जयगुरुदेव
मेरे प्यारे रंगीले सतगुरु, मेरी सुरत चुनरिया रंग दो
प्रेम सिंधु तुम अगम अपारा, मेरे मन की कलशिया भर दो
मनमोहन निज रूप तुम्हारा, मेरे हिये मुकुर में धर दो
अंतर में गुरु का स्वरूप दम दम दमकता जिसकी उपमा यहां नहीं हो सकती
गुरु समान कोई देव न दूजा
#गुरु_पूजा_में_सबकी_पूजा
वक्त के कामिल मुर्शिद, आला फकीर बाबा उमाकान्त महाराज की ईद पर सबसे शाकाहारी बनने की अपील... |
गुरु समान कोई देव न दूजा
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