जिस नदी की #लहर थी सुधा
ओ गरल बन #विषैली बनें
तुच्छ कविता अगर हर कहीं
मंच की मुख्य शैली बनें
पीढ़ियों को गलत मार्ग पर
#मार्गदर्शक लिए जो चलें
किस तरह पेड़ फूलें-फलें
जब #जड़ें#डालियों से जलें!
@ShuklaKalpesh1 Sbke baap ka paisa hai n jo log 6000 ya jo bhi paa rhe h
Truth to ye hai ki jitna bhi nagriko ka bnta h uska 20percent bhi nhi mil rha h bharat me janta ko
हर इक दुश्मन पे पहला वार हूँ मैं
कि लश्कर का सिपह-सालार हूँ मैं
उसे बहका दिया चेलों ने इतना
उसे लगने लगा अवतार हूँ मैं
मुझे फूलों के रिश्ते आ रहे हैं
चमन में सबसे अच्छा ख़ार हूँ मैं
समझदारी की मुझसे क्या तवक़्क़ो
कि जाहिल कौम का सरदार हूँ मैं
समंदर से उलझने चल पड़ा वो
किसी ने कह दिया उस पार हूँ मैं
वो अब शोहरत में हिस्सा माँगते हैं
ये लगता था जिन्हें, बेकार हूँ मैं