मंत्रालय का विलय: जल शक्ति मंत्रालय का गठन 2019 में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के विलय से किया गया था।
सेल (SAIL) का प्रदर्शन: सेल का शुद्ध लाभ 2021-22 में ₹12,012 करोड़ था, जो 2022-23 में गिरकर ₹1,903 करोड़ हो गया, और 2025-26 तक ₹3,233 करोड़ तक ही सुधरा है।
talked to an aspirant outside UPSC Bhawan who's giving his 5th attempt
looking at today's paper, he's left for home. not giving CSAT!
Is it that bad? 🤔
#upscprelims2026
कथन 3 बिल्कुल सही क्यों है?
मैंग्रोव की उलझी हुई मजबूत जड़ें चक्रवात और सूनामी की ज्वारीय लहरों (Tidal Surges) को सोखकर एक प्राकृतिक जैव-ढाल (Bioshield) बनती हैं। साथ ही ये तटीय समुदायों को मछली, शहद और बायोमास देकर उनकी जीविका चलाती हैं। यही असली क्लाइमेट रेजिलिएंस है! #UPSC
prelims Q.3
क्या मैंग्रोव (Mangroves) केवल दलदल में उगे आम पेड़ हैं या समुद्र की मार से बचाने वाले सुपरहीरो?
हाल ही में UPSC प्रीलिम्स में मैंग्रोव और जलवायु अनुकूलन को लेकर एक बेहद पेचीदा सवाल पूछा गया। आइए वैज्ञानिक तथ्यों के साथ इसका सही उत्तर जानते हैं! #UPSCPrelims2026
कथन 2 गलत क्यों है?
UPSC ने यहाँ शब्दों का खेल खेला! मैंग्रोव की जड़ें लवण-संवेदी (Salt-sensitive) नहीं, बल्कि लवण-सहिष्णु (Salt-tolerant / Halophytes) होती हैं। वे तटीय इलाकों को 'अलवण जलीय कृषि' (Freshwater Aquaculture) में नहीं बदलतीं। 🌊
Hormuz Strait का सामरिक महत्व क्यों है?
वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा भाग इससे गुजरता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा इससे प्रभावित होती है।
इसका अवरोध वैश्विक inflationary pressure बढ़ा सकता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1
B. ���ेवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
अदृश्य संचालक है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। भारत जैसे मानसून-आधारित कृषि प्रधान देश के लिए इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि भारतीय मानसून की तीव्रता, वर्षा का वितरण, सूखा-बाढ़ की आवृत्ति तथा खाद्य सुरक्षा तक ENSO के प्रभाव से अछूते नहीं रहते।
प्रकृति का प्रत्येक तंत्र एक-दूसरे से गहन रूप से जुड़ा हुआ है। महासागरों की गहराइयों में उत्पन्न सूक्ष्म तापीय परिवर्तन जब वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित करते हैं, तब उसका प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों की कृषि, अर्थव्यवस्था,
जल संसाधनों और सामाजिक संरचना तक अनुभव किया जाता है। एल-नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) इसी प्रकार की एक जटिल, परंतु अत्यंत प्रभावशाली महासागरीय-वायुमंडलीय ��टना है, जो वैश्विक जलवायु प्रणाली की दिशा निर्धारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
यदि कहा जाए कि ENSO पृथ्वी की जलवायु का