सबसे पहले वही गया जिसने
सबसे आख़िर तक रुकने का आश्वासन दिया था
सबसे पहले सुबह होनी तय थी
लेकिन सबसे पहली रात सबसे आख़िरी रही
सबसे पहली रोटी सबसे आख़िर में खाई गई
सबसे पहला रंग सबसे आख़िर में सूखा
सबसे पहले जो जागता है
सबसे आख़िर में वही सोता है
सबसे पहला प्रेम सबसे आख़िरी रहा
यह इतना उपहास्य है कि
जो सबसे आख़िर में होना तय था
सबसे पहले ही हो गया
सबसे पहला और सबसे आख़िरी
एक मिथ्यारोप है
जो पहला है वह
किसी आख़िरी का एक दूसरा सिरा है
जो आख़िरी है वह किसी पहले का अन्त।
पंक्तियाँ : आदर्श भूषण
तुम्हारे न होने के सारे प्रतिमान भंग कर दिए हैं मैंने
तुम आओगे तो जान पाओगे
अनुपस्थितियाँ सबसे ज़्यादा चीखती हैं आस-पास
दूरियों के भूगोल में तुम तक पहुँचने का रास्ता
जीवन भर ढूंढना है मुझे।
~ आदर्श भूषण 🌼
@not_soadarsh
30 से 55 वर्ष की आयु के लगभग 71% भारतीयों की मांसपेशियों की स्थिति अच्छी नहीं है। यानी हर 10 में से लगभग 7 लोग पर्याप्त मांसपेशीय शक्ति और स्वास्थ्य से वंचित हैं।
इतना ही नहीं, 73% भारतीय पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले रहे हैं, और 90% से अधिक लोगों को यह भी नहीं पता कि उनके शरीर को प्रतिदिन कितने प्रोटीन की आवश्यकता होती है। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो धीरे-धीरे मांसपेशियाँ कम होने लगती हैं, ताकत घटती है और उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ती हैं।
भारत आज दोहरी समस्या का सामना कर रहा है। एक ओर मोटापा लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर लोगों की मांसपेशियाँ भी कम होती जा रही हैं। यानी हम वज़न भी बढ़ा रहे है और नहीं बढ़ा रहे और कमज़ोर भी होते जा रहे हैं। इसे आधुनिक विज्ञान में स्कीनी फैट बोला जाता है, जहाँ व्यक्ति बाहर से सामान्य या भारी दिख सकता है, लेकिन उसके शरीर में मांसपेशियाँ कम और अनावश्यक वसा अधिक होती है।
इस समस्या की एक बड़ी वजह हमारी खान-पान की आदतें हैं।
- कार्बोहाइड्रेट अधिक।
- प्रोटीन कम।
- भोजन में विविधता की कमी।
आज जब भी हम किसी बाज़ार या सड़क पर निकलते हैं, हर कुछ कदम पर मोमोज़, चाउमीन, बर्गर, फ्राइस, पिज़्ज़ा और अन्य Ultra-Processed Foods की दुकानों पर भीड़ ही भीड़ दिखाई देती हैं। इन खाद्य पदार्थों का बढ़ता चलन विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की खान-पान की आदतों को तेज़ी से बदल रहा है।
एक्सरसाइज करना शुरू करिए, वेट ट्रेनिंग करिए उससे आपका मसल मास बढ़ेगा, और अच्छा प्रोटीन हेल्दी डाइट के साथ कंज्यूम कीजिए, नहीं तो वक्त से पहले टकले, बूढ़े, चेहरे पर झुर्रिया और शारीरिक रूप से कमजोर दिखोगे। दिखोगे क्या दिख रहे हो। अपने आप को रोज न्यूड़ होके मिरर में देखा करिए कि आप कितने गंदे दिख रहे है, लोग अपने आप को कभी नंगा देखते ही नहीं है ऐसा क्यों है, जब आप अपने आप को रोज देखेंगे तभी इसका ख्याल रखेंगे।
नौतपा : वर्ष के नौ सर्वाधिक तप्त दिवस
जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब आरम्भ होता है नौतपा — वर्ष का वह काल, जब प्रकृति अग्नि की चरम परीक्षा से गुजरती है।
आसान नहीं होता छोड़ना,
जो पसंद हो..
बेहद मुश्किल है,
नई राह पर चलना..
लेकिन त्यागना पड़ता है
किसी ग्वाले को गोकुल..
होना पड़ता है वनवासी,
किसी राजकुमार को।
- संदीप द्विवेदी
जीवन क्या है?
- श्रीकृष्ण: जीवन एक कर्मभूमि है
- बुद्ध: दुख और उससे मुक्ति
- ओशो: यह एक उत्सव है
- सुकरात: यह एक परीक्षा है।
- अरस्तू: यह मन है।
- रूमी: प्रेम की एक यात्रा
- महात्मा गांधी: यह प्रेम है।
- पाब्लो पिकासो: यह कला है।
- सिगमंड फ़्रायड: यह मृत्यु की ओर यात्रा है।
- कार्ल मार्क्स: यह विचार है।
- फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की: यह नरक है।
- स्टीव जॉब्स: यह विश्वास है।
- फ़्रेडरिक नीत्शे: यह शक्ति है।
- अल्बर्ट आइंस्टीन: यह ज्ञान है।
- स्टीफन हॉकिंग: यह आशा है।
- आर्थर शोपेनहावर: यह पीड़ा है।
- फ्रांज काफ्का: यह बस शुरुआत है।
- बर्ट्रेंड रसेल: यह प्रतिस्पर्धा है।
- लाओ त्से: प्रकृति के साथ बहने का नाम
- मार्कस ऑरेलियस: मन को नियंत्रित करने की कला
किसी के लिए जीवन प्रेम है, किसी के लिए संघर्ष, किसी के लिए शांति। सच यह है कि जीवन कोई तय अर्थ नहीं देता आप जैसा अर्थ देते हैं, जीवन वैसा ही बन जाता है।
जीवन एक ही परिभाषा में नहीं समाता। हर व्यक्ति अपनी सोच, अनुभव और नजरिए के अनुसार इसे समझता है। असल में जीवन वही है, जैसा आप उसे देखते और जीते हैं।
मेरे लिए जीवन एक उत्सव है जिसमें खुश रहते हुए अपना कर्म करना और हर परीक्षा का डट के मुकाबला करना है।
आपके लिए जीवन क्या है?