सांसद राघव चड्डा जी ने संसद मे आम आदमी का बहुत ही जरुरी मुद्दा उठाया है
जिसकी जरुरत सच मे आम आदमी को बहुत है
उन्होंने बताया कि कैसे प्राइवेट हॉस्पिटल और इन्सुरेंस कम्पनी मिल के आम आदमी को परेशान करते है
एक़ आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से हर साल इन्सुरेंस का प्रीमियम भरता है ताकि जब कभी उसे जरूरत पड़े तो उसका इलाज हों सके
लेकिन जब बो वीमार पड़ता है या कोई दुर्घटना हों जाती है और हॉस्पिटल जाता है तो अस्पताल बाले कही कैशलेस इलाज मना कर देते है
कही पॉलिसी मे कमी निकाल कर इलाज नहीं करते है
ये बहुत बड़ी दिक्कत है कि यहाँ सारी ताकत हॉस्पिटल और इन्सुरेंस कम्पनी के पास है
आम आदमी प्रीमियम भरने के बाद भी इंतजार करता है कि शायद उसका नम्बर आएगा
फिर आम आदमी मज़बूर होकर व्याज पर पैसे लेकर इलाज कराता है और कर्ज मे डूब जाता है
आम आदमी समझ सके ऐसी पॉलिसी की नियम व शर्ते बनाने की जरूरत है इन चीजों मे सुधार लाने की जरुरत है
और हॉस्पिटल और इन्सुरेंस कम्पनी अगर नियम मे लापरवाही करें तो को कठोर कार्यवाही करने के नियम बनाने की जरूरत है
रेलवे स्टेशन पर यह देखकर लग रहा है जैसे रेलवे विभाग घाटे में चल रहा है ,
लोगों के लिए सुविधाए बनी है परन्तु चालू नहीं है बंद पड़ी हुई है @RailMinIndia रेलवे विभाग क्या कहां चाहेगा?
दवा के दामों का खेल – आम आदमी के साथ खुला धोखा ??
नीचे दिख रही तस्वीर में ब्रो- कॉफडेक्स दवा है। मेडिकल स्टोर पर ये मुझे ₹90 में मिली, जबकि इसकी MRP ₹127 लिखी है।
कई मेडिकल स्टोर वाले इसको MRP के दाम पर ही देते है 50 पैसे भी कम नहीं करते है।
मतलब साफ है — जो कीमत असल में कम है, उसे जानबूझकर ज्यादा दिखाया जा रहा है ताकि छूट का झांसा दिया जा सके।
अब सीधे सवाल 👇
जब ₹90 में दवा बिक सकती है तो ₹127 क्यों लिखी?
MRP तय कौन करता है? कंपनी या सरकार?
क्या मरीज को बेवकूफ बनाया जा रहा है?
दवाओं के दाम कंट्रोल करने वाला विभाग कहां सो रहा है?
ड्रग डिपार्टमेंट का काम क्या सिर्फ कागजों में जांच दिखाना है?
बीमार इंसान पहले ही परेशान होता है, ऊपर से ये कीमतों का खेल उसकी जेब भी काट रहा है।
दवा जरूरत है, लग्ज़री नहीं। फिर आम आदमी से ही इतना मुनाफा क्यों?
झारखंड के एक डॉक्टर अनुज कुमार ने पीएमओ को टैग करते हुए लिखा है 👇🏻
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसने करोड़ों घर तबाह किए हैं। सिर्फ़ मरीज़ ही नहीं बल्कि मरीज़ के परिवारों को। 😭
दवाइयों का खर्च वहन करते-करते लोग टूट जाते हैं। और कैसे नहीं टूटेंगे? अगर ₹600 की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है ₹12,000 MRP रखने की। 🤯
जी हाँ! दवाई है Paclitaxel। रिटेलर खरीदते हैं ₹600 में और MRP है ₹12,000.
एक मरीज़ को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं। कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin ? वो कैंसर जैसी बीमारी में, जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना? 🤔
यह तो ठीक नहीं है ना साहब ?😡@PMOIndia
क्या यह लूट जायज़ है?
कमेंट में अपनी राय दे 💬👇
कैंसर बीमारी नहीं , सिस्टम की मार बन चुका है।
कैंसर ने सिर्फ मरीज नहीं तोड़े, पूरे परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला दिया है। इलाज से पहले ही लोग दवाइयों के खर्च में टूट जाते हैं।
अब हकीकत सुनिए 👇
डॉ. अनुज के मुताबिक Paclitaxel जैसी जीवन रक्षक दवा , जिसकी कीमत रिटेलर को ₹600 पड़ती है , उसकी MRP ₹12,000 तय की जाती है!
एक मरीज को कई बार 20–30 वायल की जरूरत होती है। यानी इलाज नहीं, सीधा आर्थिक कत्ल।
और ये सिर्फ एक दवा की कहानी नहीं —> ज्यादातर कीमोथेरेपी दवाओं का यही हाल है।
200% मुनाफा भी समझ आता है, लेकिन 1900% मार्जिन? वो भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में?
अब सवाल सीधे सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से 🔥
दवाओं की कीमत पर कोई सख्त नियंत्रण क्यों नहीं?
NPPA और ड्रग कंट्रोलर क्या सिर्फ कागजों में हैं?
क्या गरीब का इलाज सिर्फ अमीरों के लिए छोड़ दिया गया है?
क्या मुनाफा इंसान की जान से बड़ा हो गया है?
इलाज से पहले दवा खरीदने में ही लोग मर जाएं — यही नीति है?
कैंसर से कम और “दवा माफिया” से ज्यादा लोग मर रहे हैं।
ये बीमारी का इलाज नहीं, मरीज की लूट है।
कब लगेगी इस पर लगाम? और जिम्मेदारी कौन लेगा?
Even a basic essential like salt is being sold as fake in markets.
Imagine the damage to kidneys, liver, etc.
Is there any government department that's working in this country?
क्या आप जानते हैं कि,
अगर आपने IRCTC के वेबसाईट से वेटिंग टिकट बुक किया और वो कंफर्म नहीं हुआ तो खुद रेलवे खुद उस टिकट को कैंसिल कर देती है एवं आप द्वारा भुगतान किए गये राशि का एक बड़ा हिस्सा सर्विस चार्ज के रूप में काट लिया जाता हैं (उदाहरण के लिए ₹240 का वेटिंग टिकट बुक करने पर टिकट कंफर्म न होने पर रेलवे द्वारा मात्र ₹180 वापस होते हैं)
इसका मतलब यह हुआ कि बिना किसी सर्विस का फायदा पाये ही आपको सर्विस चार्ज चुकाना पड़ता हैं।
अब आप इसे रेलवे की लूट कहे या नागरिकों का राष्ट्र विकास में किया गया सहयोग, लेकिन रेलवे को इससे प्रतिवर्ष हजारों करोड़ की कमाई हो रही हैं।
एक RTI द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में रेल ने टिकट कैंसलेशन के नाम से लगभग 2110 करोड़ रूपये कमाये, स्रोत @NCIBHQ
जनता को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है, लेकिन जनता भी reel देखकर मस्त है और जाति, धर्म, मजहब बचाने में लगी हुई है।
खैर मैं चला, 10 बजे तत्काल की टिकट बुक करनी है,
अगर टिकट दलालों से बच गई तो मिल ही जाएगी 🙂
Really disappointed by how India is going about in Test cricket. The all-rounder obsession is absolute brain-fade especially when you don’t bowl them.
Rank Poor tactics, poor skills , poor body language and an unprecedented 2 series white wash at home. Hope this does not get washed off with Test matches 9 months away and this negative approach changes.
जिम्मेदारी तो बहुत बड़ी है और बहुत मेहनत करने के बाद मिली है , एक तरफ जहां लोग बिना मेहनत किए मंत्री बन जाते है , वहां आप जैसे कर्मठ व्यक्ति ने धूप , बरसात , आंधी , तूफान और ठंड में भी जनसेवा का कार्य किया और उसी का परिणाम आपको मंत्रीपद के रूप में मिला है ,
भईया , ऐसे ही अगले पांच साल PR टीम को एक्टिव रहिए , बस थोड़ा चेहरे पर जन चिंता वाले भाव और उकेरिए , आप से बड़ा कोई नेता बन जाए तो कहिएगा ।
आज पचपदरा गाँव में डांगरी रात में शामिल होना था, इसलिए जयपुर से जोधपुर जाने के लिए रोडवेज की बस पकड़ी। संयोग से मैं ड्राइवर के ठीक पीछे वाली सीट पर बैठा था। बर–जैतारण के बीच अचानक ड्राइवर के फोन की घंटी बजी। उन्होंने फोन उठाया, उधर से कुछ सुना और बस इतना कहा “क्या…?”
अगले ही पल बस की रफ़्तार धीमी हो गई।
मैंने झुककर देखा तो ड्राइवर साहब की आँखों से आँसू बह रहे थे, होंठ काँप रहे थे। घबराकर पूछा
“अंकल, क्या हुआ?”
धीमे स्वर में उन्होंने टूटी हुई आवाज़ में कहा -
“मेरे बड़े भाई… हार्ट अटैक से… चले गए…”
क्षणभर के लिए मैं स्तब्ध रह गया। एक तरफ़ परिवार का अचानक उजड़ जाना… और दूसरी तरफ़ कई यात्रियों की जिंदगियों की ज़िम्मेदारी संभालते हुए स्टेयरिंग पर बैठे ये इंसान।
मैंने कंडक्टर को जगाया, हाल बताया और ड्राइवर साहब से कहा “गाड़ी रोक दीजिए, दस मिनट संभल लीजिए…”
पर उन्होंने आँसू पोंछते हुए सिर्फ इतना कहा—
“नहीं बेटा… सबको सुरक्षित जोधपुर छोड़ दूँ। फिर अंतिम बस से जयपुर लौटूँगा… सुबह दौसा पहुँचना है।”
रास्ते भर उनकी आँखों से आँसू चुपचाप टपकते रहे,
पर हाथ स्टेयरिंग पर डटकर, जिम्मेदारी निभाते रहे।
इतना बड़ा दुख… और इतनी भारी ड्यूटी…
और वे दोनों मोर्चे एक साथ लड़ते रहे बिना किसी शिकायत, बिना किसी हल्ले, बिना बाकी यात्रियों को बताए।
जोधपुर पहुँचने तक किसी को एहसास तक नहीं हुआ कि एक व्यक्ति भीतर से कितना टूटकर भी हम सबको सुरक्षित मंज़िल तक पहुँचा रहा था।
भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें, परिवार को शक्ति दें।
और इस कर्तव्यनिष्ठा, धैर्य और मानवीय साहस को मेरा शत-शत नमन।
बस नंबर — RJ 14 PD 6758
राजस्थान रोडवेज के इस चालक के लिए सिर्फ सम्मान ही सम्मान है।
मंत्री जी, यदि संभव हो तो ऐसे कर्मयोगी का अवश्य सम्मान किया जाए।
@DrPremBairwa
#Rajasthan
आज जब कोई व्यक्ति पार्सल भेजता है, तो वह ठीक से पैकिंग करवाकर सिर्फ इस भरोसे पर भेजता है कि उसका सामान सुरक्षित और बिना टूट-फूट के तय जगह तक पहुँचेगा। लेकिन रेलवे से पार्सल उतारते वक्त जिस तरह इन्हें कचरे की तरह पटक-पटक कर फेंका जा रहा है, वह भरोसे का खुला मज़ाक है।
• छोटे गैजेट , कांच का सामान, दवाइयाँ या खाने की चीज़ें — सब जोखिम में।
• न कोई सावधानी, न हैंडलिंग का कोई नियम, न इंसानी संवेदनशीलता।
• जब पार्सल टूटेगा , खराब होगा या बर्बाद होगा, जिम्मेदारी किसकी होगी?
• आम आदमी तो पहले ही पूरा चार्ज और वजन का पैसा चुका देता है — फिर उसे नुकसान क्यों झेलना पड़े?
क्या यही है रेलवे की सुरक्षित पार्सल सेवा”l?
अगर सिस्टम पार्सल की रक्षा नहीं कर सकता , तो जनता आखिर भरोसा किस पर करे ??
🚨 2024 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 52,609 भारतीयों की मौत हुई।
2025 के पहले 6 महीनों में ही 27,000 और लोग मारे गए।
यानी 18 महीनों में 80,000 मौतें !!
फिर भी एक भी बड़ा अधिकारी या ठेकेदार जवाबदेह नहीं ठहराया गया।
@nitin_gadkari जी , कुछ सवाल जिनका जवाब जरूरी है 👇
>• हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद NH आज भी मौत के जाल क्यों हैं?
>• ब्लैकस्पॉट, गलत डिजाइन, गायब साइनबोर्ड और टूटे डिवाइडर का ऑडिट कहां है?
>• ओवरस्पीडिंग, ओवरलोड ट्रकों और नशे में ड्राइविंग पर कार्रवाई लगभग शून्य क्यों है?
>• घटिया हाईवे निर्माण करने वाले ठेकेदार कभी जेल क्यों नहीं जाते?
>• भाषणों के बजाय वैज्ञानिक सड़क डिजाइन और असली जवाबदेही कब मिलेगी?
ये सिर्फ आंकड़े नहीं, इंसानी जिंदगियां हैं। जिम्मेदारी कौन लेगा?
📍 हजारीबाग
HZB आरोग्यम महिला एवं चिल्ड्रेन हॉस्पिटल
डिलीवरी डेट 20 नवंबर थी, लेकिन 8 नवंबर को जबरन ऑपरेशन कर दिया गया और मरीज की मौत हो गई।
जांच का झूठा दिलासा देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
चौकी इंचार्ज बताएं 2 हफ्ते होने को हैं, अब तक क्या जांच हुई? रिपोर्ट कहां है?
रेल मंत्री जी से एक विनम्र (लेकिन कड़वा) अनुरोध है —>>
कृपया एक बार वंदे भारत छोड़कर किसी आम पैसेंजर ट्रेन से यात्रा करके दिखाइए।
शर्तें वही हों जो आम यात्री झेलता है < बिना स्टाफ, बिना कैमरा, बिना VIP सुविधा।
सुनिश्चित करें कि आप ये सब खुद झेलें >>
>• IRCTC साइट पर घंटों जूझकर टिकट बुक करें।
>• वेटिंग → RAC → कन्फर्म का मानसिक तनाव भी लें।
>• प्लेटफॉर्म पर धक्का-मुक्की और अफरातफरी में कोच ढूंढें।
>• अपने दम पर भारी बैग उठा कर सीट खोजें
>• ₹15 की रेलनीर खुद खरीदें (वो भी जब उपलब्ध हो)।
यात्रा के दौरान >
• अधपके चावल , तेल से टपकती दाल और रबर जैसी रोटियां पूरी खाइए।
>• बिना पानी, बदबूदार और ओवरफ्लो टॉयलेट का इस्तेमाल करिए।
>• गंदे सिंक में सुबह मंजन-दातून कीजिए
>• कोच में रिसते पानी, टूटे शीशे और गंदे फर्श के साथ सफर करिए।
>• रात को बिना साफ बिस्तर , बिना चार्जिंग पॉइंट, बिना सुरक्षा सोकर दिखाइए।
और फिर सुबह स्टेशन पर उतरते समय >
>• कूड़े के ढेर और चाय की कीचड़ से होकर निकलिए
>• बिना किसी सहारे के वह अनुभव महसूस कीजिए जो करोड़ों यात्री रोज झेलते हैं।
पूरा किराया मैं देने को तैयार हूं।
बस एक बार यह रियलिटी टेस्ट कर लीजिए।
शायद तब समझ आए कि रेलवे सिर्फ इंजन और वंदे भारत नहीं ,
यात्री की गरिमा भी सिस्टम का हिस्सा होती है।
देश को PR नहीं ,
रेलवे में इंसानियत और बुनियादी सुविधा चाहिए।
जिस देश में जज के घर से नोटों का बोरा मिलता हो ,
IAS, IPS, IRS फेक सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे हों ,
ढाई साल की मासूम बच्ची का रेप हो जाता हो ,
फर्जी मुकदमें में 39 साल तक जेल काटनी पड़ती हो ,
सांसदों और विधायकों को पैसों से खरीद लिया जाता हो ,
उस देश किसी गरीब को न्याय मिलना एक असंभव कार्य लगता है ।।
Clean water → Buy Water Purifier
Clean air → Buy Air purifier
24/7 electricity →Buy Inverter
Quality education → Expensive Private schools
Decent Healthcare → Expensive Private hospitals
Safe paneer → Do iodine test at home
Why the hell are we even paying taxes?