बिहार पुलिस और एक लड़के के बीच जमकर हाथापाई हो गई देखिए। आरोप है पहले पुलिस वाले ने लड़के को मारा था। इसी पर लड़के ने 2 थप्पड़ मार दिया।उसके बाद पुलिस वाले उसको घसीट कर ले जाने लगे।
मामला मोटरसाइकल के चालान का था लेकिन लफड़ा बहुत बढ़ गया।
उसके बाद पब्लिक की भीड़ बढ़ने लगी देखिए।
One DANGEROUS thing about CAS that has not been said.
A derivatives trader can opt out. Sit out the last 25 minutes, skip expiry, trade something else.
The damage needs his/her participation.
BUT.
A long-term Investor cannot opt out. He is not in the auction, most do not know it runs, and he still gets its price.
His portfolio value, his fund’s NAV. All marked to a number set in a window he was never in.
That is already true for the 213 stocks CAS covers today.
Phase 2 extends it to the rest of the market. Thinner stocks, same 20 minutes, and a much larger group of people who will not know why their holding closed 3% away from where it traded all day.
The derivatives trader at least got to walk away.
How CAS will prove to be the biggest failure soon?
CAS is one of many steps to push derivatives turnover into cash.
That is the objective. At least, the assumption behind it.
It also lets the regulator tell FPIs that we meet global standards now. Invest in us. PLEASE.
So this was never about protecting retail.
It is about protecting the retail investors THEY WANT, the one in cash, and not derivatives.
That is the problem with the objective itself.
And look at how it has landed. Auction turnover down 40%. Index option volumes down 27% on settlement days. A Sensex that moved 2,200 points in five minutes on the first monthly expiry.
Nobody invests in a market where the closing price is the least reliable number of the day.
And ofcourse, the turnover transfer is not happening completely in cash either.
CAS is just making FOREX and CRYPTO exchanges richer.
They dont even need to create product demand. Guess who is doing it for them?
विपक्ष के नेता @RahulGandhi को मेरा सुझाव -
RSS-BJP द्वारा हल्द्वानी में किया गया "शुद्धिकरण" कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ जातिवाद और छुआछूत का एक घिनौना और निंदनीय कृत्य था, और इसने BJP-RSS की मनुवादी सोच को एक बार फिर बेनकाब किया।
इससे भी बुरी बात यह है कि खड़गे-जी को अपनी ही कांग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा इस जातिवादी कृत्य की स्पष्ट रूप से निंदा न किए जाने पर अपना दुख जताना पड़ा।
कल आपने 15 दिन बाद इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक प्रेज़ेंटेशन दी, जिसमें आपने शुद्धिकरण करने वालों को एक्सपोज़ किया।
आप विपक्ष के नेता हैं, आपके कार्यकर्ता आपको अगला प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं। बहुत अच्छी बात है पर जो पार्टी के बड़े लोग अपने ही पार्टी अध्यक्ष पर हुए जातिवाद पर छुपी साधे रहते हैं वो BJP मनुवादियों से कैसे बेहतर हैं?
ये प्रेज़ेंटेशन में तस्वीर दिखाने से कुछ नहीं होगा। सबको पता है खड़गे जी खिलाफ ये जातिवाद BJP-RSS ने किया है; इसमें कोई दो राय नहीं हैं।
आप बोल रहे हैं कि खड़गे जी को न्याय मिलेगा? पर कैसे? आप क्या कर रहे हैं? आप विपक्ष के नेता हैं , आपने FIR करवाई क्या?
जब आप अपने पार्टी अध्यक्ष के लिए नहीं लड़ेंगे तो गरीब दलित, शोषित समाज क्या समझेगा?
अंग्रेजी में एक कहवात है - walk the talk"। मतलब यह कि आप जो कहते हैं उसे करें और ऐक्शन के साथ अपने शब्दों का समर्थन करें!
लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi और मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है।
Open-ended सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान OBC, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।
हमारी मांग स्पष्ट है - मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।
तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की तरह, पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना इसका व्यावहारिक समाधान है।
जाति जनगणना सिर्फ होनी नहीं चाहिए,
सही भी होनी चाहिए।
चोर दरवाज़े से मोदी सरकार ने आरक्षण ख़त्म करने की योजना रची !!
2015 में केंद्र सरकार में 4.21 लाख पद खाली थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.24 लाख हो गई।
रेलवे में 2.40 लाख पद खाली हैं। डिफेंस में 2.41 लाख। गृह मंत्रालय में 1.10 लाख।
PSU में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म हो गईं। ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 49% हो गई।
सवाल सिर्फ रोजगार का नहीं, सामाजिक न्याय का है।
सरकारी पद खाली रखो तो आरक्षण का अवसर खत्म।
PSU बेचो तो आरक्षित नौकरियां खत्म।
स्थायी नौकरी को ठेके में बदलो तो आरक्षण खत्म।
आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान बदलना जरूरी नहीं, आरक्षण वाली नौकरियां खत्म कर देना ही काफ़ी है।
सामाजिक न्याय विरोधी भाजपा का यही एजेंडा है।
पद खाली रखो। PSU बेचो। ठेकेदारी बढ़ाओ।
और SC, ST, OBC, EWS से उनका संवैधानिक हक छीन लो।
बाबासाहेब के संविधान से मिले अधिकारों को षड्यंत्र के तहत खत्म करने की भाजपाई नीति का अब पर्दाफ़ाश हो चुका है।
UPSC मे EWS Certificate का कैसे गलत इस्तेमाल होता है इस बात से समझिये 👇
शामली की रहने वाली आस्था जैन की UPSC 2025 मे 9th रैंक आयी थी
इससे पिछले साल 2024 मे आस्था की UPSC मे 186 रैंक आयी थी, और हैदराबाद मे IPS की ट्रेनिंग चल रही थी
ट्रेनिंग के दौरान ही UPSC का रिजल्ट आता है और आस्था जैन 9th रैंक लाकर टॉपर बनती है
ध्यान देने वाली बात ये है की साल 2024 मे आस्था का ज़ब सेलेक्शन हुआ था तब वो जनरल केटेगरी मे आती थी
लेकिन उसके अगले साल ज़ब 9th रैंक आयी तो EWS केटेगरी मे शामिल हो गयी
मतलब IPS बनने के बाद गरीब हो गयी?
इतना ही नहीं आस्था की पढ़ाई लिखाई दिल्ली के Scottish International School से हुई है जिसकी फीस बाकी स्कूलों से महंगी है
EWS उन लोगो के लिए है जो आर्थिक रूप से कमजोर है लेकिन UPSC मे लोग इसका खूब गलत इस्तेमाल करते है
लूपहोल का फायदा उठा कर आर्थिक रूप से संपन्न लोग EWS केटेगरी मे अप्लाई करते है क्योंकि इसकी CUT OFF बाकियो से कम जाती है
ऐसा नहीं है कि UPSC और सरकार को इसके बारे मे पता नहीं है, लेकिन क़ोई कुछ करना नहीं चाहता
इस वजह से गरीब और मेहनती लोगो का हक दूसरे संपन्न लोग मार लेते है
भाजपा सरकार UPSC का नाम OPSC क्यों नहीं कर देती? ऐसा लगता है कि लेटरल एंटी के नाम पर पिछले दरवाज़े से भाजपा और उसके संगी-साथी अपनी विचारधारा के लोगों की सेंटिग करने में लगे हैं। ये भी एक तरह से आउटसोर्सिंग का ही एक और छद्म रूप है।
#OPSC_Outsource_Public_Service_Commission
विकास के दावों के बीच 'ग्राउंड जीरो' का सच!
ललितपुर के ग्राम नकवाना में स्कूल जाने वाला मार्ग कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका है। नन्हे बच्चे पढ़ाई करने जाएँ या जान जोखिम में डालें?
ललितपुर में AAP कार्यकर्ताओं ने बीजेपी सरकार को किया Expose
भाजपा सरकार की 'स्मार्ट सड़कें' क्या सिर्फ कागजों पर ही बनी हैं? जनता की इस दुर्दशा का जवाब कौन देगा?
@myogiadityanath, @CMOfficeUP, @dm_lalitpur
#SchoolThikKaro
लंबे समय से संविधान प्रदत्त हिस्सेदारी की व्यवस्था यानी आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
कान खोलकर सुन लो—आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह सदियों से सामाजिक भेदभाव और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
भारत सरकार व लखनऊ दरबार में बैठे सत्ताधीशों, कान खोलकर सुन लो—आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरक्षण पर हमला यानी सामाजिक न्याय पर हमला है और सामाजिक न्याय से समझौता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) किसी भी कीमत पर नहीं करेगी।
हम यह भी देख रहे हैं कि इस पूरे माहौल को बनाने में मीडिया की बड़ी भूमिका है। हमारे हितों के विपरीत विचार रखने वाले लोगों को बार-बार बुलाकर एकतरफा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन याद रखिए—हमारे सब्र का इतना इम्तिहान मत लीजिए। अगर हमारी आवाज को लगातार दबाने और नजरअंदाज करने की कोशिश की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
हम जानते हैं कि मेनस्ट्रीम मीडिया में हमारा पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी।
और आरक्षण का विरोध करने वालों को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) खुली बहस के लिए आमंत्रित करती है।
अगर आपके पास आरक्षण के खिलाफ तर्क और तथ्य हैं, तो सामने आइए। बहस हो—तर्क से, तथ्यों से और संविधान के दायरे में।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!
मैं Ludhiana Jn से Varanasi Jn तक यात्रा कर रहा हूँ। मेरा टिकट RAC/S7/31 है
कोच में 3 बर्थ खाली थीं। मैंने ड्यूटी पर मौजूद TTE से अपनी RAC सीट confirm करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने “देखते हैं” कहकर टाल दिया। इसके बाद Waiting List यात्रियों से फाइन/किराया लेकर खाली बर्थ allot किए जाने की जानकारी मिली।
जब RAC यात्री मौजूद है और बर्थ उपलब्ध हैं, तो उसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? कृपया TTE की berth allotment एवं संबंधित records/receipts की जांच कर उचित कार्रवाई करें।
Train: 14624 S G VARANASI EXP
PNR: 2361133085
Coach/Seat: S7/31 (RAC)
Route: Ludhiana Jn → Varanasi Jn
@RailwaySeva@IRCTCofficial@RailMinIndia@RailwayNorthern@jagograhakjago
क्या गरीब की बेटी IAS IPS नहीं बन सकती ?
शिक्षा हमारा अधिकार सर है वो हमसे ना छीने।
सर आपने गरीबों के घर तोड़े जनता ने उफ्फ तक नहीं की
लेकिन अब लड़कियों की शिक्षा पर बात आई है तो बोलेंगे।
अब इनमें क्या कमी ढूंढोगे ? क्या प्रोपोगेंडा बनाओगे ? चलो इनपर भी फंडिंग के आरोप लगा दो घटिया मीडिया वालों।
“अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते?”
- ये सवाल उस बच्ची का है, जो स्कूल में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और सुविधाओं की किल्लत पर आवाज उठा रही है
मामला राजस्थान के अलवर का है, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं धरने पर बैठी हैं। देश में GEN Z के बाद अब GEN Alpha अपना हक मांग रहे हैं।
अच्छी शिक्षा और स्कूल में सुविधाएं बच्चों का हक हैं, BJP सरकार में जिनके लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।
ऐसी सरकार को शर्म आनी चाहिए!!
#Ghaziabad चेकिंग ठीक है लेकिन ड्राइवर के साथ मारपीट उचित नहीं है।।आरोप गम्भीर है। जब गाजियाबाद सीपी ने चीज लिया था तभी पुलिसवालों को शालीनता बरतने की सीख दी थी, लगता है फोर्स के लोग भूल गए है। वीडियो वायरल है।