Even though you are not our MP, you have helped us a lot on this issue of public interest @KailashBaytu sir, only through you we can get some result, this is my prayer to you, I have faith that you Railway Minister Honorable @AshwiniVaishnaw will work on this issue of public interest. By talking to you immediately, you will get some positive results soon, for which lakhs of daily and common railway passengers of Athmalgola - Barh - Patna (Munger Parliamentary Constituency) will always be grateful to you. Regards.🙏
कोई तो है कुमार सागर साहब जो गोदी मिडिया व वन्दे भारत से आगे आकर भारतीय रेल की वो हकीकत बता रहा है जो आज के परिप्रेक्ष्य में सबसे बुरा है,भारतीय रेल जो सुरेश प्रभु के राज में कभी करोड़ों भारतीय की जीवनरेखा कही जाती थी वो अब वैष्णव साहब के राज में कार्पोरेट रेल के नाम से जानी जाती है,कोरोना काल में जब लाखों करोड़ों आम एवं दैनिक रेल यात्री अपनी परिवार के जीविकोपार्जन के लिए एक अदद मेमू स्पेशल ट्रेन चलने की आस लगाए बैठा था तब रेलवे ZBTT नियम के तहत एक अरसे से स्टेशनों पर रूका करनेंवाली ट्रेनों के स्टापेज को खत्म कर रही थी,. जब इससे भी मन नहीं भरा तो लालकिला,तूफान,अपर इंडिया,हावड़ा राजगीर,डुप्लीकेट हावड़ा,जनता जैसी ट्रेनें इतिहास के पन्नों में दफन हो गई,लेकिन जनहित व जनप्रतिनिधियों के दबाव में वो सारे स्टापेज रेलवे को लौटाने पडे़ जो कोरोना काल में रद्द किए गए थे - अब टीस उस स्टेशनों पर ज्यादा उभर रही है जहां वो आज भी लाख प्रयासों के बावजूद कोरोना काल से पूर्व रूकने वाली ट्रेनों के ठहराव को पुनर्बहाल नहीं करवा पा रहे हैं,.कुछ स्टेशनों की महत्ता तो हाॅल्टों से भी बदतर हो गई है और वो स्टेशन यात्री सुविधाओं के मामले में महापाषाण युग में चले गए हैं.,कोरोना सरचार्ज आज भी देशभर के स्पेशल पैंसेजर ट्रेनों में लागू है और यात्री मजबूरन 15 का 35 देकर यात्रा करने के लिए विवश है.,वरिष्ठ नागरिक अपनी रियायत के लिए आज भी रेलवे दया करेगी इस उम्मीद से मुंह ताक रही है,? और क्या- क्या बताएं बहुत है बताने को? फिलहाल वन्दे भारत का लुत्फ लिजिए.. मेमू का क्या है.? वो तो बंद चालू होती रहेगी.. @Railwhispers
एक समय था ( 2019/21) जब दानापुर मंडल में बतौर DRM सुनील कुमार व हाजीपुर जोन में GM ललित चन्द्र त्रिवेदी साहब कार्यरत थे,उस समय कोरोना काल जैसी विकट परिस्थितियों में,जिस तरह दानापुर मंडल में सुनील कुमार साहब नें काम करके दिखाया,लगा कि कोई है जो रेल को बहुत आगे ले जाना चाहता है,हालांकि यात्री सुविधा में कार्य करते रहनें का उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिल पाया,फिर वो चले गए,.बतौर ...GM ललित चन्द्र त्रिवेदी साहब की तो बात ही कुछ और थी,यात्री संगठन के लोग कहते हैं कि उनका काम और नाम इतना मृदभाषी था कि कोई भी आम व्यक्ति को वो बेरंग नहीं लौटाते थे,उनका शिष्टाचार इतना उत्तम दर्जे का था कि उस समय महाप्रबंधक कार्यालय में रेल अफसरों के साथ-साथ कार्यालय के माहौल- दीवार को भी लोग भावनात्मक रूप से हंसते हुए देखते थे,. फिर वो सेवानिवृत्त हो गए.,और फिर शर्मा साहेब का दौर आया... रेलवे संगठन के वरिष्ठ लोगों को इनका ब्यूरोक्रेट रवैया 01 महीनें में ही समझ में आ गया..फिर ECR का सबसे बुरा दौर शुरू हुआ.. समान्य शिष्टाचार में 0 व किसी भी आम जनता से ना मिलने की प्रथा शुरू हुई.. कई लोकसभा सांसद भी इनके कार्यकाल में त्रस्त रहे,अजय निषाद साहब की टिप्पणी शायद आपको याद भी होगी.,लेकिन साहेब का रूतबा था,कि वो अपनें पूरे कार्यकाल में अपनें ब्यूरोक्रेट रवैये से टस से मस नहीं हुए..? तब सवाल है कि आखिर इतना बल कैसे?.. यात्री सुविधा के मामले में ECR जोन में इनका योगदान लगभग 0/सन्नाटा है... खैर अब वो सेवानिवृत हो गए तो कोई बात नहीं लेकिन @RailMinIndia कम से कम ECR में कोई तो एैसा महाप्रबंधक भेजो जो हजारों - लाखों आम एवं दैनिक रेल यात्रीयों की समस्याओं - पीडा़ को समझे व उसका त्वरित निदान करे.... @AshwiniVaishnaw@PMOIndia @adrm_dnr @Railwhispers@ECRlyHJP@GM_ECRly@Ghanshyamdev3
दानापुर मंडल के अथमलगोला (ATL) रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल से पूर्व रूक रही ट्रेन संख्या 18625/26 कोशी एक्सप्रेस, 13235/36 साहिबगंज दानापुर इंटरसिटी, 13287 /88 दुर्ग राजेन्द्रनगर व 18622 /21 पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का ठहराव पूर्ववत पुनर्बहाल करें... हजारों लाखों जनता एक व्यापक पीडा़ व रेलवे स्टेशन एक अजीब सन्नाटे के दौर से गुजर रहा है..ये सिर्फ बड़हिया, मननपुर स्टेशन तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये कई स्टेशनों की बात है,चाहे वो दानापुर मंडल अंतर्गत अथमलगोला रेलवे स्टेशन हो, मोर हो, गांधी हाॅल्ट हो, पंडारक हो, वंशीपुर हो, मनकठ्ठा आदी हो, हमारे अथमलगोला रेलवे स्टेशन के रेल दैनिक यात्री संघ भी बहुत संघर्ष कर रहे है, कई केन्द्रीय मंत्रियों के अलावा,माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय तक को अवगत कराया जा चुका है लेकिन नतीजा सिफर है.. लाखों करोड़ों आम एवं दैनिक यात्रीयों का बड़ा वर्ग सब देख रहा है @PMOIndia @adrm_dnr @GM_ECRly@AshwiniVaishnaw@DrmDnr@Railwhispers@Chandan810Kumar@niranjanchauh19 #ठहराव_नहीं_तो_वोट_नहीं
@ECRlyHJP बतौर महाप्रबंधक के तौर पर यात्री समस्याओं के समाधान के मामले में अब तक के सबसे असफल व प्योर ब्यूरोक्रेट महाप्रबंधक #पूर्व_मध्य_रेल का सबसे बुरा दौर. @Railwhispers 😒
मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के आम यात्रियों व जनता के साथ कबतक आत्याचार किया जाएगा माननीय सांसद @LalanSingh_1 बाबू? कोरोना काल के बाद रूकनेवाली ट्रेनों के ठहराव को निरस्त करने के बाद संसदीय क्षेत्र के अथमलगोला,मोर,मनकठ्ठा,कजरा सहित कई स्टेशन नवपाषाण युग मे चले गए हैं. @AshwiniVaishnaw?
पढिए और दर्द महसूस किजिए की कैसे कोरोना काल को रेलवे ने आपदा को अवसर में बदलकर #अथमलगोला (ATL) स्टेशन को यात्री सुविधा के मामले में महापाषाण युग में ढकेल दिया.? पढिए और दर्द महसूस किजिए? @AshwiniVaishnaw@ECRlyHJP @cptm_ecr @DrmDnr@LalanSingh_1 🙂😌