कल बाड़मेर स्थित विधायक कार्यालय पर जयपुर ग्रामीण सांसद आदरणीय श्री राव राजेन्द्र सिंह जी, इतिहासविद श्री राजवीर सिंह जी चलकोई सहित अन्य गणमान्यो के पधारने पर उनका स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
हद है यार...... एक व्यक्ति जैसाराम मेघवाल दलित की जान चली है और पत्रकार साब अब तक ठेकेदार की दलाली कर रहे हैं.
शर्म है तो चुलूभर पानी में डूब मरो..😏🙌
#barmer
राजस्थान सरकार के राज्य मंत्री श्री कृष्ण कुमार विश्नोई (K K VISHNOI) पर ऐसी टिप्पणी सभ्य समाज में बिल्कुल भी स्वीकर नहीं है
मेरा @PoliceRajasthan से निवेदन है कि इस व्यक्ति पर कारवाही करें.
@RajPoliceHelp@kkvishnoibjp@8PMnoCM
भाटी की Z+ सिक्योरिटी 🦅🔥
सरकार में बैठे लोग इस तरह की ओछी हरकत करके क्या उखाड़ लेंगे
जिनके साथ हर वक्त हजारों लोग रहते हैं उनका कोई क्या ही करेगा !!
@RavindraBhati__
सितम भी सहना दुआ भी करना, ओ बेकसी का गया जमाना।
अगर है जुर्रत गिराओ बिजली, बना रहे हैं हम आशियाना,
किसी भी हालत में बागवानों, तुम्हारा एहसान हम न लेंगे
जो अपनी गैरत पर आँच आयी, तो फूँक देंगे हम आशियाना॥
रविन्द्र केवल एक नाम नहीं एक विचारधारा बन चुके हैं।
विधायकों को जहां राजस्थान में कोई नही जानता वहां भाटी ने कम उम्र में नाम कमा लिया है।
झारखंड के डुमरी से विधायक "जयराम महतो" जी द्वारा हमारे शिव विधायक की प्रशंसा।
#मजदूर_अधिकार
राजस्थान की भाजपा सरकार ने सबसे पहले SI भर्ती वालों को छला…
फिर खेजड़ी बचाओ आंदोलन वालों को छला…
फिर ओरण बचाओ पद यात्रा वालों को छला…
और अब भैराणा धाम में साधु संतों को छला है…!!
@RajCMO@BhajanlalBjp
चीन के शांक्सी प्रांत स्थित एक कोयला खदान में हुए विस्फोट में लगभग 90 श्रमिकों के निधन का समाचार अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें।
यह हादसा दुनिया भर की खदानों में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हमारी गिरल ओपन लिग्नाइट माइंस के मजदूर भी पिछले 40 दिनों से अपनी सुरक्षा मानकों, श्रमिक अधिकारों एवं अन्य जायज़ मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन जिम्मेदार तंत्र अब भी मौन है।
हादसे होने के बाद जागने से बेहतर है कि समय रहते मजदूरों की सुरक्षा, सुविधाओं और जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
सरकार और संबंधित प्रबंधन को चेतना होगा, क्योंकि मजदूर केवल श्रमिक नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीद और राष्ट्र विकास का आधार हैं।
@PMOIndia@RajCMO
गिरल आंदोलन और रवींद्र सिंह भाटी का नेतृत्व
आज लगभग 40 से 42 दिन हो गए
ऐसी क्या मजबूरी हैं कि न कम्पनी मांगे मान रही न प्रशासन सुन रहा।
इसके पीछे तमाम पहलुओं पर गौर करने पर एक बात स्पष्ट हो रही हैं कि आंदोलन का नेतृत्व एक पढ़ा लिखा नौजवान कर रहा हैं यह विश्व की सबसे बड़ी पार्टी को अखर रहा हैं कारण साफ़ है पॉपुलेरिटी को गिरना क्यूंकि लोकसभा और विधानसभा में इस लड़ाके ने अंहकारी पार्टी को नाकों चने चबाए सनद रहे रवींद्र सिंह के जुड़ने से पहले 25 दिन तक मजदूरों का धरना चला 26वें दिन MLA साहब जुड़े।
एक थर्ड क्लास पार्टी (कंपनी) आगे आकर यह क्लेम करें कि धरने में बैठे और आंदोलन मै आए लोग फ़ालतू और निकम्मे है।
कम्पनी को इतनी हिम्मत कौन दे रहा हैं?
पीछे कौनसा दबाव समूह काम कर रहा हैं.?
यह सब सोचनीय विषय है।
जिनको लोगों ने चुनकर विधानसभा में भेजा उनसे समाधान की उम्मीद रहती हैं ज़ुल्म के खिलाफ़ खड़े होने की अपेक्षाएं रहती हैं हक और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने की उम्मीद रहती हैं वह नेता लोग एक लाइन में लिखी पर्ची के सिवाय कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
क्या ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ़ बोलना पार्टी लाइन के खिलाफ़ हो जाएगा.? क्या पार्टी नेताओं का ज़मीर मर चुका हैं.?
क्या आम ग़रीब पीड़ित शोषित की बात करना पाप और गुनाह है.? क्या लोकतांत्रिक देश में विपक्ष का होना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ़ है.?
हक और अधिकारों की बात करना गुनाह है.?
अगर ऐसा हैं तो यह गुंडा राज है यह अंहकार और तानाशाही है।
गिरल में रहने वालों की जिंदगी नरक बनी हुई यह प्रत्यक्ष हैं आंदोलन में आए लोगों ने देखा है।
यह निजी लड़ाई नहीं है यह 36 कॉम की लड़ाई है यह वहां के स्थानीय सभी परिवारों की लड़ाई है यह सोने के भाव बेशकीमती जमीन 600 रुपए में देने वालों की लड़ाई है यह उस जुल्म के खिलाफ़ हैं जो वहां के बाशिंदों के जीवन के एक भाग को खा रही हैं।।
#Giral
#गिरल_रोजगार_आंदोलन
#मजदूर_आंदोलन
@RavindraBhati__