2012-16 में 11.89 लाख संज्ञेय IPC मामले दर्ज हुए। शहर सवालों से घिरे थे, मगर सरकार का ध्यान परिवार और जश्न पर था।
सवाल आज भी वही है, जब हालात ऐसे थे, तो जश्न किस बात का था?
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अखिलेश जी, पिछड़ों के नाम पर तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब सत्ता में थे तो...
ज्योतिबा फुले नगर का नाम बदलकर अमरोहा कर दिया था।
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सपाई गुंडई-लठैती की बात न करें, यह हो ही नहींसकता.मंचसेखुलेआम मारपीट की वकालत और जब हम पीटते हैं तो रोने भी नहीं देतेजैसी धमकियां देना ही क्या समाजवाद का असली चरित्र है?शिवपाल यादव का यह पुराना बयान साबित करता है कि इनकी राजनीति में लठैती और खौफकामिजाजआजभीनहीं
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अखिलेश यादव के कैमरा रोल में जरा झांककर देखिए…
गिरगिट के अनेक रंग, अखिलेश जी के अनेक रूप!
अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और दूसरे विवादित चेहरों के साथ तस्वीरें।
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मौकापरस्ती के मास्टरमाइंड,भ्रष्टाचार का दोहरा मापदंड!एक तरफ अखिलेश यादव मंच से अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच कराने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, तो दूसरी तरफ उनके सगे चाचा शिवपाल यादव कार्यकर्ताओं को'थोड़ी-बहुत और बुद्धि लगाकर चोरी करने' की खुली नसीहत देतेहैं#Parivarwadke34saal
महिलाओं, दलितों, और अफसरों के बारे में ऐसी राय रखने वाले आदमी को उत्तर प्रदेश का गृह मंत्री बनाना चाहती है समाजवादी पार्टी, सोचिए जब यह सरकार में थे तो किस तरह के लोगों को बड़ी-बड़ी गद्दियाँ सौंप कर बैठे होंगे
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PDA का दावा है सामाजिक न्याय, लेकिन सपा का हिसाब क्या कहता है?
2012 में दलितों हिंसा की खबरें, SC/ST कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का सपा ने विरोध किया। 2015-16 में उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ अपराधों में 25% की वृद्धि की रिपोर्ट सामने आई।
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सपाइयों, 2014 याद है? मुलायम के “लड़कों से गलती हो जाती है” बयान पर देशभर में सवाल उठे। बान की मून ने भी ऐसी सोच खारिज करने की अपील की थी।
34 साल की विरासत पर तो सपाइयों को गर्व है, यूपी की बदनामी की जिम्मेदारी कब लोगे?
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अखिलेश जी, जनता अपने पैसे का हिसाब मांगती है।
CAG रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से मार्च 2017 के बीच यूपी सरकार के विभागों ने ₹97,906.27 करोड़ की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए।
₹97,000 करोड़ के सवालों पर चुप्पी नहीं, पूरा हिसाब चाहिए।
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PR और प्रचार पर खर्च करने का 'सपाई मॉडल'
2012-13 में सपा सरकार ने बेरोजगार युवाओं को सहारा देने की योजना शुरू की, लेकिन RTI रिपोर्ट के अनुसार ₹8.5 करोड़ भत्ते देने में ₹12.5 करोड़ खर्च कर दिए।
34 साल का जश्न मनाईए, लेकिन इस घोटाले का जवाब कौन देगा?
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अखिलेश जी, गोमती रिवरफ्रंट याद है?
विकास के नाम पर शुरू हुई इस परियोजना में लागत बढ़ गई लेकिन काम अधूरा रह गया
अखिलेश जी, कब दोगे जवाब?
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अखिलेश जी, 2012 की लैपटॉप योजना याद है ना?
2015 सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक 18.90 लाख पात्र छात्रों में 4.55 लाख छात्र लाभ से वंचित रह गए,
सपा के 34 साल का जश्न मनाने वालों…
उन युवाओं को जवाब कब मिलेगा, जिन्हें लैपटॉप देने का वादा किया गया था?
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नहीं भूल सकता यूपी, गेस्ट हाउस कांड!
2 जून 1995 को मायावती जी पर सपाई कार्यकर्ताओं ने किया था खूनी हमला।
समर्थन वापस लेने पर एक महिला पर हमला- यही था तुम्हारा समाजवाद?
34 साल का जश्न उस शर्मनाक इतिहास को नहीं धो सकता!
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