कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, चितलवाना पंचायत समिति के पूर्व प्रधान प्रतिनिधि पूर्व मंत्रीजी @MlaSanchore के सबसे भरोसेमंद साथी श्रीमान हिंदू सिंह जी दूठवा को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ हुक्म
न कोई काफिला, न कोई दिखावा... खुद गाड़ी चलाते रविंद्र सिंह भाटी। ट्रैफिक के बीच एक शख्स की आवाज़ गूंजी— "अबकी बार आप एमपी फिक्स हो।" यह एक वाक्य उनके प्रति लोगों के भरोसे और समर्थन को बयां करता नजर आया...
वो लड़ रहा है अपनो के हक और अधिकारों को....
उसकी इस लड़ाई में हम सब उसके साथी।
क्योंकि वो लड़ रहा स्थानीय ग्रामीणों के हक और अधिकारों को...!
#गिरल_रोजगार_आंदोलन
बंगाल जीत के बाद राजेंद्र राठौड़ का बढ़ा कद !
भवानीपुर सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी की जबरदस्त जीत, शुभेंदु अधिकारी की जीत में अहम हीरो रहे राजेंद्र राठौड़....
#RajasthanWithFirstIndia@Rajendra4BJP@BJP4Rajasthan
जब कोई योद्धा अपनी प्रकृति के लिए संघर्ष करता है और उस संघर्ष के परिणाम सामने आते हैं, तो वह दृश्य सचमुच सुकून देने वाला होता है।
यह खड़ी खेजड़ी उसी संघर्ष की जीत का जीवंत प्रतीक है, जिसके लिए रवींद्र सिंह भाटी ने बरियाड़ा में इन्हें बचाने की लड़ाई लड़ी थी। आज सोलर प्लेट्स के बीच खड़ी यह खेजड़ी मानो स्वयं कह रही हो—यही होती है संघर्ष की असली जीत।
सभी लोग रविन्द्र भाटी द्वारा कॉल करके छोटूसिंह रावणा को धमकाने की बात कर रहे हैं! लेकिन कोई इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहा कि जब छोटूसिंह को यह अच्छी तरह से पता हैं कि उसके व रविन्द्र भाटी जी के बीच पूर्व में अनबन रही हैं और मेरे किसी भी तरह के कमेंट से सीधा पर्सनल अटैक माना जायेगा, फिर भी जानबुझकर विवादित एवं उकसाने वाला कमेंट करने की जरूरत कहाँ पड़ी!इसका मतलब छोटूसिंह द्वारा उक्त कृत्य जानबूझकर एवं भड़काऊ कमेंट किया और अब विक्टिम बनकर अनावश्यक समाज में दरार एवं विवाद उत्पन्न किया किया है।
"ओरण हमारी संस्कृति की जड़ें और गौमाता का असली घर है। इसे खोने का मतलब है-प्रकृति और अपनी पहचान, दोनों को खो देना। आइए, अपनी विरासत और बेज़ुबान पशुओं के इस आसरे को बचाने का संकल्प लें।"
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
"ओरण हमारी संस्कृति की जड़ें और गौमाता का असली घर है। इसे खोने का मतलब है-प्रकृति और अपनी पहचान, दोनों को खो देना। आइए, अपनी विरासत और बेज़ुबान पशुओं के इस आसरे को बचाने का संकल्प लें।"
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
ओरण केवल भूमि नहीं, यह हमारी आस्था, परंपरा और प्रकृति का जीवंत स्वरूप है।
इन पावन धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन हमारा कर्तव्य है, ताकि वन्यजीवों और गोवंश को सुरक्षित, स्वाभाविक चरागाह मिल सके।
ओरण सुरक्षित रहेंगे, तो संस्कृति संरक्षित रहेगी…
और जब संस्कृति जीवित रहेगी, तभी हमारी पहचान भी अमर रहेगी।
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
ओरण केवल जमीन का टुकड़ा नहीं,
यह हमारी सांझी आस्था, परंपरा और प्रकृति का जीवंत रूप है।
हमारा संकल्प है, इस धरोहर का संरक्षण, संवर्धन और सम्मान ताकि वन्य-जीवों सहित गोवंश को मिले खुला, सुरक्षित और प्राकृतिक चरागाह।
ओरण बचेंगे, तो संस्कृति बचेगी…
संस्कृति बचेगी, तो हमारी पहचान सदा जीवित रहेगी।
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
जैसलमेर क्षेत्र में ओरणों के संरक्षण एवं उन्हें राजस्व अभिलेखों में विधिवत दर्ज कराने की माँग को कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी द्वारा प्रमुखता से उठाया गया।
शिक्षाविद् कमल सिंह जी ने बाड़मेर–जैसलमेर की राजनीति को लंबे समय तक निकट से देखा है। पूर्व सांसद तन सिंह जी की राजनीति पर चर्चा करते हुए वे उनकी छवि की झलक आज रवींद्र सिंह भाटी में देखते हैं।
उन दिनों को स्मरण करते हुए वे कहते हैं–
“तन सिंह जी के जीवन में ‘मैं’ की भावना नहीं थी। वे जब किसी सभा या बैठक में जाते थे, तो लोग उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ते थे। इतना विशाल संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद वे जीप से पूरे क्षेत्र के गांवों और ढाणियों का दौरा करते थे। लोगों की कठिनाइयों के समय स्वयं वहां पहुंचकर समाधान का प्रयास करते थे।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कमल सिंह जी कहते हैं कि “आज की परिस्थिति में रवींद्र सिंह भाटी भी कुछ ऐसा ही करते दिखाई देते हैं। जहां कहीं समस्या या विवाद होता है, वहां वे पहुंच जाते हैं। इससे लोगों से सीधा संपर्क बनता है और आमजन कहते हैं कि इस व्यक्ति ने आकर हमारी बात सुनी, हमारे लिए कुछ किया।”