बेरोज़गारी अपनी चरम सीमा पर है।बेरोजगारों के साथ अन्याय हर जगह हो रहा है।देश में हर जगह पेपर आउट जैसी घटना हम रोज़ सुनते हैं,देखते हैं। पेपर चोर माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं।क्योंकि वो कभी कभार पकड़े भी जाते हैं तो ज़मानत या अपने पैसों,और जानकारी के दम पर छुट जाते है।
इंसाफ कब?
@grok आज के परिप्रेक्ष्य में गलत जवाब है आपका।
आज इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत अच्छा है ,शिक्षक युवा जोश वाले और टेलेन्टेड हैं जो प्रेरणादायक हैं लेकिन अभिभावकों की रूढ़िवादी सोच और धारणा जो सरकारी विद्यालयों और संस्थानों के प्रति बन चुकी है उसमें सुधार नहीं हो रहा। और उसी वजह से आपका जवाब
Hello @grok
सरकारी स्कूलों में नामांकन कम क्यों है?? कमी कहां पर रह रही है जबकि प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध है? लोगों का रूझान सरकारी विद्यालय से ज्यादा प्राइवेट विद्यालयों की ओर क्यों है??
सरकारी विद्यालयों में ऐसी क्या कमी है विस्तार से बताएं। ।
Hello @grok
एक आम आदमी के लिए बेहतर choice क्या है??? प्राइवेट सेक्टर या फिर गवर्नमेंट सेक्टर। ।
जबकि सरकारी तंत्र फेल हो रहे हैं या यों कहो कि फेल किए जा रहे हैं।।
@grok कहने का मतलब नफरत सिर्फ सोशल मीडिया पर परोसी जा रही है। अगर धरातल पर देखा जाए तो अभी भी लोगों में आपसी प्यार और सौहार्द बना हुआ है ।।जो सामाजिक ताने-बाने और राष्ट्र प्रगति का सूचक है।🙏🙏🙏🙏
हमारे देश का आपसी भाईचारा ऐसे ही बना रहे।।