श्री आशा राम चौधरी ASP नागौर के निर्देशन में *ऑपरेशन संकल्प नशा मुक्त नागौर* के तहत बड़ी कार्यवाही करते हुए नागौर में एमडी बनाने की फैक्ट्री का किया भंडाफोड़ कर, लगभग 20 करोड रुपए की एमडी बनाने की सामग्री जब्त कर, एक आरोपी महावीर को किया गिरफ्तार।
@IgpAjmer@PoliceRajasthan
EO/RO भर्ती परीक्षा-2022 पेपर लीक मामले में SOG को बड़ी सफलता मिली है। महीनों से फरार ₹5 हजार की इनामी महिला अभ्यर्थी कोमल को गिरफ्तार कर लिया गया ��ै। जांच में सामने आया कि उसने परीक्षा के दौरान मोबाइल और ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से नकल की थी। SOG के अनुसार, नौकरी लगने के बाद ₹7 लाख देने का सौदा तय हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह जोधपुर और नागौर में रिश्तेदारों के यहां छिपी हुई थी। इस मामले में अब तक 33 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। फिलहाल SOG पूरे पेपर लीक नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
इंस्टा के लिए FOMO का शिकार हुए मोदी
भारतीय राजनीति के बड़े-बड़े खिलाड़ियों ने वर्षों तक जिस व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी की रेत की दीवारें खड़ी की थीं, उन्हें Gen Z ने ढहा दिया। व्हाट्सऐप विवि के सभी मास्टर्स और डिग्रीधारियों ने इंस्टा पीढ़ी की लगातार आती चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया।
��ेन ज़ी तो वर्षों से कह रही थी—
“तेरा ध्यान किधर है? ये तेरा हीरो इधर है।”
जब जेन एक्स और बेबी बूमर्स व्हाट्सऐप पर स्क्रॉल करने में व्यस्त थे, तब जेन ज़ी इंस्टा की भाषा, उसके नियम और संस्कृति लिख रही थी। उन्होंने इस मंच पर एक भूकंपीय बदलाव ला दिया।
कल रात मोदी जी ने सेल्फ़ी मोड में एक वीडियो जारी किया, जो देखने में जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों तक पहुँचने की कोशिश जैसा लगा। लेकिन समय शायद निकल चुका था।
जब कोई व्यक्ति बार-बार मिलने वाली चेतावनियों को अनदेखा कर देता है और ट्रेन छूटने के बाद उसे पकड़ने के लिए दौड़ता है, तो मान लीजिए कि वह किसी तरह डिब्बे में चढ़ भी जाए, तब भी अंदर बैठे लोग उसे उपलब्धि के रूप में नहीं देखते। वे उसे ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते हैं जिसने सभी संकेतों को नज़रअंदाज़ किया और अब अपनी ही देरी के कारण हाँफ रहा है।
कई लोगों ने मोदी जी के कल रात के इंस्टा वीडियो को कुछ इसी नज़र से देखा। ऐसा लगा मानो यह FOMO (Fear of Missing Out – छूट जाने का डर) का परिणाम हो।
जब आप उन लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं जो किसी मंच की संस्कृति को वास्तव में समझते हैं, तब आपके आसपास ऐसा कोई नहीं बचता जो बता सके कि उस मंच की भाषा में स्वा���ाविक और प्रभावी सामग्री कैसे बनाई जाती है। मेरी दृष्टि में, उनकी मीडिया टीम वर्षों से केवल प्रशंसा सुनाने का काम करती रही है, ईमानदार प्रतिक्रिया देने का नहीं। ऐसे वातावरण में धीरे-धीरे एक इको चैंबर बन जाता है, जहाँ असहमति सुनाई ही नहीं देती। और जो नेता केवल प्रशंसा सुनता है, वह अंततः सुनना ही बंद कर देता है।
जेन ज़ी को समझना है तो पहले उनके अलिखित नियम ��ीखने होंगे। उनमें से एक सरल नियम यह है कि यदि माता-पिता व्हाट्सऐप पर संदेश भेजें, तो उसका उत्तर तुरंत नहीं दिया जाता। घंटों बाद दिया जाता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, जेन ज़ी को समझने के लिए अपने बगल में खड़े व्यक्ति की बात धैर्य से सुननी पड़ती है। यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हमें पहले से सब कुछ पता है।
उस वीडियो को पोस्ट करने से पहले शायद एक सबसे महत्वपूर्ण बात छूट गई। इंस्टा यूज़र बहुत जल्दी पहचान लेते हैं कि कोई वीडियो वास्तव में उनकी संस्कृति का हिस्सा है या केवल बाहर से लाकर उसमें फिट करने की कोशिश की गई है। बहुत से लोगों को यह संदेश स्वाभाविक नहीं, बनावटी लगा।
जब लोगों को लगता है कि सार्वजनिक भावनाएँ केवल प्रदर्शन के लिए दिखाई जा रही हैं, तो वे उसे “मगरमच्छ के आँसू” कह देते हैं। यह धारणा सही हो या ग़लत, लेकिन इंस्टा पर प्रामाणिकता (Authenticity) उत्पादन की चमक-दमक स��� कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है, और जेन ज़ी इसे बहुत तेज़ी से पहचान लेती है।
व्हाट्सऐप वाले माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को इंस्टा पर ढूँढ़ने निकलते हैं, लेकिन उन्हें वहाँ अपने बच्चे तक नहीं मिलते। मोदी जी, जब उनके अपने माता-पिता ही उन्हें इंस्टा पर नहीं पकड़ पाए, तो आपको क्या लगता है कि आप उन्हें वहाँ पकड़ लेंगे?
पूरे आंदोलन के दौरान सरकार इस भ्रम में रही कि जंतर-मंतर पर केवल सोनम वांगचुक ही उ��ी तरह के चेहरे हैं जैसे कभी अन्ना थे। लेकिन असली ताक़त को बड़ी चतुराई से नज़रअंदाज़ कर दिया गया। वहां मौजूद “जेन ज़ी” नाम की वह परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बी, जिसे समझने में सरकार को एक महीना लग गया।
ऐसा लगता है कि अमित मालवीय किसी ग़लतफ़हमी में काम कर रहे हैं। शायद अब समय आ गया है कि किसी नए व्यक्ति को ज़िम्मेदारी दी जाए। यदि ऐसा संभव न हो, तो उन्हें कुछ दिन जंतर-मंतर भेज दीजिए। वहाँ वे द���खें, सीखें और समझें कि जेन ज़ी क���स भाषा में संवाद करती है। फिर लौटकर आपको बताएँ कि इंस्टा कैसे काम करता है और जेन ज़ी ने इस मंच के लिए कौन से नए मानदंड स्थापित कर दिए हैं।
तब तक धर्मेंद्र प्रधान को बचाइए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़े तो कीजिए। लेकिन एक बात समझ लीजिए, व्हाट्सऐप, जेन ज़ी की लड़ाई इंस्टा से हार चुका है। और यदि आपके आसपास बैठे सलाहकार इसी तरह आपको हकीकत से दूर रखते रहे, तो इंस्टा की लड़ाई भी आप वहीं हार सकते हैं।
भाजपा के पास शायद ऐसे औज़ार हों जिनसे वह व्हाट्सऐप विधि को अपनी धुन पर नचा सके। लेकिन इंस्टा की दुनिया में उसकी स्थिति उस हिरण जैसी है, जो अचानक तेज़ हेडलाइट में ठिठक जाता है। कल रात वही हेडलाइट मोदी जी के चेहरे पर पड़ी, और पूरा देश उसे देख रहा था। रजनीश
CJP Protest में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा सदन में उठा. सपा प्रमुख और सांसद Akhilesh Yadav ने कहा कि छात्रों को पीटा जा रहा है और महिलाओं के साथ गाली-गलौज की जा रही है.
स्पीकर Om Birla से आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने का समय नहीं दिया जा रहा है. इसके बाद अखिलेश यादव और ओम बिरला के बीच बहस हो गई.
देखिए वीडियो...
Rahul Gandhi को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया. हिरासत में लिए जाने के दौरान राहुल गांधी के नाक से आया ख़ून.
Rahul Gandhi, Akhilesh Yadav, Priyanka Gandhi समेत विपक्षी दलों के नेता बीते दिन छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ धरने पर बैठे हुए थे.
Rahul Gandhi l Akhilesh Yadav l Priyanka Gandhi l Narendra Modi
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और आंदोलनकारियों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया जाना बेह��� निंदनीय एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। सरकार यदि युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय उन्हें डंडे के बल पर दबाने का प्रयास करेगी, तो यह लोकतंत्र की भावना के साथ अन्याय होगा।
पेपर लीक के खिलाफ लाखों बच्चे जंतर-मंतर पर बैठे हैं, लेकिन उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया जा रहा है!
मोदी सरकार बच्चों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जंतर मंतर पर लाठीचार्ज का मामला सदन में उठाया!
#DharmendraPradhanResign
2014 के बाद पहली बार इस तरह का आंदोलन देखने को मिल रहा है, जहा किसीभी राजनीतिक पार्टी के पूरे सपोर्ट के बिना इतने लोग इकट्ठे हो रहे है।।
दिल्ली और आसपास की जगह से लोग पहुंच रहे है, खासकर जो स्टूडेंट्स वहा एग्जाम की तैयारी कर रहे है, यूथ पहुंच रहा है।
ये वर्षों से दबी हुई आग है जो आंदोलन के जरिए निकल रही है।
और ये सब सरकार के खिलाफ एक हुए है चाहे जो भी पार्टी की सरकार होती ये होना ही था।
इतनी भीड़ सोनम वांगचुक जी की लोकप्रियता भी बया कर रही है।
#संसद_मार्च #sonamwangchuk #jantarmantar #CJP #Genz
जंतर मंतर के पास के मेट्रो स्टेशन बंद।
जंतर मंतर का इंटरनेट बंद।
जंतर मंतर की सड़क बंद।
जंतर मंतर के कैमरे बंद।
56 इंच वाला तो डरपोक निकला सब कुछ बंद कर रहा है।