BJP में बस BJP नही है
बाकी सब हैं
BJP≈CONG+AAP+SP+BSP+Trinmool+AMIM+DMK+NDA+UPA
BJP ने भारत को CONGRESS मुक्त करने में BJP को ही ख़त्म कर दिया
BJP ने CORRUPTION मुक्त भारत बनाने में BJP को ही Corrupt कर लिया
What a sacrifice!
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आसाम की आवाज़ इतनी ख़ामोश😢? ज़ुबीन भाई ये तो तय नहीं था।तय तो ये हुआ था दोस्त कि “मायाबिनी” का हिंदी अनुवाद मैं करूँगा और तुम गाओगे💔।दो दिन से सिर्फ़ तुम्हारे गाने सुन रहा हूँ।तुम्हारे और गरिमा भाभी के साथ मुंबई और गोहाटी के घर में जमी कविता व संगीत की महफ़िलें याद आ-आकर रुला रही हैं😢ऐसे नहीं जाना था भाई💔
जितना ध्यान पुलिस का #ssc_protest कर रहे छात्रों को हटाने पर था उससे ज्यादा अगर सरकार का ध्यान इस बात पर हो कि आखिर छात्रों को ये प्रदर्शन करना क्यों पड़ रहा है छात्रों को तो ज्यादा बेहतर होता..
गरीब..मिडिल क्लास फैमिली के छात्र पैसा खर्च करके टाइम पास करने के लिए नहीं बैठ रहे बार बार प्रदर्शन पर..
ये पहली बार आवाज नहीं उठाई गई है.. लेकिन सिस्टम में परमानेंट इलाज की बजाय छात्रों का ही इलाज कर दिया जा रहा है..
गजबे है बॉस..
रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे SSC अभ्यर्थियों और शिक्षकों पर बर्बर लाठीचार्ज - शर्मनाक ही नहीं, एक डरपोक सरकार की पहचान है।
युवाओं ने सिर्फ़ अपना हक़ मांगा था - रोज़गार और न्याय। मिली क्या? लाठियां।
साफ़ है - मोदी सरकार को न देश के युवाओं की चिंता है, न उनके भविष्य की। क्यों हो? ये सरकार जनता के वोटों से नहीं, वोट चुराकर सत्ता में आई है।
पहले वोट चुराएंगे
फिर परीक्षा चुराएंगे
फिर नौकरियां चुराएंगे
फिर आपका हक़ और आवाज़ - दोनों कुचल देंगे!
युवाओं, किसानों, गरीबों, बहुजनों और अल्पसंख्यकों - आपका वोट इन्हें चाहिए नहीं, इसलिए आपकी मांगे कभी इनकी प्राथमिकता नहीं होंगी।
अब वक्त है - डरने का नहीं, डटकर मुकाबला करने का।
#ssc_protest
#VoteChorGaddiChhod
SSC के प्रोटेस्ट को कवर करने गई दी लल्लनटॉप की टीम को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया. दिल्ली के रामलीला मैदान में जारी SSC के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज करने से पुलिस रोक रही थी. इसके बाद पुलिस ने रिपोर्टर रजत पांडे और कैमरापर्सन राशिद अली काजमी को हिरासत में ले लिया था. उस दौरान क्या-क्या हुआ? सब कैमरे में कैद.
पूरी रिपोर्ट - https://t.co/GdRaJ3NHOU
@RajatpandeyJF@justrashiddd
#SSCProtest #RamLeelaMaidan #Lathicharge
SSC परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और शिक्षकों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और हिरासत में लेने की खबरें हैं। पुलिस-प्रशासन का छात्रों के प्रति यह रवैया बेहद शर्मनाक है।
छात्रों को बार-बार इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है कि उन्हें सिर्फ सुचारू और पारदर्शी परीक्षा की मांग के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है। अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठाना उनका अधिकार है, लेकिन प्रशासन उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है।
एक अकेला राहुल गाँधी और सामने सैकड़ों की संख्या में पत्रकार, राहुल गाँधी के न कोई अगल बगल और न ही कोई आगे पीछे जो उन्हें कुछ बताए,
फुली डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ अपनी बात पूरे सबूतों के साथ रखी,
जिस भी पत्रकार ने जैसा भी सवाल किया उसका शानदार जवाब दिया, किसी ने इंग्लिश में सवाल किया तो उसका जवाब इंग्लिश में दिया और
जब किसी ने सवाल हिन्दी में किया तो उसका जवाब हिन्दी में दिया।
मात्र एक प्रेस कांफ्रेंस से पूरे देश के सामने सच रख दिया, चुनाव आयोग की पोल खोल दी।
इस ब्रिलियंट और टैलेंटेड नेता को इस देश की दो कौड़ी की मीडिया ने कभी पप्पू बना दिया था।
केंद्र सरकार ने जिस Company को SSC Exam की जिम्मेदारी दी है, वो व्यापम घोटाले में भी शामिल रही है। उस पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं।
उस कंपनी ने तबेले से लेकर घरों में Exam Centre बना दिए हैं तो कई जगह बच्चों के परीक्षा केंद्र 700-800Km दूर राज्यों में बनवाये हैं।
देश में इतनी सारी अच्छी कंपनियाँ हैं जो अच्छे से परीक्षा करवा सकती थीं लेकिन इस कंपनी को SSC परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी देकर देश के 70 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।
@msisodia
SSC फेज़ 13 की परीक्षा में सामने आ रही गड़बड़ियां सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मोदी सरकार के विफल और सड़े हुए सिस्टम का आईना हैं।
400–500 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंचे युवाओं को केंद्र पर जाकर पता चलता है कि उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है। सिस्टम की खामियों के कारण लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से लाखों युवाओं और उनके परिवारों की मेहनत, समय और उम्मीदें बर्बाद हो रही हैं।
पिछले 10 सालों में NEET, UGC-NET, UPPSC, BPSC और बोर्ड परीक्षाओं सहित 80 से ज्यादा पेपर्स में खुलेआम धांधली हुई है। सिर्फ इस साल की धांधली से 85 लाख बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इन्हें रोकने में सरकार नाकाम रही है और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार के उसके बड़े-बड़े वादे खोखले साबित हुए हैं।
यह सरकार के निकम्मेपन, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और परीक्षा माफियाओं के गठजोड़ का नतीजा है। युवाओं के सपनों के साथ यह विश्वासघात बंद होना चाहिए।