विश्व गुरु का एक और कारनामा देखिए! दिल्ली की राउज़ एवेन्यू की विशेष एनआईए कोर्ट ने म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में गिरफ़्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश लौटने की इजाज़त दे दी है।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत सातों अभियुक्तों पर आरोप था कि वे वैध परमिट के बिना मिज़ोरम में दाख़िल हुए और फिर अवैध रूप से सीमा पार करके म्यांमार पहुंचे। वहां इस ग्रुप ने कथित तौर पर म्यांमार की सैन्य सरकार से लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दी।
इन तमाम के ख़िलाफ़ यूएपीए की धारा 18 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई थी। उन पर टेरर एक्टिविटीज़ को अंजाम देने की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था। ये तमाम लोग रिहा कर दिए गए, और अब ये अपने वतन लौट गए हैं। इसी देश की जेलों में राजनीतिक बंदी UAPA के तहत बंद हैं, उन्हें ज़मानत तक नहीं मिल पाती है, और जिन्हें ज़मानत मिली हैं, उन पर ऐसी शर्तें हैं कि मानो वो भी कैद में ही हों। क्या इस सरकार की कोई जवाबदेही अपने नागरिकों के लिए भी है?
अडाणी को ज़मीन देने के लिए @himantabiswa सरकार ने डेढ़ हज़ार के क़रीब परिवारों को उजाड़ दिया। सरकार की तरफ से ढोल पीटा गया कि यह ज़मीन ‘खाली’ कराई गई है, मतलब नागरिकों को उजाड़कर पूँजीपति को आबाद किया जा रहा है, क्या यह पूँजीवाद और फासिज्म का मिश्रण नहीं है?
बीते छह वर्षों में 2100 इबादतगाहों, दरगाह, मजारों, मदरसों पर बुलडोजर चलाया गया है। बुलडोजर की यह कार्रावाई उन राज्यों में सबसे अधिक हुई है, जिनमें भाजपा की सरकार है। भाजपा सरकार में पूरी मशीनरी ‘अपने’ धर्म के प्रचार, प्रसार में लगी है, और ‘दूसरों’ की इबादतगाहों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जिस तथाकथित मीडियाकर्मी ने हंगामा किया है, वो @SureshChavhanke के चैनल में कार्यरत है। @Jour_Nadeem ने उस नफ़रती रिपोर्टर को मौके पर ही Expose कर दिया।
झुग्गी बस्ती में पला-बढ़ा, नाममात्र की औपचारिक शिक्षा और बर्फ बेचकर रोज़ की दिहाड़ी कमाने वाला यह व्यक्ति मज़दूरों के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही पर स्पष्ट बोलता है. ये कहानी है मोहम्मद इरफ़ान की | @prantik_ali और @AbhishekSay
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मुमताज बेगम को बांग्लादेश भेज दिया गया। इसके बारे में उनके परिवार तक को नहीं बताया गया। दुनिया का सबसे घटिया और घृणित एजेंडा लागू करने वाली एजेंसियों को शक था कि मुमताज भारतीय नहीं हैं।
उनके पति ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में हैबियस कॉपर्स याचिका लगाई। कोर्ट ने असम सरकार को आदेश दिया है कि मुमताज बेगम को वापस भारत लाने की कोशिश की जाए, उन्हें न्यायाधिकरण के फैसले को अदालत में चुनौती देने का पूरा मौक़ा दिया जाए। उनके पति को मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये दिए जाएं। यानी मुमताज बेगम को कानून के समक्ष अपने बचाव का अधिकार नहीं दिया गया।
पश्चिम बंगाल इससे भी दो कदम आगे है। वहां पिछले कुछ महीनों में कई भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश भेज दिया गया और कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें भारत लाया गया। क्या कोई लोकतंत्र ऐसा भी हो सकता है जो आए दिन अपने ही नागरिकों को अपना मानने से इनकार कर दे और प्रशासन उसे सीमा पार छोड़ आए?
फर्ज कीजिए कि एक दिन पुलिस ने आपको उठाया और बांग्लादेश भेज दिया। फिर आपका परिवार कोर्ट गया, लड़ाई लड़ी और कोर्ट के निर्देश पर आपको वापस ले आया गया। आपको कैसा महसूस होगा? ऐसा तमाशा सिर्फ न्यू इंडिया में लहराते अमृतकाल में संभव है। ऐसी निकृष्टता किसी और लोकतंत्र में संभव नहीं है।
दुनिया के किसी अच्छे देश का कोई नागरिक कहीं फंस जाए, मारा जाए तो वे आसमान सिर पर उठा लेते हैं। हमारे यहां ऐसे घटिया लोग सत्ता में बैठे हैं जो अपने ही नागरिकों को जानवर समझते हैं और उनके साथ खेल खेलते हैं। हैरानी की बात है कि ये अपने आपको राष्ट्रवादी भी कहते हैं! यह है तुम्हारा राष्ट्रवाद, यह है तुम्हारा राष्ट्र जहां नागरिकता का मूल्य मिट्टी बराबर भी नहीं?
दूसरा, क्या किसी को यह अधिकार है कि वह मेरी नागरिकता को चुनौती दे? मैं इस धरती पर पैदा हुआ हूं और यह मेरा प्राकृतिक अधिकार है कि मैं इस देश का नागरिक हूं। मैं अपराधी हूं तो सजा का हकदार हूं, वह सजा भी मेरा देश मुझे देगा, लेकिन मेरी राष्ट्रीयता को किसी भी तरह की चुनौती दुनिया के किसी भी संविधान के खिलाफ है। असल में यह सबसे घृणित किस्म की राजनीतिक निकृष्टता है।
क्या मैं अपनी अनगिनत पीढ़ियों का कोई सबूत किसी को दे सकता हूं? मेरे पास क्या सबूत है कि भारत माता की गोद में मेरे तमाम पुरखे सोए हुए हैं? संविधान और कानून जनता के लिए बनते हैं। मेरी जानकारी में दुनिया में कोई तर्क, कोई संविधान, कोई कानून किसी देश के नागरिक की राष्ट्रीयता को चुनौती नहीं दे सकता। यह सिर्फ संविधान के खिलाफ नहीं, यह समूची मानवता के खिलाफ अपराध है।
जो लोग यह कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ नफरती एजेंडे लागू करने से मतलब है। अगर उनमें मनुष्य होने की न्यूनतम तमीज होती तो वे घुसपैठियों को पकड़ने के कामयाब तरीके निकालते, लेकिन अपने ही किसी नागरिक को प्रताड़ित न करते। आपको मुसलमानों से नफरत हो सकती है, लेकिन भारतीयता से क्यों नफरत है? आप जो कर रहे हैं, वह भारतीयता को कलंकित करने का काम है। आप दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि आप इतने गए गुजरे हैं कि अपने ही नागरिकों के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार कर सकते हैं। प्लीज, ऐसा मत कीजिए।
सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। किसी घुसपैठिये को बचाने के लिए नहीं, भारतीयता की गरिमा को बचाने के लिए।
Here is @aajtak giving platform to Goons like Swatantra Bharadwaj.
Hello @anjanaomkashyap, You've invited him several times. When are you planning to invite him again to justify Sexualizing Women?.
The mosque in the Saharanpur Collectorate was demolished at 5 AM this morning.
Does the constitutional guarantee of freedom of religion no longer apply to Muslims? Why is it that our places of worship are constantly bulldozed on flimsy grounds?
The mosque committee produced records going back to 1911 to establish its existence. Prayers have been offered there continuously for more than a century. This is the very definition of waqf by user, which is still protected as waqf under law.
The Limitation Act does not ordinarily allow the Government an unlimited period to wake up one fine morning and assert possession over immovable property.
There was more than a century of open, continuous and public possession? The State cannot pretend that this possession began yesterday, hence the principle of adverse possession would apply even if we concede to the state’s arguments.
The mosque came first, the collectorate later.
For some people, perhaps the very sight of a masjid causes pain. That is their problem, not ours. Look away if you must. You cannot bulldoze our masjid just because you have an itch.
My religious freedom is not dependent on your mercy.
Will the National Commission for Women @NCWIndia and its Chairperson @VijayaRahatkar take suo motu cognizance of these posts that use AI Generated images to sexualize and demean Muslim women? Or does such conduct warrant intervention only when the women being targeted fit a particular political narrative?
किसी भी सामने डेमोक्रेटिक विकसित देश और समाज में कल कुछ घंटो में स्वतंत्र भरद्वाज अरेस्ट हो जाता जिस तरह की उसने बातें की!
अगर पुलिस अरेस्ट नहीं करती तो मीडिया ऐसी दबाव बनाती की मजबूरन पुलिस को अरेस्ट करना होता!
लेकिन यहाँ देखिये,पुलिस ने अरेस्ट नहीं किया और टीवी मीडिया उसके बचाव में आ गयी! एक चैनल पर उसका जो इंटरव्यू चला वह और शर्मनाक है!
ये टीवी मीडिया सरकार का सपोर्ट करते करते विपक्ष के साथ समाज के भी विरोधी हो गए!
क्या @DelhiPolice ऐसी नफरती, दंगाई और देश का माहौल बिगाड़ने वाली मानसिकता रखने वालों पर कोई कार्रवाई करेगी या नहीं..?
या फिर सत्ता के संरक्षण में ये लोग इसी तरह खुलेआम घूमते रहेंगे और नफरत फैलाते रहेंगे..?
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकारों शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित रूप से मारते-पीटते थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप यह बताता है कि World Press Freedom Index में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर क्यों है।
सबसे चिंताजनक यह है कि उनका कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार और बढ़ गया यह भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है।
यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है!
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की आंखों में चुभने वाली मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए प्रदर्शनों का आग़ाज़ हो चुका है इसका अंजाम जो भी हो लेकिन तस्वीर बयान कर रही है कि छात्र इस यूनिवर्सिटी को सरकार की भेंट नहीं चढ़ने देगा। नीति आयोग की हाल में रिलीज़ हुई रिपोर्ट बताती हैं कि "10 सालों में 94,000 सरकारी स्कूल सरकार द्वारा या तो बंद कर दिए गए या दूसरे स्कूलों में मर्ज़ किए जा चुके हैं।"
10 सालों में 94,000 सरकारी स्कूल खाने वाली सरकार अब यूनिवर्सिटी को अपना निवाला बनाने की फ़िराक में हैं, इस फ़िराक को देखकर मुझे यूनिवर्सिटी के फाउंडर मोहम्मद आज़म ख़ान की वो बात याद आ गई जब उन्होंने कहा था कि "अभी इस यूनिवर्सिटी पर प्रधानमंत्री मोदी जी की नज़र नहीं पड़ी हैं जिस दिन पड़ जाएगी पता नहीं इसका क्या हश्र होगा।"
आज वो ही हुआ कि यूनिवर्सिटी की 40 इमारतों में से 38 इमारतों पर न सिर्फ़ बुलडोजर चलाने का हुक़्म है बल्कि ये भी हुक्म हुआ है कि ध्वस्तीकरण में होने वाला खर्च भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से होगा। ये तो वो ही बात हुई कि पहले पुलिस आपको बेगुनाह होने पर भी अपराधी घोषित कर एनकाउंटर में मारेगी और फ़िर गोली की कीमत भी बेगुनाह मृतक से वसूलने का हुक़्म जारी होगा।
ख़ैर! यूनिवर्सिटी के लिए रामपुर के छात्रों ने जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर प्रशासन के ग़लत आदेश के खिलाफ़ प्रदर्शन कर इस घटिया आदेश को वापस लेने की मांग की हैं, उम्मीद की जानी चाहिए कि देश का हर नागरिक हर नेता इस आदेश के खिलाफ़ आवाज़ उठाएगा।
@RahulGandhi@priyankagandhi@OfficeOfDVS@SanjayAzadSln@manojkjhadu
यह सबसे शानदार फॉर्मूला है। जब भी ऐसे सवालों से सामना हो जिसमें जवाब देने में ही छीछालेदर होने की प्रबल संभावना हो तो ‘दूसरों’ को लेकर अनर्गल टिप्पणी करना शुरू कर दो। लोग चढ़ावा चोरी पर सरकार से सवाल कर रहे हैं, और सरकार के मुखिया चौतरफा ढेले फेंक रहे हैं। देखते हैं! इस तरह के बयानात से कब तक हिंदुओं को बहलाते हैं।
Israel Deliberately Killed Palestinian Children & Destroyed Their Childhood, Committed War Crimes : UN Inquiry Commission.
As per the report, more than 20,000 Palestinian children have been killed and over 44,000 injured since Oct 7, 2023.
The Commission is chaired by Dr. S Muralidhar, former High Court Chief Justice who is presently a Senior Advocate at the Supreme Court of India.
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