Trolls are posting my 10-12 year old Tik-Tok videos to target me & derail from the actual topic of Education Minister's resignation.
I sincerely apologize for being so cool even a decade ago.
Thanks for posting them, now I can easily save them in my memories folder😂
Seeing liberandus tiktok mujra, i am sharing my journey.
i used to teach ethical hacking in 2017 🙃
Getting started with Kali Linux followed by pen testing
कभी एक हिंदू का bio देखना जिसमे लिखा हो मै नास्तिक हूँ सिर्फ मानवता पे विश्वास करता हूँ और,
वही किसी मुस्लिम का देखना जिसके bio मे लिखा हो किसी भी धर्म, मज़हब से पहले मानवता है लेकिन,
जब दोनों के पोस्ट देखोगे तो समझ आ जाएगा किसके लिए मानवता पहले है किसके लिए मज़हब
बाबा साहब कुछ मामलो मे बहुत दूरदर्शी थे |
Congratulazioni a @narendramodi che oggi diventa il Primo Ministro eletto più longevo nella storia dell’India.
È stato un piacere ritrovarci a Roma nelle scorse settimane e lanciare assieme un Partenariato Strategico Speciale che guarda al futuro per creare nuove opportunità per le nostre Nazioni e i nostri popoli.
इसके कहने का मतलब है अगर कोई 50 ओवर खेलकर 300 मार रहा ओर दूसरा 30 ओवर में तो ज्यादा अच्छा वो 50 ओवर वाला है
क्या बकलोली मचा के रखा है
यहीं पर कोई यादव लिखा होता तो
आय हाय ऑय होय करके खूब पिछ#ड़ा पटकते
आज फिर से वैभव सूर्यवंशी मात्र 44 रन बना पाए और वह भी उन्होंने कुल 22 गेंदे खेलीं।
वैभव सूर्यवंशी के इन 22 गेंदे खेलने पर तालियां बजाने वालों को यह याद रखना चाहिए कि
यह T-20 क्रिकेट नहीं चल रहा है, एक 50 ओवर के खेल में यदि आप महज 3 ओवर खेल पा रहे हैं तो यह बहुत बड़ी चिंता की बात है।
यदि वैभव सूर्यवंशी को इसी तरह से खेलना है तो उनके लिए मात्र एक ही फॉर्मेट है और वह है T-20 फॉर्मेट।
अब इस लड़के की उम्र को लेकर मत कहना क्योंकि
चाहे 15 साल का लड़का खेले या 35 साल का उसे गिना एक खिलाड़ी ही जाता है इसलिए उम्र कम का बहाना नहीं चलता है यहाँ।
सर की सराहना कीजिए कि कोई लाइव आकर , ग्राउंड पर जाकर खड़े होकर सिस्टम से सवाल किया। बच्चों को मोहरा नहीं बनाया। आगे जिगरा के साथ डटा रहा।
सारा मजाक इसी तीन लाइन में है 🙏
ये बहुविकल्पीय (मल्टीपल चॉइस) प्रश्न और टिक लगाने वाली परीक्षा प्रणाली जितनी जल्दी हो, रोक लो। इसने पढ़ने पढ़ाने की संस्कृति को बर्बाद कर दिया है। मूल पुस्तक कोई पढ़ना नहीं चाहता। सब गाइड पढ़ रहे हैं और कोचिंग वाले बकैतों को सर सर कह रहे हैं।
कोचिंग के सर लोग भी अपने को विद्वान समझने का रोग पाल रखे हैं। इनका घमंड बढ़ता ही जा रहा है!