@dtptraffic सभी आवश्यक सूचनाएं हिंदी भाषा में भी दी जानी चाहिए । मातृ भाषा को सम्मान दिया जाना चाहिए । सूचना को अधिकतर लोग समझ सकें इसलिए भी हिंदी में भी सूचना देनी चाहिए। धन्यवाद
कृतियों का मूल्यांकन हो । यह लेखक के लिए सबसे अच्छा समय होता है । हजारों मील दूर सफ़र पर यह खुशी साझा कर रहा हूं । आदरणीय Amrita Maurya राजस्थान की जानी मानी लेखिका टीवी पत्रकार हैं । एक साथ चार पुस्तकों को पढ़ कर उनकी पोस्ट पर समीक्षात्मक आलेख प्रकाशित हुआ जिसे आफ्टर ब्रेक ने आज के अंक में भी लिया है । संपादक श्री Manish K Sinha जी का हृदय से आभार ।
मूल आलेख यहां लगा रहा हूं।
आज के गंभीर सार्थक कलमकार -अवधेश सिंह
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कुछ पुस्तकें वैचारिक दृष्टि से इतनी समृद्ध होती हैं कि पढ़ने के लिए पूरा समय माँगती हैं। हमें लगता है, हम समय मिल जाने की प्रतीक्षा में हैं। जबकि सच ये है कि पुस्तकें स्वयं प्रतीक्षा करती हैं कि कोई उनके होने का लाभ उठाए। अवधेश सिंह जी की पुस्तकें इसी श्रेणी में आती हैं।
अंग्रेजी में उनकी नवीनतम कृति 'A Rescue Failure' ऐसी पुस्तक है जिससे हर कोई अपनेआप को जोड़ सकता है। इस पुस्तक की प्रेरणा नोएडा का युवक युवराज मेहता है जिसकी मृत्यु धुंध भरी रात में सड़क के किनारे पानी से भरे गढ्ढे में समा जाने से हुई थी। वह भयानक दृश्य सभी को याद होगा। उसे बचाया जा सकता था। सहायता के लिए लोग आए, सहायता पहुँची भी, मगर अपर्याप्त थी।
इस पुस्तक में अलग-अलग परिस्थिति जनित खतरे, संकट, बचाव की तैयारी और तरीके, आंकलन, उपकरण, प्रशासनिक व्यवस्था, मॉक ड्रिल और सुरक्षा के उपायों पर विस्तार से बताया गया है। यहाँ घटनाओं से सीख पर जो लिखा है, वो सबको पढ़ना चाहिए। सड़क, शहरी जीवन, आम जीवन के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जोखिमों पर ध्यान खींचा है। क्या हो सकता था, क्या किया गया और क्या किया जाना चाहिए- अगर पुस्तक की इन बातों को व्यवहार में लाया जाए तो आम लोगों की जिन्दगियाँ बच सकती हैं। 'ए रेस्क्यू फेलियर' नागरिक को जागरूक बनाने के लिए एक जरूरी पुस्तक है। नागरिक जागरूक है तो प्रशासन को भी उत्तरदायी बनना पड़ता है।
अवधेश सिंह जी की लिखी 16 में से चार पुस्तकें मेरे हाथ में हैं। उनमें से एक 'दुनिया जब ठहर गई' कोरोना काल में विभीषिका से जूझ रही मानवता पर आधारित 22 लेखों का संग्रह है। इसका पहला लेख - फेसबुक बना खुदगर्ज समाज का आईना- लोगों की सच्चाई खोलकर रख देता है। प्रवासी मजदूरों से लेकर स्वास्थ्य सेवाएँ, वैक्सिन और सेंसेक्स - हर विषय पर रिपोर्ट आधारित जानकारियाँ हैं। इसे पढ़कर मन सीधा कोरोनकाल में पहुँच जाता है। बहुत यथार्थ भरा चित्रण है। 'वतन को वापसी' अवधेश सिंह जी की, कोरोना आधारित 11 कहानियों का संग्रह है जो कई बार रोंगटे खड़े कर देता है।
कोरोना काल से निकलने के बाद इन सबको पढ़ना उन दुष्कर दिनों में लौटने जैसा है। उन्होंने इतनी बारीकी से लिखा कि कोई क्षण छूटने नहीं पाया। यह एक दस्तावेज है।
अवधेश सिंह जी का काव्य संग्रह 'अफ़सोस का अमृतकाल' बहुत ही गहरी कविताओं का संग्रह है। समाज की चिंता और राष्ट्र के मुद्दे, और प्रकृति को लेकर इंसान की नियत - सब कुछ कविताओं में समाहित हैं। ये कविताएँ, लेख और कहानियाँ पढ़कर लगता है कि ये साहित्यकार से अधिक किसी पत्रकार की रचनाएँ हैं। हमारे आज से जुड़ी हुई हैं। दिमाग में बैठने का सारा सामान है इनमें।
विचार सबके अपने-अपने अलग हो सकते हैं, मतान्तर बहुत स्वाभाविक है। लेकिन विषय वही- सबसे जुड़े। गंभीर लेखन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जबकि आज लिखनेवाले कम नहीं हैं।
एक टेलीकॉम इंजीनियर, डिजिटल मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और भारतीय सूचना सेवा के पूर्व अधिकारी की कलम कितनी सार्थकता से चल रही है। जब लेखक जरूरी विषयों को अपनी लेखनी में स्थान देता है तो पाठक उससे हटकर नहीं चला जा सकता। बल्कि अपने परिप्रेक्ष्य में उन पर विचार शुरू कर देता है।
-अमृता मौर्य
प्रख्यात पत्रकार जयपुर, राजस्थान
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई
आज की बात -शिक्षक शिक्षा और समाज तथा कबीर
भारत की स्वतंत्रता के बाद ही इस पर चिंतन शुरू हो गया था जो आज तक जारी है ।
प्रधानमंत्री जी का श्री राम कालेज ऑफ कॉमर्स का भ्रमण इस बात को बल दे रहा है ।
अभिभावक के तौर पर यह स्वागत योग्य है और यह संवेदना अच्छे शिक्षा वातावरण बनने का संदेश भी है।
गौर तलब है कि जब 1962 में जब डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति के रूप में पदासीन हुए तो उनके चाहने वालों ने उनके जन्मदिन को “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाने की इच्छा जाहिर की।
डा. राधाकृष्णन ने कहा कि- ”मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने के निश्चय से मैं अपने को काफी गौरवान्वित महसूस करूँगा।” तब से लेकर हर 5 सितम्बर को “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
डा. राधाकृष्णन ने शिक्षा को एक मिशन माना था और उनके मत में शिक्षक होने का हकदार वही है, जो लोगों से अधिक बुद्धिमान व विनम्र हों। अच्छे अध्यापन के साथ-साथ शिक्षक का अपने छात्रों से व्यवहार व स्नेह उसे योग्य शिक्षक बनाता है। मात्र शिक्षक होने से कोई योग्य नहीं हो जाता बल्कि यह गुण उसे अर्जित करना होता है।
आज के संदर्भ में सत्ता के उच्च पद पर आसीन पदाधिकारियों से यही अपेक्षा की जा सकती है ।
शिक्षा का व्यावसायिक स्वरूप और शिक्षक का दुकानदारी या धंधे बाज होने की प्रवृत्ति निंदनीय होनी चाहिए ।
अनपढ़ कबीर की आध्यात्मिक चेतना भी इसका समर्थन करती है ।
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥ कबीर
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सभी मित्रों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं। एक दोहा आज का।
घर घर में हैं राधिका, घर घर हैं गोपाल।
लल्ला या लल्ली कहो, कहो कन्हिया लाल।।
बंधुवर कहो कन्हिया लाल...
आपकी अदालत में एक मतला,एक शेर, फिर मक्ता पेश ए खिदमत है
1
*इल्म इंसानियत रख हर्ज क्या है*
*चारागर इल्म है तो मर्ज क्या है*
2
*मै अपनी जान उसे देकर के रोया*
*जिसे मालूम नहीं था फर्ज क्या है*
3
*बंधुवर जान कर चुप बैठ मत अब*
*ठोक कर सच कहो ये अर्ज क्या है*।
*बंधुवर अवधेश सिंह* 9868228699🙏🏻
आपकी अदालत में एक मतला,एक शेर, फिर मक्ता पेश ए खिदमत है
*इल्म इंसानियत रख हर्ज क्या है*
*चारागर इल्म है तो मर्ज क्या है*।
*मै अपनी जान उसे देकर के रोया*
*जिसे मालूम नहीं था फर्ज क्या है*।
*बंधुवर जान कर चुप बैठ मत अब*
*ठोक कर सच कहो ये अर्ज क्या है*।
*बंधुवर अवधेश सिंह* 9868228699🙏🏻
पार्ट 2 में आप से दुबारा रूबरू हो रहा हूं। आज के साहित्य सृजन से लेकर जेन जी तक की सीधी बात । कृपया मुझे सब्सक्राइब करें ताकि आगामी वीडियो आप तक सीधे पहुंचे । #poetry#divikramesh,#india,#literature
बच्चो के कवि लेखक तो हजारों हैं लेकिन जिन लेखकों से बच्चे वाकिफ हैं वे हैं दिविक रमेश जी । आज इनके जन्म दिवस पर एक छोटी सी बात , बच्चों की तरफ से बच्चों के लिए । आप भी देखना सुनना पसंद करेंगे । तो प्रस्तुत है
#poetry,#awadhesh_singh_official,#childworld,#poetrylovers https://t.co/NuVeBeXX4e
A talk with Divik Ramesh Ji, renowned poet, on his 80th Birthday. कवि दि... https://t.co/XoANtqMFqm via @YouTube "शब्द किसी भी विधा में सृजित हों,चाहे कविता या कहानी या कथेतर,लेकिन जब वे लम्बी उम्र पाते हैं,तो वो इतिहास बन जाते हैं।