@nishikant_dubey जी अगर इतनी ही मर्यादा और मर्दानगी है तो एक फिर वही झूठी,ओछी एवं ट्रोलरों वाली हरकतें करके देख लो जो आपने नोटिस आने से पहले किया था;आपको आपकी मर्दानगी पता चल जायेगी😆; और दूसरी बात @yadavakhilesh जैसे कद्दावर नेता किसी ओछी हरकतों वाले व्यक्ति के मुँह क्युं लगें..
वकील पाल है कि अखिलेश यादव जी । समाजवादी पार्टी को फिर मेरी सलाह है कि चाटुकारिता वाले को समझाइए । पहले तो नोटिस अखिलेश जी को देना था मानहानि का,बदले में पाल ने दिया । मैंने पूछा पाल आप कौन हो तो पाल ने दूसरे वकील से नोटिस भेजा । अब नया कहानी,मैंने अखिलेश यादवजी से कोई माफ़ी नहीं माँगी है । मैं गंगा किनारे का आदमी हूँ,मर्दानगी और मर्यादा में लड़ता हूँ । समाजवादी विचारधारा अफ़वाहों के लिए बनी है
FAMOUS POET SURENDRA SHARMA TAKES BJP TO ACCOUNT 🚨
REPORTER: Ram Mandir is being discussed again after theft allegations. What do you say?
SURENDRA SHARMA 🙏: People want things from God, but do not want God. We claim to follow religion, but do not follow what religion teaches.
REPORTER: Anupam Kher said if theft happens in a house, you do not stop living in that house.
SHARMA 🎯: True, but when public money is taken, accountability is yours. If leaders misuse democracy, we do not blame the Constitution. We question those misusing it.
REPORTER: What about ethanol in petrol?
SHARMA 🔥: Do not experiment on crores of people. If you want to test, test on your own 100 vehicles first.
कांग्रेस में सुरेंद्र सिंह और अखिलेश प्रताप सिंह बड़े कांग्रेसी नेता हैं,
हमेशा मर्यादित रहें हैं,
बता रहे इमरान मसूद का बयान उनका निजी बयान है किसी लालच में बोले होंगे,
सीटों पर बटवारा अखिलेश यादव जी और राहुल गांधी जी पहले से ही कर चुके हैं,
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
कहीं भी जाइए, लोग हंसते हुए पूछते हैं- तुम्हारे गांव में तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी वाला लवकुश रहता है न, यह सुनकर आंखें नीची हो जाती हैं, लेकिन कुछ जवाब नहीं दे पाते
इस गांव में लवकुश मिश्रा के घर से 10 लाख रुपए मिले थे, आरोप है कि यह रकम राम मंदिर चढ़ावा से चोरी की गई थी लवकुश जेल में है और उसके परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं, पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
https://t.co/obYrS9zHRx
#Uttarpradesh #RamMandir #Donation #groundreport
1 लाख करोड़ के भारी-भरकम 'निवेश' की लिस्ट में खाद-बीज की दुकानें और आटा चक्की?
उत्तराखंड सरकार का दावा है कि इन्वेस्टर्स समिट का असर जमीन पर दिखने लगा है, लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल में जो निकला उसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे!
@Basantrajsonu की रिपोर्ट
https://t.co/NtgK5MRCpH
संदीप चौधरी: टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ाई की थी अंग्रेजों की गुलामी कभी नहीं की? क्या वह स्वतंत्रता सेनानी थे या नहीं?
BJP प्रवक्ता: बिल्कुल नहीं
संदीप: तो फिर आप सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी कैसे कह सकते हैं, जिन्होंने दया याचिकाएं लिखीं और अंग्रेजों से पेंशन ली??
संदीप चौधरी ने BJP के साथ बुरा बर्ताव किया।
बड़ी खबर-
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने आवेदन किया।
अमिताभ ठाकुर के मुताबिक़ वे सारी अहर्ताओं को पूरा करते हैं।
हालाँकि असली प्रश्न तो यही है कि क्या आरएसएस के प्रत्यक्ष या परोक्ष आशीर्वाद वाली अर्हता के बगैर वे राम मंदिर ट्रस्ट के CEO चुने जा सकेंगे?
ये ट्रस्ट तो आरएसएस का था, आरएसएस का है और आरएसएस का ही रहेगा!!
चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव……ये सब तो देह हैं!!
देह बदलती रहेगी, आत्मा वही रहेगी!!
अमरीका-ईरान युद्ध लगभग शुरू हो चुका है। ट्रम्प का कल का बयान बताता है कि अगले कुछ दिनों तक इसके रुकने की कोई संभावना नहीं है।
उधर सना में सऊदी के हमले के बाद हूथियों को भी इसमें कूदने का मौक़ा मिल गया है।
स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज बंद है, अमरीका अपनी तरफ़ से भी ब्लॉकेज़ लगा रहा है, कल को बॉब अल मंदेब फिर से बंद हो सकती है।
तो फिर से क़िल्लतों के लिए तैयार रहिए। मामला लंबा खिंचा तो फिर बहुत लम्बा खिंचेगा।
⚠️हेलो दिल्ली पुलिस ये अजरेंट ट्वीट है।
एक बदतमीज बुढ़िया और कुछ नपुंसक गुंडे एक लड़की को घेरकर उसका हैरेसमेंट कर रहें है।
बैकग्राउंड से वीडियो दिल्ली की लग रही है।
लड़की बार बार मदद की प्रार्थना कर रही है।
@DelhiPolice कृपया तुरंत जाँच और कार्यवाही करें।
@LambaAlka जी कृपया मामला देखें।
सर, मुझे तो यह दावा मोदी जी के मगरमच्छ पकड़ने वाले दावे से ज़्यादा विश्वसनीय लगता है।
वैसे इस विषय पर बाकी रिपोर्टें पढ़िए तो साफ़ होता है कि मनमोहन सिंह जी का आशय आत्महत्या करना नहीं, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति अपनी नैतिक प्रतिबद्धता व्यक्त करना था।
सन्दर्भ हटाइए, तो अर्थ बदल जाता है।
पूरी तस्वीर तो किताब पढ़ने के बाद ही साफ़ होगी, लेकिन अब तक जो रिपोर्ट हुआ है, उससे यही लगता है कि उनका आशय था कि अगर आपको (चुनाव आयोग को) लगता है कि मेरी सरकार आप पर भरोसा नहीं करती, तो उससे बड़ा दुर्भाग्य मेरे लिए क्या होगा। फिर तो मेरे लिए आत्महत्या कर लेना ही बेहतर होगा।
यह शाब्दिक नहीं, बल्कि भावात्मक अतिशयोक्ति थी। साथ ही, यह मंत्रिमंडल के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को भी दर्शाती है। संसदीय व्यवस्था में किसी मंत्री का सार्वजनिक बयान उसकी निजी राय नहीं माना जाता, बल्कि सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा समझा जाता है। इसलिए मनमोहन सिंह की प्रतिक्रिया अपने किसी मंत्री के बयान से स्वयं को अलग करने की नहीं, बल्कि सरकार की ओर से चुनाव आयोग के प्रति पूर्ण विश्वास जताने की थी। पिछले 12 वर्षों में इस सिद्धांत की इतनी धज्जियाँ उड़ाई गई हैं कि लोग भूल ही गए हैं कि कभी मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी भी संसदीय लोकतंत्र का मूल सिद्धांत हुआ करती थी।
और हाँ, जिस देश को ज्ञानेश कुमार और राजीव कुमार जैसे चुनाव आयुक्तों की आदत पड़ गई हो, जिनकी निष्पक्षता और नैतिक जवाबदेही पर लगातार सवाल उठते रहे हों, वहाँ एस. वाई. कुरैशी जी और मनमोहन सिंह जी की यह बातचीत अविश्वसनीय लगना कोई आश्चर्य नहीं।
भाजपा में एक बड़बोले नेता हैं डिग्री दुबे। उनका नाम डिग्री दुबे इसलिए है क्योंकि उनकी भी डिग्री नहीं मिल रही है।
तो डिग्री दुबे ने फर्जी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और अयोध्या में RSS का मोहरा बने टिन्नू यादव के बीच 980 बार बात हुई। सपा वालों ने केस कर दिया। पंडित नेहरू के बारे में रोज बकवास करके डिग्री दुबे की आदत खराब है। लेकिन इस बार फंस गए तो तुरंत सावरकर मोड में आ गए।
चिट्ठी लिख कर अखिलेश यादव से माफी मांगी है। उनके वकील ने अखिलेश यादव के वकील को लिखा है कि
"मेरे मुवक्किल को इस बात का गहरा खेद है कि उनके द्वारा दिए गए किसी भी कथन या टिप्पणी को आपके मुवक्किल ने अनजाने में अपमानजनक या आहत समझा हो। मेरे मुवक्किल का आपके मुवक्किल की प्रतिष्ठा, गरिमा या व्यावसायिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। यदि अनजाने में कोई ठेस पहुंची हो, तो मेरे मुवक्किल इसके लिए हार्दिक क्षमा मांगते हैं।"
इस माफी प्रकरण के अलावा आप संघियों की धूर्तता पर गौर कीजिए। मंदिर ट्रस्ट पर पूरा कब्जा इनका है। साधु संतों तक को राम मंदिर से और ट्रस्ट से बाहर कर दिया। अकूत धन लूट लिया और अब मौका खोज रहे हैं कि कैसे विपक्ष को या मुसलमानों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए।
अब जाने जनता जनार्दन और दीनानाथ अजुध्या! चोर संघियों का इलाज इन्हीं दोनों के पास है।