किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया
ग़ैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया
क्यूँ आज उस का ज़िक्र मुझे ख़ुश न कर सका
क्यूँ आज उस का नाम मिरा दिल दुखा गया
इस हादसे को सुन के करेगा यक़ीं कोई
सूरज को एक झोंका हवा का बुझा गया
- शहरयार
FULL SPEECH: सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया और अवाम से मुत्तहिद होकर हक़, इंसाफ़ और तरक्की की लड़ाई में AIMIM का साथ देने की अपील की।
अजीब शख़्स था बारिश का रंग देख के भी ,
खुले दरीचे पे इक फूल-दान छोड़ गया !!
जो बादलों से भी मुझ को छुपाए रखता था ,
बढ़ी है धूप तो बे-साएबान छोड़ गया !!
न जाने कौन सा आसेब दिल में बस्ता है,
कि जो भी ठहरा वो आख़िर मकान छोड़ गया !!
अक़ब में गहरा समुंदर है सामने जंगल ,
किस इंतिहा पे मिरा मेहरबान छोड़ गया !!
~ परवीन शाकिर
Hazrat Ali is Sufism’s foundation and the gateway to divine knowledge. His teachings emphasize heart purification, ego mastery and unconditional love to achieve ultimate closeness to God.
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सिर्फ़ यूनिवर्सिटी बना लेना ही काफ़ी नहीं होता। उसकी हिफ़ाज़त के लिए ताक़त भी चाहिए होती है।
किसी भी तालीमी इदारे की सुरक्षा तभी होती है, जब उसके पीछे समाज की ताक़त, आर्थिक मज़बूती और सियासी ताक़त हो। अगर किसी समुदाय की अपनी राजनीतिक ताक़त नहीं होगी, तो उसके स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी हमेशा ख़तरे में रहेंगे। इसलिए सिर्फ़ इदारे बनाना काफ़ी नहीं है, अपनी सियासी ताक़त भी बनानी पड़ती है।
मुस्लिम इलीट की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह लंबी लड़ाई लड़ने के बजाय शॉर्टकट ढूँढ़ता है। वह अपनी मज़बूत सियासी ताक़त खड़ी करने के बजाय तथाकथित सेक्युलर पार्टियों पर भरोसा करता है। उसे लगता है कि ज़रूरत पड़ने पर वही पार्टियाँ उसकी हिफ़ाज़त करेंगी, लेकिन हक़ीक़त में ऐसा अक्सर नहीं होता।
सेक्युलर पार्टियाँ नहीं चाहतीं कि मुसलमान एक मज़बूत और स्वतंत्र सियासी ताक़त बनकर उभरें। क्योंकि अगर किसी समुदाय का अपना मज़बूत राजनीतिक नेतृत्व और संगठन खड़ा हो जाए, तो किसी दूसरी पार्टी का मोहताज नहीं रहेगा। वो अपने मुद्दे ख़ुद उठाएगा, अपने मसलों पर सत्ता से ख़ुद बात करेगा, अपनी समस्याओं के लिए सड़क पर ख़ुद आंदोलन करेगा। सेक्युलर पार्टियां मुसलमानों को कमज़ोर देखना चाहती हैं क्योंकि कमज़ोर और बेबस मुसलमान ही उनके काम का है।
यही वजह है कि जब मुसलमानों के ख़िलाफ़ बुलडोज़र कार्रवाई जैसे मामले सामने आते हैं, तो तथाकथित सेक्युलर पार्टियाँ खुलकर विरोध नहीं करतीं। उनका रवैया ऐसा लगता है जैसे वे चुप रहकर सब कुछ होते हुए देख रही हों, मौन सहमति दे रही हों।
@imshaukatali
प्रिय सोनम वांगचुक जी,
आप कहॉं इस निर्दयी सरकार के सामने अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, अपना अनशन समाप्त करिये हम सब आपसे अपील करते हैं।
नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी की अगुवाई में हम सब पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार के शिक्षा मंत्री को सड़क से संसद तक घेरते रहेंगे और इस्तीफ़ा लेकर ही दम लेंगे।
आप अन्न जल ग्रहण करिये अनशन समाप्त करिये, देश की सड़कें इंतज़ार कर रही हैं, अभी लम्बी लड़ाई है, आपका सेहतमंद रहना ज़रूरी है।
-इमरान प्रतापगढ़ी