#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
हठयोग........🍂🙏
कबीर साहेब जी कहते हैं:
कोई सतगुरू संत कहावे, जो नैनन अखल लाखवें।
आँख ना मूंदे, कान ना रूंदे ना अनहद उलझावे।।
Seth Shiv Dayal ji started his faith on "Satnaam" and "Anami" but Radha Soami name was coined by Rai Saligram and Radha Soami sect was started by him too.
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Two disciples of Sawan Singh ji Maharaj started their own sects without any orders an ashram in Delhi and Khema Mal (Balochistani Shah Mastana) who started Dera Sacha Sauda in Sirsa (in current day Haryana).
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राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश भाग 4 पृष्ठ 261-262 पर नानक जी की वाणी तथा परमेश्वर कबीर साहेब जी की वाणी का प्रमाण देकर कहा है कि:-
सोई गुरु पूरा कहावे, दोय अख्खर का भेद बतावे । एक छुड़ावे एक लखावे, तो प्राणी निज घर को जावे ।
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सावन सिंह जी महाराज के दो शिष्यों ने बिना सावन सिंह जी के आदेश के अपना-अपना पंथ शुरू किया। ये कृपाल सिंह थे जिन्होंने दिल्ली में एक आश्रम शुरू किया और खेमा मल (बलूचिस्तानी शाह मस्ताना) जिन्होंने सिरसा (वर्तमान हरियाणा में) में डेरा सच्चा सौदा
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राधास्वामी पंथ काल का चलाया पंथ है
इस पंथ के संस्थापक शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत स्वयं भूत बने। तथा लाखों लोगों का अनमोल जीवन बर्बाद किया। सच्चा सौदा सिरसा, जगमाल वाली, जयगुरुदेव पंथ आगरा आदि भी इसी काल के पंथ राधास्वामी पंथ की ही शाखाएँ हैं।
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राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके आदेश देते तथा हुक्का पीते थे। ऐसी स्थिति पितरों तथा प्रेतों की होती है, किसी भी मोक्ष प्राप्त संत के इतिहास में नहीं मिलती। जिस पंथ के मुखिया ही विकार नही
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काल के चलाये पंथ राधास्वामी पंथ में पांच नाम दिये जाते हैं। तुलसी साहेब हाथरस वाले की पुस्तक घट रामायण पृष्ठ 27 पर स्पष्ट किया है कि पांचों नाम तो काल के हैं। इनसे भिन्न नाम (सारनाम/आदिनाम तथा सतनाम) हैं जिससे काल जाल से जीव मुक्त होता है।
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हठयोग
कबीर साहेब कहते है:
कोई सतगुरु संत कहावै, जो नैनन अलख लखावै।
आँख ना मूंदे, कान ना रूँधे ना अनहद उलझावे। जो सहज समाधि बतावै।
Reality_Of_RadhaSoami_Panth*
राधास्वामी पंथ के नकली धर्मगुरु सतनाम को ही परिभाषित नहीं कर सके। इनको ये ही नहीं पता सतनाम भगवान है या स्थान है या मन्त्र का जाप है।
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राधास्वामी पंथ के नकली धर्मगुरु सतनाम को ही परिभाषित नहीं कर सके। इनको ये ही नहीं पता सतनाम भगवान है या स्थान है या मन्त्र का जाप है।