📿।।ॐ नमः शिवाय।।📿
न जानामि योगं जपं नैव पूजां।
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं॥ (मानस)
भावार्थ:- हे देवाधिदेव महादेव! मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ।।
🙏🌿🌺 जय शिव शंभू 🌺🌿🙏
नितिन नवीन जी के भाषण के बीच रैली से लोग उठकर चले गए, वीआईपी कुर्सियाँ तक खाली दिखीं। मध्य प्रदेश में भी कुछ दिन पहले यही नजारा था। क्या यह महज संयोग है या भाजपा के नेतृत्व की घटती लोकप्रियता का संकेत?
जब कोर वोटर ही उत्साह नहीं दिखा रहा, तो केवल नए वोट बैंक की राजनीति कितनी दूर जाएगी?
मध्यप्रदेश सरकार का 73% आरक्षण वाला केस आज निरस्त हो गया। यह भाजपा सरकार द्वारा अपील किया गया था। पहले ही हायकोर्ट निरस्त कर चुकी थी। पर ओबीसी प्रेम में अंधी भाजपा भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताने के एफिडेविट को आधार बना कर ओबीसी को ऐतिहासिक प्रताड़ना का शिकार बता रही थी।
बहुत बढ़िया कार्य YFE द्वारा! देते रहो गाली! लोग समाज के लिए लड़ते रहेंगे।
मैं राजनीति में क्यों आया
#छद्मधर्मनिरपेक्षता और #छद्महिन्दुत्व की राजनीति भारतीयों को धर्म के नाम पर ध्रुवीकृत करती है, जाति के आधार पर विभाजित करती है और भारतीयों की चिताओं पर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकती है।
मेरा विश्वास है कि भारत को विभाजन की इस राजनीति से मुक्त होकर एक ऐसे राष्ट्रीय उद्देश्य को पुनः खोजना होगा, जो सबको एक सूत्र में बाँध सके। इसका विकल्प किसी अन्य प्रकार की पहचान-आधारित राजनीति नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत चेतना, संवैधानिक लोकतंत्र तथा प्रत्येक नागरिक के कल्याण और गरिमा पर आधारित राजनीति है।
लगभग चार दशकों तक लोकसेवा में रहने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि केवल शासन-व्यवस्था या न्यायिक सुधार भारत के क्षरण को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। भारत को इससे कहीं अधिक गहरे सभ्यतागत पुनर्जागरण की आवश्यकता है।
ज्योतिर्मठ @jyotirmathah के जगद्गुरु पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज जी के आशीर्वाद से, इसी विश्वास के साथ, 3 अक्टूबर 2026 को भारत के सनातन सभ्यतागत केंद्र काशी से मैंने अपने सार्वजनिक जीवन के एक नए अध्याय का प्रारम्भ किया।
मैं सर्वजन सनातन पार्टी (ससपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राजनीति में आया हूँ।
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश 1947 के विभाजन तक एक ही देश थे। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने अपनी पहचान इस्लामी सभ्यता से जोड़ी, जबकि भारत की पहचान उसकी सनातन सभ्यता से जुड़ी है।
यह सभ्यतागत पहचान अतीत का कोई अवशेष मात्र नहीं है। यही भारत के एक सभ्यता और राष्ट्र के रूप में निरन्तर बने रहने का आधार है। अतः इसका संरक्षण, सुदृढ़ीकरण और भावी पीढ़ियों तक उसका संवहन आवश्यक है।
भारत को न तो पाकिस्तान और बांग्लादेश का भौगोलिक विस्तार बनने दिया जा सकता है और न ही उसे पश्चिमी सभ्यता की प्रतिकृति में बदलने दिया जा सकता है।
जिस समाज ने अपनी पहचान खो दी, उसने सब कुछ खो दिया।
भारत को भारत ही बने रहना होगा।
भारत को आधुनिक बनना है, विकसित होना है और समृद्ध होना है—लेकिन भारत बने रहकर।
इसीलिए हमारी भारत पुनर्निर्माण योजना का उद्देश्य संवैधानिक लोकतंत्र को भारत की सनातन सभ्यतागत चेतना के साथ तथा आधुनिक ज्ञान और प्रौद्योगिकी को हमारी सभ्यता की ज्ञान-परम्पराओं और जीवन-मूल्यों के साथ समन्वित करना है।
हमारी चार मूलभूत प्राथमिकताएँ हैं:
➡️ शिक्षा — सभी के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता की निःशुल्क शिक्षा।
➡️ स्वास्थ्य — सभी के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता की निःशुल्क स्वास्थ्य-सेवा।
➡️ आजीविका — सभी के लिए उत्पादक अवसर, उद्यमिता और आर्थिक सुरक्षा।
➡️ सभ्यतागत पुनर्जड़ाव — भारत और उसके जनमानस को उसकी भाषाओं, ज्ञान-परम्पराओं, पवित्र संस्थानों, संस्कृति, परिवार और प्रकृति के साथ उसके संबंध से पुनः जोड़ना।
हमारा दृष्टिकोण इन आधारभूत सिद्धान्तों पर आधारित है:
— संवैधानिक निष्ठा।
— सभ्यतागत निरन्तरता।
— सर्वजन कल्याण।
— सभी के लिए न्याय और गरिमा।
— अन्तरपीढ़ीगत न्याय।
सनातन एक ऐसी सभ्यतागत जीवन-दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है, जो धर्म, सत्य, कर्तव्य, न्याय, करुणा, परिवार, समाज और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित है।
हमारा उद्देश्य न तो आधुनिकता को अस्वीकार करना है और न किसी अन्य सभ्यता की नकल बनना।
उद्देश्य है—भारत की अपनी सनातन सभ्यतागत नींव पर एक आधुनिक, समृद्ध और शक्तिशाली भारत का निर्माण करना।
एक ऐसा भारत जो हो:
— न्यायपूर्ण।
— सुरक्षित।
— समृद्ध।
— सुसंगठित।
— स्वावलंबी।
हम अतीत को पुनः उसी रूप में स्थापित करना नहीं चाहते।
हमारा उद्देश्य है कि भारत को जो श्रेष्ठ विरासत में मिला है, उसे ग्रहण करें, वर्तमान के अनुरूप उसका पुनर्नवीनीकरण करें, ज्ञान और नवाचार के माध्यम से उसे और समृद्ध करें तथा उसे भावी पीढ़ियों तक और अधिक सुदृढ़ रूप में पहुँचाएँ।
यही सर्वजन सनातन पार्टी की भारत पुनर्निर्माण योजना है।
— आधुनिक दृष्टि।
— सनातन जड़ें।
— एकजुट संकल्प।
जो भी इस दृष्टि से सहमत हैं, मैं उन सभी को भारत के पुनर्निर्माण के इस महायज्ञ में हमारे साथ जुड़ने का आह्वान करता हूँ।
आइए, मिलकर एक सभ्यतागत भारत का पुनर्निर्माण करें।
वीडियो में ओबीसी बहुजन ST महिला को पीट रहा है
इन नीच कर्म वाले लोगों का गजब खेला है एक दूसरे को मारते पीटते है
फिर इसी घटना को शेयर कर हमारे खाते में डालकर
खुद को शोषित पीड़ित प्रचारित कर रहे है
महाराष्ट्र हाई कोर्ट में बीजेपी लिख कर दे रही है कि 50 परसेंट जातिगत आरक्षण की सीमा तोड़ दो
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क्या बीजेपी का अंतिम उद्देश्य GC बच्चों से भीख मंगवाना ही है?
इतनी नफरत ?
में कैसी भी हालात में लड़ता हूं
दिल्ली मेरे लिए बिल्कुल नई थी
आज दिल्ली की हर विधानसभा में मेरा परिवार है।
क्या हम इतने स्वार्थी है अपने क्रांतिकारियों का ख्याल नहीं रख सकते चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति को 3 घंटे में स्वच्छ कराया पेंट कराया एवं पार्क को सफाई कराई।
हर कार्य आसान होता है बस जिद करनी है पदयात्रा के बीच आदर्शनगर में मेरे आइडल की दुर्दशा ने मुझे झकझोंर दिया।
11 अक्टूबर जंतरमंतर चलो
महाराष्ट्र पुलिस ने सीजेपी के कार्यकर्ताओं को नोटिस देकर पूछा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए वे क्यों जा रहे हैं और उनके आने-जाने तथा दूसरे खर्चों की फंडिंग कौन कर रहा है, इसका स्रोत क्या है?
इस बारे में चिरकुट सम्राट श्री अभिजीत दिपके को सुनिए और अजीत भारती जी ब्रो का यह वीडियो अवश्य देखिए!
भाजपा का कहना है कि आरक्षण की सीमा कोई ऐसी सीमा नहीं कि उसे तोड़ा न जा सके। मराठा समाज को तीन बार आरक्षण देने और तीनों बार कोर्ट से रोकने के बाद पुनः भाजपा कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%), भाजपा सरकार हर राज्य में 50% से आगे जा चुकी है और हर कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
अतः, जब आपको चटआ गिरोह कहे कि राहुल गाँधी आरक्षण बढ़ा देगा, उसके मुँह पर तथ्य मारिए। भाजपा शीघ्र ही निजी क्षेत्र के चतुर्थ श्रेणी से प्राइवेट में आरक्षण आरंभ करेगी। चटुए उसे भी मास्टरस्ट्रोक कहेंगे।
सारे RHA समर्थकों से अनुरोध है कि ऐसी किसी मूर्खता का हिस्सा न बनें। यह पूरा आंदोलन इसी बात पर टिका हुआ है कि आपको वहाँ गुंडा बनाया जा सके। सरकार को बस एक कारण चाहिए @RHAreforms को छिन्न-भिन्न करने के लिए।
मैंने चंद्रशेखर वाले प्रोटेस्ट के लिए भी मना किया था। आज भी कर रहा हूँ। देशभक्ति या हिन्दुत्व का चूरन न फाँकें। डंडे आपको पड़ेंगे। आपकी फोटो लोग लगा कर प्रश्न करेंगे, उससे न तो आपका घाव भरेगा, न आत्मसम्मान लौटेगा।
उचित दूरी बनाए रखें।
सुनो हिंदुओं सुनो,,📣📣📣
ये भाजपा का मुख्य मंत्री अहीर मोहन यादव क्या कह रहा है
“दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बौद्ध धर्म है” 😵
क्या आप लोगों ने इनको बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए दिया था?
मोदी भी बौद्ध बौद्ध का राग लगाए रखता है,,,
ये लोग क्या चाहते हैं? को हिंदू पहले बौद्ध धर्म में convert हों फिर ईसाई धर्म में?
ये वेटिकन का प्लान क्यों प्रमोट कर रहे हैं?
ये आंदोलनकारी हैं या गुंडे?
पुलिस के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की या अभद्रता करके अगर कोई यह समझता है कि वह खुद को शांतिप्रिय प्रदर्शनकारी कहलवा लेगा, तो यह उसकी गलतफहमी है।
ऐसे लोग आंदोलनकारी कम "गुंडे" जादा माने जाते हैं।
विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है,
लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करना किसी भी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हो सकता।
तथाकथित आजादी के नाम पर, फेमिनिज्म के नाम पर लिविंग वाली, टेस्ट ड्राइविंग वाली महिलाओं को किसी और से आजादी नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें खुद अपने कपड़ों से ही आजादी चाहिए। उन सबको खुरपी जावेद बनना है। खुरपी जावेद से कॉपिटिशन चल रहा इन कोठे वालियों का। जो समाज में गंध फैलाने के लिए ही होती हैं। और फिर महिला विक्टिम कार्ड भी उन्हीं वैश्याओं को खेलना होता है। उन जैसी घटिया वैश्याओं की वजह से सभ्य समाज की महिलाएं भी बदनाम होती हैं।
भारत की वामपंथनो यही नही पता कि बिकनी की शुरुवात यूरोप में दूसरे विश्वयुद्ध के समय शुरू की गई क्योंकि यूरोप में विश्वयुद्ध के समय कपड़े की कमी हो गई थी। तो यूरोप की सरकार और व्यापारियों ने कहा कि पुरुषों के पास तो बुद्धि होती है ये तो बिकनी पहनेंगे नही यूरोप की महिलाओं को बिकनी पहनाकर प्रचार करो क्योंकि महिलाओं में कम बुद्धि होती है।
ये फैसन और आजादी का नाम दे दो प्रचार करके और पहले यूरोप की महिलाएं भी पूरे कपड़े पहनती थी लेकिन जब कपड़ो की कमी हुई तो वहाँ की कुछ महिलाओं को पैसे देकर बिकनी पहनाकर घुमाया गया और आजादी और फैशन के रूप में प्रचारित किया तब सारी महिलाएं पहनने लगी वहीँ पुरुषो को भी बोला गया कि तुम भी बिकनी पहनो कपड़ो की कमी तो पुरुषों ने बिकनी पहनने से मना कर दिया।
वहीं भारत की के मूरख वामपंथने आज पहनकर टहल रही है।
इनको कुछ बोलो तो ये वही आजादी और और अपनी मर्जी बताएंगी जो आज से कई साल पहले यूरोप वालो में महिलाओं को बताया था।
संसाधनों पर पहला हक गरीबों दलितों पिछड़ों और आदिवासियों का? CJP के खिलाफ जंतर मंतर पर लड़ने कौन जाए हिंदू? कौन हिंदू? सामान्य वर्ग!!
अब इन्हे ग़रीब, दलित पिछड़े, आदिवासी नहीं मिल रहे हैं? जिनका संसाधनों पर पहला हक़ है उनसे क्यों नहीं कहते हो?
मैं एक सामान्य वर्ग का आदमी हूं और यह कभी नहीं भूलूंगा।
अलख पांडेय सर: आप मुझसे उम्र में बड़े है।
किसान: उम्र से कुछ नहीं होता, मैं जाट हूं और आप पंडित हो। आप हमारे लिए सम्मानित है
समाज में आज भी ऐसे लोग है जिनके मन में ब्राह्मणों के प्रति बहुत सम्मान है। किसान और अलख पांडेय सर के बीच हुई बातचीत का यह विडियो दिल छू लेने वाली है।
कौन सा राष्ट्र ? कैसा राष्ट्र ? किसका राष्ट्र ?
जिस राष्ट्र के लिए शहीद होने वाले लोगों में 70%
सवर्ण हों, इस राष्ट्र में उन्हें चतुर्थ दर्जे का नागरिक बना दिया गया।
जिस राष्ट्र के लिए सबसे ज्यादा लड़ाई सवर्णों ने लड़ी, उसी राष्ट्र में उसे विदेशी बताया जाता है।
उसी राष्ट्र में उसकी बेटी-बहनों को भोग और विलासिता की वस्तु के जैसे प्रस्तुत करने वालों को भाजपा और नरेंद्र मोदी का संरक्षण प्राप्त है।
जिस राष्ट्र की लड़ाई में सवर्ण समुदाय के लोगों ने अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया, उसी राष्ट्र में स्वर्ण समुदाय के दमन के लिए हर जिले में स्पेशल अदालत खोला जाता है। कोई अपने मन में सोच लिया और सवर्ण समुदाय का वक्त बताया परिवार उजड़ जाएगा।
नाम तो सुना ही होगा "मोदी एक्ट" का।
आतंकवादियों से भी ज्यादा सवर्णों को दंडित करने का प्रावधान तुम्हारे बाप नरेंद्र मोदी ने बनाया है। आतंकवादियों को रियायत मिल सकती है लेकिन सवर्ण समुदाय को नहीं।
सवर्ण के आने वाली नस्लों को बर्बाद करने का सपना देखने वाले नरेंद्र मोदी और उनके दलालों को समझना चाहिए कि सवर्ण समुदाय ना तो जाहिल गंवार है और ना ही नील का नशा किया है।
अंत में यही कहना चाहूंगा कि:-
जस करनी तस फल विधाता,
गान फटे तो क्यों चिल्लाता। 💙💙