गोरखपुर के एक चर्चित गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर है जिन पर लोगों को भरोसा था आज उनकी लापरवाही के कारण उनका नाम ही शोक संदेश में छप रहा है। यह घटना याद दिलाती है कि जिम्मेदारी और सतर्कता हर पेशे में सबसे जरूरी है।
ॐ शांति 🙏
आज 'संगठन पर्व' के अंतर्गत @BJP4UP के अध्यक्ष पद हेतु मा. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी जी के नामांकन समारोह में उपस्थित रहा।
@mppchaudhary
रेलवे का सबसे बड़ा घोटाला अब ऑनलाइन रिमोट लोकेशन बुकिंग।
लाखों लोगों की कन्फर्म/वेटिंग/पूल्ड-कोटा टिकटें रोज़ाना कैंसल हो जाती हैं, पर सुविधा शुल्क वापस नहीं मिलता। ये सफेद लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह वक्त है सार्वजनिक हित की आवाज़ तेज़ उठाने का IRCTC एवं सम्बंधित अधिकारियों से माँगें :>
नो टिकट = नो सुविधा शुल्क — अगर टिकट जारी नहीं हुई तो शुल्क तुरंत लौटाना अनिवार्य हो।
रिमोट-लोकेशन और एजेंट कोटे की पारदर्शिता सार्वजनिक हो कौन-कितनी टिकटें किस कोटे में जा रही हैं, यह खुलकर दिखाया जाए।
रद्द/कैंसल टिकटों के लिए ऑटो-रिफंड सिस्टम लागू हो मनमानी देरी बंद हो।
टिकट देने का झूठा वादा करने वाले ऐप्स/एजेंट्स पर सख्त कार्रवाई और भारी जुर्माना।
यात्रियों के हक़ की रक्षा के लिए स्वतंत्र निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र शीघ्र लागू किया जाए।
ये केवल पैसों का सवाल नहीं, यह ईमानदारी, न्याय और जनहित का सवाल है।
जब आप टिकट नहीं दे सकते, तो लूटने का कोई अधिकार नहीं। सरकार और रेलवे प्रबंधन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। वरना यह व्यवस्था जनता के विश्वास का कत्ल कर रही है।
हम यात्रियों के साथ हैं , पारदर्शिता, रिफंड और जवाबदेही अब अनिवार्य हैं।
राधा बोल नहीं सकती है
करवा चौथ के दिन पति ने जानवरों की तरह पीटा और घर से निकाल दिया।
राधा को बुरी स्थिति में देखकर लोगों ने पानी पीने को कहा तो उसने बताया कि मेरा व्रत है, मैं पानी नहीं पी सकती हूं।
क्या आप इस जांबाज़ आर्मी अधिकारी का साथ देंगे या अमीर एयरलाइन मालिकों का ।
🇮🇳 किसी एक गवाह की आंखों देखी गवाही जो मुझे पता चली — स्पाइसजेट और लेफ्टिनेंट कर्नल विवाद की असली कहानी
( ये अवश्य ध्यान रहे की इन प्राइवेट एयरलाइन के अधिकतर पुरुष ग्राउंड स्टाफ और अधिकारी श्रीनगर में कश्मीरी मुस्लिम ही होते हैं .
श्रीनगर एयरफ़ील्ड इंटेलिजेंस मामलों और सुरक्षा के लिए लगभग तीन साल मेरे अधीन रही है और मैं जानता हूँ की srinagar airport का लोकल स्टाफ non Kashmiri लोगों के साथ कैसा बर्ताव करता है )
26 जुलाई 2025, श्रीनगर एयरपोर्ट।
जब देश कारगिल विजय दिवस मना रहा था, तब एक जांबाज़ फौजी अफसर — जो किसी आपात पारिवारिक कारण से छुट्टी पर जा रहे थे — स्पाइसजेट के ज़ालिम स्टाफ और मीडिया के झूठे प्रचार का शिकार बन गया।
मैं खुद उस बोर्डिंग गेट पर मौजूद था, और आंखों के सामने जो हुआ, वो आज भी दिल झकझोर देता है।
लेफ्टिनेंट कर्नल अकेले थे। उनके पास सिर्फ एक छोटा-सा कैबिन बैग था, 8-9 किलो का। न कोई चेक-इन बैग, न कोई VIP रौब।
बैग को पहले ही चेक-इन काउंटर पर स्पाइसजेट स्टाफ ने बिना आपत्ति पास कर दिया था।
लेकिन जैसे ही वो बोर्डिंग गेट पर पहुंचे, 4-5 ग्राउंड स्टाफ अचानक उन पर झपट पड़े — बैग का वज़न बहाना बनाकर।
अफसर ने बेहद शांतिपूर्वक समझाया, कुछ कपड़े बाहर भी निकाले, छोड़ने को तैयार हो गए — सिर्फ इसलिए ताकि किसी से टकराव न हो।
पर वहां मौजूद स्टाफ में से एक की बेहूदी टिप्पणी आज भी कानों में गूंजती है —
“आज आर्मी वाला फंसा है।”
यह कोई संयोग नहीं था। यह बदनीयत थी। एक ईमानदार सैनिक को डराकर, अपमानित कर, शायद पैसों की वसूली का मौका ढूंढ़ा जा रहा था।
जब अफसर ने वरिष्ठ अधिकारी से बात करने की गुज़ारिश की, तो कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा बोर्डिंग गेट उनके सामने ही बंद कर दिया गया।
स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कई स्टाफ उन्हें घेरने लगे, धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
वो अकेले थे। निहत्थे थे। पराक्रमी थे, मगर संयमित भी।
झगड़े का जो आरोप अब उन पर लगाया जा रहा है, वो सरासर झूठ है।
असल में उन्होंने हाथ उठाया लेकिन सिर्फ तब जब उनके साथ हाथापाई की गई , अब एक आर्मी ऑफिसर से भिड़ने से पहले इन चूहों को ये ध्यान रखना चाहिए की चाहे कुल्हाड़ी पैर पर मारो या पैर कुल्हाड़ी पर कटता पैर ही है , लेकिन तब भी कश्मीर पुलिस ने उनके खिलाफ ही FIR लिखी (पैसा, Army hate)
अब कुछ स्पाइसजेट कर्मचारी खुद को चोट दिखाकर अस्पताल पहुंच गए — ताकि कहानी पलट सकें।
मीडिया के कुछ हिस्से बिना जांच किए सिर्फ स्पाइसजेट की बात दोहरा रहे हैं।
ये पत्रकारिता नहीं, पेड पीआर है।
ये न्याय नहीं, साज़िश है।
ये राष्ट्र के उन वीरों का अपमान है जो देश के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करते।
🚨 आज ज़रूरत है कि जनता, सेना और सरकार सच्चाई के साथ खड़ी हो।
क्योंकि कल अगर एक सैनिक की इज़्ज़त सुरक्षित नहीं, तो फिर देश की भी नहीं होगी।
जय हिन्द!
भारतीय सेना अमर रहे!
झूठ के खिलाफ एकजुट होइए — सच्चाई के साथ खड़े होइए।
जवाब अवश्य दीजिए आप किसके साथ हैं .
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कुछ वीडियो सिर्फ देखने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होते हैं।
आतंक का मज़हब तो सबने पहचान लिया लेकिन भूख का कोई धर्म नहीं पहचान पाया😞
ये वीडियो सिर्फ एक संदेश नहीं, बल्कि दिल को छू जाने वाली पीड़ा है।
शहरी, मध्यम वर्गीय अभिभावक बहुत गाजे बाजे के साथ बच्चों का प्रवेश शहर के, क्षेत्र के किसी नामी गिरामी कान्वेंट स्कूल में कराते है और उनका यह उत्साह केवल कक्षा 12 तक ही बना रहता है, वो ये देखना चाहते हैं कि हमारा बच्चा स्कूल में टाई बेल्ट पहनकर जा रहा कि नहीं, प्राइवेट बस से जा रहा है कि नहीं। वह स्कूल में क्या सीख रहा है उसके साथ स्कूल में कैसा व्यवहार हुआ इस पर अभिभावक का कोई फोकस नहीं है, बहुत सारे प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के साथ जघन्यतम घटनाएं भी हुई हैं, चाहे वो प्रयागराज की घटना हो चाहे अवध की घटना, बच्चों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा है इन घटनाओं में फिर भी अभिभावक क्यों चुप हो गए? ये समझ में नहीं आया और समाज। के लोग भी चुप हो गए किसी ने एक बार भी इन। संस्थानों पे सवाल नहीं उठाया जबकि सरकारी संस्थानों पर कोई भी यूं, भी सवाल उठाने उठकर चला आता है। फिर भी अभिभावकों को लगता है कि हम अपने बच्चे को सामान्य बच्चे से कुछ अलग प्रदर्शित करेंगे समाज में अपना रुतबा बनाएंगे जलवा बनाएंगे। कि देखो हमारा बच्चा कितने अच्छे शहर के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित कान्वेंट स्कूल में पढ़ रहा है और लोगों को चिढ़ाएंगे धीरे धीरे कक्षा 12 के बाद उनका यह मोह भंग हो जाता है, फिर भारत देश के जितने भी अभिभावक हैं सब का रुझान सरकारी स्कूलों पर एकाएक बढ़ने लगता है उनको लगता है सरकारी संस्थान से बेहतर कुछ भी नहीं है, सभी को सरकारी मेडिकल कॉलेज चाहिए, सभी को सरकारी आईआईटी चाहिए, रुड़की चाहिए, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज फिर किसी को प्राइवेट कुछ भी नहीं चाहिए, यहां तक कि आईए एस पीसीएस जैसी सरकारी सेवाएं भी चाहिए, यहां तक कि जब हम रिश्तेदारियां ढूंढने जाते हैं तो भी सरकारी सेवाओं म को ही महत्व देते है यदि हम बेटी के लिए कोई वर? ढूंढते हैं तो वह दामाद सरकारी सेवा में ही होना चाहिए।यह शादी की पहली शर्त होती है यदि बच्चा आईएस है, पीसीएस है, इंजीनियर है, डॉक्टर है तो उसका शादी में मूल्य बहुत लगेगा क्या हम ये सोच रहे हैं कि हम इंटर तक प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा दे रहे हैं, क्या प्राइवेट संस्थान हमारे बच्चों का उचित मानसिक विकास कर पा रहे हैं क्या बच्चे को जो चाहिए वो दे पा रहे हैं? अगर वो नहीं दे पा रहे हैं तो उन सबकी कमी हम ट्यूशन से पूरी कर रहे हैं फिर भी बच्चा अपने बचपन से महरूम रह जा रहा है बहुत सारी ऐसी बातें हैं जो उसके बचपन में होनी चाहिए लेकिन उससे वंचित हो जा रहा है, अभिभावकों का यह मोह जल्दी ही समाप्त हो जाता है 12वीं के बाद उनको। सिर्फ और सिर्फ सरकारी शिक्षा चाहिए। सरकारी नौकरी चाहिए। इसलिए आपसे अनुरोध है की सरकारी शिक्षा ही बेहतर है उसी को आगे बढ़ाने का हम सभी प्रयास करें और देश के लिए ऐसा नागरिक पैदा करें जो हमारी सीमाओं की हिफाजत करें हमारी हिपाजत करें मानवता की हिफाजत करें और अपने परिवार की इबाजत करें जय हिंद, जय शिक्षक जय भारत 30/6/25 राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़।