"झारखंड हाई कोर्ट ने जेपीएससी और जेएसएससी Officers को सरकार के फैसले के खिलाफ राहत दी। जो अभ्यर्थी पहले से चयनित हैं, वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे ही।लोकतंत्र में हर नागरिक को न्यायपालिका का सहारा लेने का संवैधानिक अधिकार है।"
सरकार ने बहुत संवेदनशीलता के साथ students के protest को handle किया। उनकी लगभग सभी मांगों को मान लिया गया। 14th JPSC, FRO और ACF जैसी परीक्षाओं को cancel कर दिया गया। जो शायद cancel होने लायक भी नहीं था, उस पर भी students की बात मानी गई।
छात्र आंदोलन को खत्म करना हेमंत सरकार की सोची-समझी साजिश थी।
JPSC के बाद JSSC-CGL रद्द पर भी हाईकोर्ट ने रोक ���गा दी है। हेमंत सरकार ने छात्र आंदोलन के खिलाफ षड्यंत्र कर कोर्ट में कमजोर दलील देकर अपनी साजिश को सफल बनाया है।
शर्म आनी चाहिए घोटालेबाज मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM और उनके प्यादों को...
हटिया विधानसभा के विधायक @navinjaiswal4 ने आरोप लगाया है कि झारखंड में मौजूदा हालात इमरजेंसी के दौर की याद दिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह इमरजेंसी के दौरान लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं दिया जाता था और पत्रकारों को सच दिखाने से रोका जाता था, उसी तरह के हालात आज झारखंड में भी देखने को मिल रहे हैं।
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झारखंड के छात्रों का आवाज और शिक्षक कुणाल प्रताप सिंह सर आज झडप में बेहोश हो गए 💔
लोकतंत्र का असली हत्या तो झारखंड में हो रही है.....
#Jharkhand#Ranchi#HemantSoren
Students Protest → Sarkar ne Genuine Demands ko Accept kiya → 14th JPSC, FRO & ACF Cancel kiye gaye → Ab भीड़तंत्र ko लोकतंत्र ko Destroy karne ki ijazat nahi di jaani chahiye। #jpsc#jssc
यह व्यक्ति सच्चे मन से छात्रों के साथ खड़ा रहा।
���ज इसकी आवाज़ सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की आवाज़ बन चुकी है।
सरकार ने छात्रों के विश्वास को तोड़ा—इसमें कोई संदेह नहीं। अब न्याय की लड़ाई को नई दिशा देने का समय है।
छात्र आंदोलन 2.0 ही अब सबसे बड़ा लोकतांत्रिक विकल्प है।
More power to you, भाई @kunalpratap86 ✊🇮🇳
काश Polity padhe hote Laxmikant.
"झारखंड High Court ने JPSC और JSSC अभ्यर्थियों को सरकार के फैसले के खिलाफ राहत दी। सरकार ने तो students की मांगों को मान लिया, लेकिन जो अभ्यर्थी पहले से selected हो चुके हैं, वे अपने rights की रक्षा के लिए court का दरवाज़ा खटखटाएंगे ही।
झारखंड हाईकोर्ट ने जिस तरह से JSSC CGL case में बार बार एक तरफा फैसला दिया है, इन्ही सब वजहों से लोगों क��� न्यापालिका पर से भरोसा उठता जा रहा है। अब समय आ गया है कि संसद कानून बनाकर न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को सीमित करे। वरना न्यायिक आदेश देश की प्रगति में बाधक बनते रहेंगे।