इक्कीसवीं सदी के भारत में धर्म के नाम पर फैलाई जा रही हिंसा हमारी सर्वधर्म समभाव - सभ्यता की नींव पर कुठाराघात है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
हरियाणा के कुछ हिस्सों में जो चल रहा है या फिर जो RPF कांस्टेबल ने किया वो भारत माता के सीने पर गहरे ज़ख़्म देने जैसा है।
आए दिन, हम जो समाज के ताने-बाने में बिखराव की प्रवृत्ति देख रहे हैं वो सत्ता के लोभ में समाज में नफ़रत फैलाने का परिणाम है।
जनता में द्वेष का विष घोलना और उन्हें आपस में लड़वाना हमारे संविधान का मज़ाक़ उड़ाने जैसा है।
ऐसी घटनाएँ लचर होती क़ानून व्यवस्था और हमारी कमज़ोर होती संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
अगर हमने आज एकजुट होकर इन विभाजनकारी तत्वों के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाई तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को सहने पड़ेंगे।
कांग्रेस पार्टी सभी से शांति बनाए रखने की अपील करती है और दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा दिए जाने की माँग करती है।
नफ़रत छोड़ो, भारत जोड़ो !