न अतीत का अता न भविष्य का पता | स्वछंद विचार | स्वयं के जीवन में अश्वतधामा सा शापित, कर्ण सा उपेक्षित, मेघनाद सा अप्रत्यक्ष | अज्ञात अनंत यात्रा का एकाकी पथिक |
@_poetwish सदा उपलब्ध होना हमारे महत्व को क्षीण कर देता है हम उनके लिए उपलब्ध होते है हर पल क्योंकि वे हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं हम उन्हें समय देते हैं स्वयं से अधिक महत्व देते हैं प्राथिमकता में वे सर्वोपरि होते हैं पर हमारा यही समर्पण हमें taken as granted की catogary में डाल देता है
@_poetwish एक झंझोड़ देने वाला सत्य जिसे हम अक़्सर जानबूझकर नहीं मानना चाहते वह है --
जो आपको अपनी सहूलियत के अनुरूप समय देते हैं,
उनकी कहानी में आप मुख्य पात्र नहीं, केवल एक विकल्प मात्र हैं ...
स्वीकृति देना हमें सीखना होगा.. (बोलना सरल है इसका कार्यान्वयन अत्यंत कठिन) बहरहाल...
@JyotiSharma___ विडंबना यही है, कितना सब्र रखा जाए कितनी आशा रखी जाए.. आपके लिए वह करोड़ों विकल्पों में भी एक है और उनके लिए आप करोड़ों विकल्पों में से एक हो...
@_poetwish शायद ज़िंदगी का अर्थ ही यही है -- कुछ अपेक्षाएँ अधूरी रहें, कुछ सवाल अनुत्तरित यही सवाल समय के साथ जवाब बन जाते हैं। और जहाँ लगता है कि स्वयं को पीछे छोड़ आए हैं, वहीं से खुद तक लौटने की एक नई राह भी शुरू होती है ..