कोई यकीन करे या ना करे लेकिन धरातल पर योगी से अगर फिलहाल उनके कम से कम 10% वोटर नाराज हैं तो अखिलेश यादव से उनको 2024 में मिले वोटो का लगभग 50% मुसलमान वोटर और 80-85% दलित वोटर नाराज है। इस हिसाब से यूपी विधानसभा चुनावों मे भाजपा 32-33% का आकड़ा छू जाये तो बहुत बड़ी बात है और सपा 22 -23% वोट तक पहुंच जाए तो हैरानी होगी।
हर चुनाव अलग होता है, 2027 का भी अलग है। बसपा और बहनजी के प्रति जो सकारात्मक माहौल दिख रहा हैं, उतना 2007 मे भी नही नजर आ रहा था। यकीन न हो तो यूपी में जगह जगह होती बसपा पदाधिकारियों खासतौर पर विश्वनाथ पाल, डॉ इन्दू चौधरी, मुनकाद अभी आदि की जनसभाएं देख लो।
बहनजी के प्रति 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों के समय में सबसे ज्यादा नैगेटिविटी थी, बहनजी का हर दाँव, हर कोशिश मीडिया और सोशल मीडिया द्वारा फैलाए नरैटिव के सामने फेल साबित हो रही थी । 2024 लोकसभा के चुनावों में वो नैगेटिविटी कम जरूर हुई थी लेकिन बहनजी का इंडिया गठबंधन से अलग चुनाव लड़ना उनके कोर वोटरो के विश्वास को डगमगा रहा था और उनको लग रहा था कि बहनजी अकेली लड़ेंगी तो भाजपा जीत जाएंगी। खासतौर पर दलित समाज ने संविधान बचाओं वाले प्रौपगैंडे में फंसकर लाल किताब उठाए राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर दाँव खेला और अपना आधा किला गिर लिया।
लेकिन जब चुनाव के बाद बसपा के कमजोर होने से देश भर मे दलित आदिवासी समाज पट उत्पीड़न बढ़ा और इस पर सपा कांग्रेस आदि दलो की नीरसता देखी तो वो समझ चुके थे कि उनका भी सपा कांग्रेस आदि ने ठीक वैसे ही उल्लू बनाया है जैसा कि मुसलमान समाज का बनाते आए है यानि हमको चुपचाप वोट दो वरना भाजपा आ जायेंगी।
पिछले एक दशक मे सोशल मीडिया के जरिये मै पहली बार मुसलमान समाज की तरफ से भी मैं उनके मुद्दों पर प्रमुखता से बात करते हुए उनके समुदाय के लोगो को देख पा रहा हूँ । अब वो खुलकर बोलने लगे है कि मुसलमान सिर्फ दरी बिछाने और झंडा उठाने के लिए नही हैं, वो भी सपा भाजपा की अंदरूनी गठबंधन पर बेबाक राय दे रहा है। भाजपा को रोकने का ठेका अकेला मुसलमान क्यों उठाएं और वो बेवजह अपने हिन्दु भाईयों को अपना दुश्मन बनाएं।
औवेशी की पार्टी का प्रभाव यूपी मे भी देखने को शर्तिया मिलेंगा, उनकी मुसलमानों मे स्वीकार्यता बढ़ रही है। मुसलमान समाज मे एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो बहनजी और औवेसी की पार्टी मे गठबंधन देखना चाहते हैं और वो एक बार फिर बहनजी का वही पहले वाला शासन देखना चाहते है जिसमे कानून व्यवस्था का सही में ही राज था। वैसे तो बहनजी ने मुसलमान समाज की हिस्सेदारी कभी नही मारी, भले ही उनके बसपा को 1% वोट आए हो या 4% तक वोट आए हो। लेकिन ये भी सच है कि खासतौर पर पश्चिम यूपी से बसपा को मुसलमानों का काफी सहयोग मिलता आया है, पश्चिम यूपी मे दलित मुस्लिम मिल जाने पर ही 100 से 120 सीटों पर तो सीधे सीधे कब्जा किया जा सकता है लेकिन मुसलमान समाज अपनी संख्या की ताकत को जानना ही नहीं चाहता और हर बार उन्ही दलो को ज्यादातर वोट करता आया जिसके पास पश्चिम यूपी मे कोर वोट 1% भी नही हैं। पश्चिम यूपी मे यादव लगभग न के बराबर है और दलित 26 -27% के आसपास हैं, मुसलमान 30% के आसपास है।
आकाश आनन्द मामले में भी यकीन है कि बहनजी 6 तारीख के बाद अच्छा फैसला लेगी । अब आप सोचोगे कि 6 तारीख का जिक्र क्यों किया, ये तो मुझे भी नही पता लेकिन मेरा यकीन है कि बहनजी 6 से 9 अक्टूबर के बीच ही आकाश आनन्द के पक्ष मे फैसला लेकर खासकर बहुजन समाज के युवाओं का हौंसला अफजाई जरूर करेंगी।
भाजपा से सवर्णों और अति पिछड़ों के वोट अखिलेश यादव तोड़ने मे सक्षम नही है क्योंकि इनके राज मे हुई गुण्डागर्दी के डर से वो अखिलेश से बेहतर योगी को मुख्यमंत्री के रूप मे मानते है लेकिन कानून व्यवस्था के मामले मे बहनजी को आज भी नम्बर वन मुख्यमंत्री के रूप मे मानते है। बसपा ने अपना पतझड़ झेल लिया हैं लेकिन वो अपनी विचारधारा और अनुशासन से कभी पीछे नही हटी और यही बात बहनजी को विशिष्ट बनाती है।
जंग अभी बाकी हैं, अब की बार मीडिया के प्रौपगैंडे, चुनाव आयोग की हरकते आदि भी चुनावों मे अपना पुरा रंग नही दिखा पायेंगी क्योंकि चुनाव आयोग की गिरती साख के चलते सत्ताधारी दल चुनावों से पहले हर कदम फुंक फुंककर रखेंगे जिसका फायदा अन्य विपक्षी दलो के अलावा बसपा को भी मिलेंगा। #highlights #everyone #followers #दिलबाग_सिंह
अखिलेश यादव जी कह रहे हैं कि लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए एकजुट होना होगा।
लेकिन इससे पहले इनसे इन सब सवालों के जवाब जरुर होने चाहिए—
1. जब टिकट और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात आती है, तो मुस्लिमों और दलितों की वास्तविक भागीदारी कितनी दी जाति है?
2. राज्यसभा और विधान परिषद में आज तक कितने मुस्लिमों और दलितों को भेजा हैं ?
3. क्या संविधान और लोकतंत्र की बात केवल चुनाव के समय याद आती हैं, उसके बाद पार्टी के संगठन और उम्मीदवार चयन में मुस्लिमों एवं दलितों को कितना हिस्सा दिया जाता है l
दलितो एवं मुस्लिमों इस बार मूर्ख न बनना। सँविधान व लोकतंत्र के नाम पर आपका मूर्ख बनांकर;
"पूरे परिवार को व उधोगपतियों को राज्यसभा भेजेंगे और तुम्हे ठेंगा दिखाएंगे"
यकीन न हो तो;
"स्नातक स्तर के सपा के 11 एमएलसी प्रत्याशियो की जातिवार टिकट देख लो, एक भी अनुसुचित जाति या मुस्लिम का नही है",
व
"मेडिकल में 200 शीट के नुकसान पर अखिलेश व राहुल गाँधी एक शब्द नही बोले है"
और ना ही मुस्लिम यूनिवर्सिटी के समय कुछ बोले
इस बार मूर्ख नही बनना है.
इसलिए मुस्लिम एवम् दलित समाज को किसी भी दल पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना है l
संविधान की बात करने वालों से संविधान के मूल सिद्धांत—समानता, प्रतिनिधित्व और सामाआजिक न्याय—पर जवाब मांगना है l
जय भीम 💙 जय बीएसपी 💙
अखिलेश जी का कहना है कि;
"लोकतंत्र व सँविधान बचाने के लिए एकजुट होना होगा"
दलितो इस बार मूर्ख न बनना। सँविधान व लोकतंत्र के नाम पर आपका मूर्ख बनांकर;
"पूरे परिवार को व उधोगपतियों को राज्यसभा भेजेंगे और तुम्हे ठेंगा दिखाएंगे"
यकीन न हो तो;
"स्नातक स्तर के सपा के 11 एमएलसी प्रत्याशियो की जातिवार टिकट देख लो, एक भी अनुसुचित जाति का नही है",
व
"मेडिकल में 200 शीट के नुकसान पर अखिलेश व राहुल गाँधी एक शब्द नही बोले है"
इस बार मूर्ख नही बनना है.
विकास कुमार जाटव
एक नारा, एक आवाज़,
बीएसपी के साथ 2027 का नया आगाज़!
एक मिठाई, दो पताशा,
बीएसपी से जनता की आशा!
2027 में बीएसपी पर करो भरोसा!
#9अक्टूबर_चलो_लखनऊ#9अक्टूबर_चलो_लखनऊ
जो अपने बाप को मंच से धक्का देकर उनके हाथ से माइक छीन सकता है तो उससे और क्या उम्मीद कर सकते हैं कि वह अपने चाचा का सम्मान करेगा असल में सभी समाजवादी ऐसे ही है l सभी को उनके पता है कि उनके संस्कार कैसे हैं l
आकाश आनन्द ने एक बार फिर बहनजी से सार्वजनिक माफी माँगी है। मेरा ऐसा मानना है कि;
1.बहनजी इसपर जो भी प्रतिक्रिया दे वो अंतिम रूप से होनी चाहिए। व्यक्तिगत भावनाओ में बहकर ऐसी कोई प्रतिक्रिया से बचना चाहिए जिसमे आकाश आनन्द के व्यक्तिगत व्यवहार या उसपर कोई नकारात्मक टिपण्णी हो क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो मेरा पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या अन्य रिश्तेदार हो, कुछ सम्मान रखता है। बल्कि हमारे पास कोई सार्वजनिक जगह पर बैठा अंजान व्यक्ति तक इतना सम्मान व मानव अधिकार रखता है कि उसके उस अधिकार तक हम उसका सम्मान करें जो उसे नीचा न दिखाते हो। अपरिपक्व या अन्यं रूप से ऐसे शब्दों से बचे जो व्यक्तिगत डिग्निटी पर सीधा प्रहार करते है।
2.आकाश आनन्द के साथ इन सभी घटनाओं में एक अच्छी बात रही कि;
"उनके न होने पर उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। उन्हें कम से कम लोग महसूस करने लगे है, इसमे अगर वो अपना व्यवहार कॉरपोरेट स्टाइल को छोड़कर गरीब शोषित, वंचित समाज के साथ निकटता लाकर महसूस करेंगे तो ज्यादा अच्छा व और ज्यादा स्वीकार्यता बढ़ा सकते है।"
बाकी बहनजी ही एक अच्छा निर्णय ले सकती है, वो इसे बखूबी जानती है। उम्मीद है कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया उनकी रहेगी। और यह;
"अंतिम रूप से होनी चाहिए चाहिए"
विकास कुमार जाटव
@AnandAkash_BSP@Mayawati
समाजवादी पार्टी बीजेपी का सबसे ज्यादा एक्टिव वायरस है क्योंकि ये वायरस सिर्फ यूपी ही नहीं बिहार, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बंगाल और मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार बनवा चुका हैंl क्योंकि जहां भी है किसी का समर्थन करने गया है वहीं पर उसे हरवा करके आया है इससे ज्यादा बड़ा सबूत और क्या होगा l यह बात किसी से छुपी नहीं है कि बीजेपी को पूर्ण बहुमत की सरकार में लाने वाला और कोई नहीं बल्कि अखिलेश यादव है l चलिए इस बात को तथ्यों के साथ समझते है l
2007 में बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। उस चुनाव में भाजपा सिर्फ 51 सीटों पर सिमट रह गई।
2009 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीएसपी ने भाजपा को केवल 10 सीटों पर ला दिया था l
यानी 2007–09 के इस दौर में बसपा मजबूत हुई और भाजपा कमजोर होती जा रही थी ।
लेकिन जैसे ही 2014 में अखिलेश अंकल की सरकार आई उसके तुरंत बाद ठीक 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने सीधे 71 सीटें जीत लीं, जबकि सपा केवल 5 सीटों पर रह गई। यानि अखिलेश संजीवनी बूटी साबित हुए बीजेपी के लिए l
यहीं नहीं इसके बाद 2017 में भाजपा ने विधानसभा की 312 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया।
जिस बीजेपी को बीएसपी ने सिर्फ 51 विधानसभा और 10 लोकसभा सीटों पर लाकर ईतना कमजोर कर दिया था कि दोबारा उभर पाना बहुत मुश्किल था l तो अखिलेश अंकल ने संजीवनी बूटी बनकर उसे सीधा लोकसभा में 71 और विधानसभा में 312 सीटों पर पहुंचा दिया l
इस प्रकार से आप समझ सकते हो कि बीजेपी का एक्टिव वायरस कोई और नहीं बल्कि अखिलेश अंकल यानी समाजवादी पार्टी और उसके लठैत गैंग है l
💙 जय भीम | जय बीएसपी l 🐘जय संविधान 📘
ओवैसी, मायावती और चंद्रशेखर रावण ये सब बीजेपी के एक्टिव वायरस हैं।
ये सब यूपी के चुनाव में एक्टिव होकर बीजेपी को फायदा पहुंचाते हैं, ताकि बीजेपी की राह आसान हो जाए।
आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं।
ओवैसी कितना भी हेट स्पीच दें, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
मायावती जी के कार्यकाल में हाथी की मूर्तियों को लेकर बड़े घोटाले के आरोप लगे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
चंद्रशेखर रावण कहीं भी जाएं, दरोगा से लेकर एसपी तक से भिड़ जाते हैं, लेकिन उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
यूपी की जनता को ऐसे राजनीतिक वायरस से सावधान रहना पड़ेगा।
मैने तो बार बार पहले भी लिखा था कि आकाश आनन्द को डिप्टी सीएम तो क्या सीएम पद भी ऑफर हो तब भी वो बसपा से दुर नही जाने वाले । ये अभी बसपा मे थोड़ी बहुत उथल पुथल का समय चल रहा हैं, जल्द ही सब कुछ ठीक हो जायेंगा। आकाश आनन्द कहीं नही जाने वाले, वो अगर राजनीति करेंगे तो बसपा के लिए ही करेंगे, बड़े बड़े लालच तो उनके पिताजी आनन्द कुमार को भी मिले ही होंगे लेकिन वो भी हमेशा बहनजी और मान्यवर के साथ बाबा साहेब की विचारधारा के ही साथ रहे हैं। बहनजी का आशीर्वाद ही है कि आकाश आनन्द आज एक बड़ा चेहरा बन चुका हैं और करोड़ो लोगो मे उनके प्रति प्रेम और अपनेपन की भावना देखी जा रही है लेकिन बहनजी के बिना आकाश आनन्द का वजूद भी एक सामान्य आदमी के समान ही है।
आज आकाश आनन्द जी के ट्वीट ने सारी बातो को स्पष्ट भी कर दिया हैं, अपने बाप की गद्दी छीनकर कब्जा करने वाले नेताओं या बहुजन समाज के दलाल किस्म के नेताओं के हिमायती जो आकाश आनन्द के बहाने बहनजी के नाम पर हाय तौबा मचा रहे थे, वो भी उनका ट्वीट पढ़ ले ..
" ... ..............
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम। जय बसपा।
......... ....... "
#आकाशआनन्द #AkashAnand #Bahanji #BSP #hightlights #everyone #followers
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
#उम्मीदो_का_आकाश@Mayawati आदरणीय बहनजी पूरा समाज आपके फैसले के इंतजार में है....
लेकिन इस ट्वीट से सब विरोधियों की नींद जरूर उड़ने वाली है l
जय भीम जय बीएसपी 💙💙
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
#उम्मीदें_का_आकाश@Mayawati आदरणीयबी बहनजी पूरा समाज आपके फैसले के इंतजार में ही....
लेकिन इस ट्वीट से सब विरोधियों की नींद जरूर उड़ने वाली है l
जय भीम जय बीएसपी 💙💙