इस व्यक्ति ने दिन रात एक करके IIT में एडमिशन लिया।
इस व्यक्ति ने कड़ी मेहनत से UPSC क्रैक किया।
इस व्यक्ति ने बड़े ही संघर्ष के साथ आंदोलन किए।
इस व्यक्ति ने पहली बार चुनाव लड़कर ही सरकार बनाई।
इस व्यक्ति ने BJP को एक बार नहीं बल्कि 3-3 बार बुरी तरह से हराया।
इस व्यक्ति ने बहुत ही कम समय में अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी बनाया।
इस व्यक्ति ने दिल्ली से निकलकर पंजाब जैसे राज्य में भी अपनी सरकार बनाई।
अब इसके पीछे ED CBI लगी है, परेशान किया जा रहा है, बीमारी होने के बाद भी नियमित रूप से उपचार नहीं मिल रहा है।
उन्हें नहीं पता है कि जो व्यक्ति संघर्षों की भट्टी से तपकर निकला है उसे न कोई झुका सकता है और न ही कोई दबा सकता है।
शेर वापसी करेगा और लौटेगा बस कुछ देर का इंतज़ार है 🔥
मेरी छोटी सी कहानी ....
आज मैं जो भी हूँ , वो सिर्फ़ आप दर्शकों की वजह से . आपके भरोसे की वजह से और यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ार्म की वजह से . वरना हम जैसों का मर्सिया तो लिख दिया गया था .
चैनलों की नौकरी के लायक़ हम रहे नहीं थे .चैनल की नौकरी में तमाम पाबंदियाँ और बंदिशें परेशान करने लगी थी. ये करो और ये न करो जैसे हालात ने आख़िर एक दिन बाग़ी बना दिया.
नौकरी छोड़कर घर बैठ गया था . ख़ुद को बनाए रखने का कोई रास्ता तलाश रहा था . महीनों की जद्दोजहद के बाद भी कोई रास्ता नहीं दिख रहा था . कुछ सेविंग थी और घर -परिवार का सपोर्ट था इसलिए उतनी चिंता तो नहीं थी लेकिन कुछ करना तो था . पूरी ज़िंदगी पड़ी थी . भविष्य की चिंता भी सता रही थी . चैनलों में काम नहीं करना है , ये तय कर चुका था लेकिन करें तो करें क्या वाला सवाल हर सुबह बाये खड़ा हो जाता था . एक बड़े चैनल की तरफ़ एप्रोच किया गया लेकिन मैंने कहा कि अब मुझे चैनल में नहीं जाना है . उस चैनल के लिए बात कर रहे शख़्स बहुत हैरान भी हुए कि आप ख़ाली हैं फिर भी इतनी बड़े ऑफ़र को ठुकरा क्यों रहे हैं ? मैंने कहा -अब ख़ाली रह लूँगा कि उस तरफ़ नहीं लौटूँगा . कुछ और विकल्प आए लेकिन उसे भी ठुकराया क्योंकि मन लायक़ काम कर पाने की गुंजाइश नहीं दिखी .
तभी लॉकडाउन का ऐलान हुआ
24 मार्च 2020 को लॉकडाउन की घोषणा के अगले दिन किसी ने बताया कि NH 24 से बहुत से मज़दूर अपने परिवारों के साथ पैदल यूपी -बिहार की तरफ़ जा रहे हैं . मैं सुबह- सुबह ट्रैक शूट में ही मोबाइल लेकर हाईवे तक पहुँचा . दिल्ली -यूपी बॉर्डर से गुजरते मज़दूर परिवारों का वीडियो बनाने लगा . मेरे पास और कोई माध्यम नहीं था , तो ट्विटर पर छोटे -छोटे वीडियो डालने लगा . कुछ ही देर में बहुत से लोग फ़ोन करके पलायन कर रहे मज़दूरों के बारे में पूछने लगे . कुछ लोग मदद करने के लिए आगे आने लगे .
मुझे आज भी याद है कि अखिलेश यादव के साथ रहने वाले आशीष यादव ने मेरा वीडियो देखकर यूपी की तरफ़ पैदल जा रहे मज़दूरों के बारे में जानकारी ली और कहा कि हम लोग उनकी कुछ मदद करना चाहते हैं . फिर मैंने कुछ मज़दूरों का नंबर लेना शुरु किया . कुछ के नंबर अखिलेश यादव के यहाँ पहुँचे और ग़ाज़ियाबाद और आगे के रास्तों पर उनके कार्यकर्ताओं ने खाने -पीने का इंतज़ाम किया .
फिर मैं भी अपनी सोसाइटी के एक दोस्त के साथ कुछ खाने का सामान लेकर मज़दूरों में बाँटने लगा . उनकी चिंता और मुश्किलों की कहानियाँ वीडियो की शक्ल में ट्विटर पर पोस्ट करने लगा . तब ट्विटर पर सिर्फ़ 2.20 मिनट का ही वीडियो पोस्ट हो सकता था . मैं शूट बहुत ज़्यादा कर रहा था लेकिन मेरे पास माध्यम नहीं थे . मुझे आज भी याद है कि 26-27-28 मार्च 2020 की पूरी रात मैं NH 24 पर मज़दूरों के बीच भटकता रहा . उनके वीडियो बनाता रहा . मेरे घर में लोग सोते रहते थे और मैं चुपके से आधी रात को ये देखने के लिए निकल जाता था कि अभी भी मज़दूर वैसे ही जा रहे हैं क्या ?
सब कुछ अपने मोबाइल में क़ैद करता रहा . मेरे घर वाले एतराज़ भी करने लगे कि तुम्हें कोरोना हो जाएगा . बंद करो ऐसे निकलना . मैंने किसी की नहीं सुनी क्योंकि हज़ारों मज़दूरों को यूँ पैदल जाते देखकर मैं घर में बंद नहीं रह सकता था .
बच्चे , बुजुर्ग , महिलाएँ सब सैकड़ों किमी की यात्रा पर निकल पड़े थे . मैं उनकी तकलीफ़ों की कहानियाँ अपने मोबाइल में दर्ज कर रहा था लेकिन मेरी सीमाएँ थी . मेरी बेचैनी मुझे सड़क पर उनके बीच रहने -चलने को मजबूर कर रही थी .
तीन -चार दिन बाद चैनलों ने इस ख़बर की ओर रुख़ किया ( एनडीटीवी को छोड़कर )
कुछ मित्र पहले से कह रहे थे कि आप यूट्यूब शुरु कीजिए लेकिन मैं टाल रहा था . मज़दूरों की कथा कहने की बेचैनी में मैंने 29 मार्च 2020 को तय किया कि अब सही वक़्त आ गया है . वहीं से मेरे यूट्यूब चैनल की शुरुआत हुई . लॉक़डाउन लग चुका था . मेरे पास कोई टीम तो छोड़िए . एक सहयोगी तक नहीं था . मोबाइल से शूट करता था . ख़ुद ही मोबाइल पर एडिट करता था ( एक मित्र ने एडिट सिखाया ) . अपलोड करने और थंबनेल बनाने नहीं आता था , तो एक मित्र ने मदद की . वो अपने घर से ये दोनों काम कर देते थे . कुछ महीने बाद जब लॉकडाउन हटा तो एक सहयोगी को रखा , जिसने कैमरा और एडिट पर मदद करना शुरु दिया .
फिर किसान आंदोलन का दौर आया . मैंने एक साल तक लगातार किसान आंदोलन के हर पहलू को कवर किया . जहां जहां आंदोलन हो रहे थे , वहाँ गया . पंचायतों में गया . हरियाणा ,यूपी और राजस्थान के अलग अलग हिस्सों में गया . सड़क पर बैठे जिन किसानों को गालियाँ दी जा रही थी , गुंडे -मवाली और देशद्रोही के तमग़ों से नवाज़ा जा रहा था , उन किसानों की आवाज़ देश -दुनिया तक पहुँचाने के लिए मैंने ख़ुद को झोंक दिया .
किसानों ने मुझे इतना प्यार दिया कि मैं ताउम्र नहीं भूल सकता . उनके प्यार और स्नेह का क़र्ज़ मैं जीवन भर नहीं उतार पाऊँगा . उस एक साल में मैंने किसान आंदोलन पर न जाने कितने वीडियो बनाए .
हर रोज़ यही लगता था कि ये किसान कब तक यूँ बैठे रहेंगे . जाड़ा , गर्मी , बरसात ..हर मौसम की मार खाकर भी किसान डटे रहे . मैं उन्हें अपने कैमरे में क़ैद करता रहा ...
इसके बाद की लंबी कहानी है ...लिखूँगा जल्दी ही . फ़िलहाल तो उन तमाम दर्शकों और साथियों की शुक्रिया , जिनकी वजह से ये नाचीज़ आज यहाँ तक पहुँचा है .
@JaikyYadav16 वाराणसी जोन के ADG कार्यालय में मंगलवार को कैंसर से पीड़ित एक बच्चे ने सशस्त्र ADG का चार्ज संभाला
बच्चा कैंसर से पीड़ित है और उसकी अंतिम इच्छा IPS अफसर बनने की थी ।
यही वह वर्ग है जो दलितों, मुसलमानों और ग़रीबों के उत्पीड़न पर तालियाँ बजाता रहा है, WhatsApp पर ‘70 साल में कुछ नहीं हुआ’ फैलाता रहा है। अब अपनी पर आई तो …
मोदी के तीसरे बाद प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद हुआ हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा पेपर लीक स्कैम: NEET 2024 | India’s Biggest Exam Fraud? | Dhruv Rathee https://t.co/JMCDoj8Iyo via @YouTube
इस बार पार्लियामेंट में मज़ा आने वाला है। इस बार ऐसे ऐसे लोग पार्लियामेंट में पहुंच रहे हैं जो कि अपने फील्ड के धुरंधर हैं।
राहुल गांधी
अखिलेश यादव
दीपेंद्र हुड्डा
महुआ मोइत्रा
शशि थरूर
पप्पू यादव
चंद्रशेखर आज़ाद
धर्मेंद्र यादव
हनुमान बेनीवाल
बस कन्हैया कुमार की कमी खलेगी और तो सब लोकसभा में जमकर सत्ता पक्ष की खबर लेंगे। इस बार लोकसभा में आपको एहसास होगा कि
आखिर क्या होता है एक मजबूत विपक्ष।
आप लोगों ने अयोध्या को बसाया नहीं है भाई!
किस बात का घमंड है आप लोगों को?
श्रीराम का जो मंदिर बना है उसका आदेश न्यायालय ने दिया था और पैसा आम जनता ने.
अयोध्यावासियों को अपमानित करना बंद कर दीजिए आप लोग.
आप लोग अयोध्या को अपनी जागीर समझना बंद कर दीजिए.
आप लोग अयोध्या के भाग्य-विधाता नहीं हैं भाई!
सुधार जाइए वरना जल्दी ही वाराणसी और मथुरा वालों को भी गालियाँ देते घूमेंगे आप लोग!
ध्रुव राठी और रवीश कुमार ने राइट विंग के पूरे इको सिस्टम को हिलाकर रख दिया है . इसी का नतीजा है कि ANI की मालकिन अपने कट्टर गैंग के साथ बैठकर स्यापा कर रही हैं ...
इसी पर मेरा वीडियो
@dhruv_rathee@ravishndtv
ध्रुव राठी ने आपके लिए अपना पूरा करियर दांव पर लगा दिया है और आज आपके भाई ध्रुव राठी को एक अनपढ़ ट्रॉल कर रहा है तो क्या आपका हक नहीं बनता है कि आप अपने ध्रुव राठी भाई के लिए पोस्ट करें।
#अनपढ़_एल्विश
यह हैशटैग है, उस अनपढ़ को उसकी औकात दिखा दो। यह हैशटैग 1 नंबर पर आना चाहिए जिससे कि इन अनपढ़ों को समझ आए कि ध्रुव राठी से आगे से उलझने से पहले 100 बार सोचें।
एक जरूरी सवाल, खासकर मुसलटे हज़रात से: जो किताब हम काफिरों को आग में जलाने की बात करती है, हम उसे क्यूं नही जला सकते? अगर अल्लाह को 'फ्री फायर' खेलने का इतना ही शौक है तो मुसलमानों के साथ खेले, उन्हें चाहे जन्नत दे या जहन्नुम। हम क्यूं ये बदमाशी सहें? हम विरोध क्यूं न करें?
BREAKING ⚡
ध्रुव राठी ने एक नया वीडियो जारी कर खुलासा किया है कि कैसे सत्ता में आने के बाद मोदी ने रणनीति के जरिए अपने लोगों को किनारे कर दिया।
सवाल है- अगला कौन होगा? जरूर देखें और शेयर करें। #Dhruvrathee