पर्यटकों को बंदरों के हमले से बचाइए
फिर 1 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाइए
मुख्यमंत्री जी आपकी ‘भाजपा सरकार’ की छवि तो ‘चंदा-चढ़ावा-दान चोरी’, महाभ्रष्टाचार, बेलगाम अपराध, नक़ली एनकाउंटर, हिरासत में मौतों, भू-माफ़ियाओं-क़ब्ज़ों, अवैध खनन-खदानी, बुलडोज़र के दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल, झूठे बयानों-आरोपों व मुक़दमों, सजातीय पक्षपात, शिक्षा-शिक्षकों, शिक्षालयों के विरोध, पीडीए पर अत्याचार, संविधान के अपमान, सामाजिक न्याय की अवहेलना और संत-महात्माओं, माताओं-महिलाओं, किसानों-मेहनतकशों, गरीबों, शोषितों, वंचितों व युवाओं-छात्रों-अभ्यर्थियों से दुर्व्यवहार के कारण बेहद धूल-धूसरित और धूमिल हो ही चुकी है, उप्र की छवि तो यूँ न बिगाड़िये।
भाजपा के दुर्शासन काल में शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर बिजली-पानी-सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहे उप्र में खेती-मजदूरी, उद्योग-धंधे, कल-कारख़ाने, काम-कारोबार, कलाकारी-कारीगरी, दुकानदारी-दस्तकारी, नौकरी-रोज़गार सब कुछ बदहाल है, एक ‘पर्यटन’ थोड़ा बहुत बचा है, कम से कम उसे तो बचाइए।
ये एक बेहद गंभीर मामला है जिसका दर्दनाक और ख़ौफ़नाक असर उस बच्चे पर जीवनभर हो सकता है।
टीचर्स में इतनी समझ तो होनी चाहिए कि उन्हें बच्चों से हमदर्दी और इंसानियत से पेश आना चाहिए।
तत्काल यथोचित कार्रवाई हो!
आज देश में लोकतंत्र संकट में है। छात्रों की जायज़ मांगों को अनसुना किया जा रहा है। विपक्ष के नेताओं के साथ हुआ व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
"सोनम जी से मिलने नहीं दिया तो हम बैठे रहेंगे और चाहे रात हो या सुबह"
◆ समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने कहा
#PriyaSaroj | Priya Saroj | #SamajwadiParty
संसद में विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता, मीडिया विपक्ष को भाजपा के इशारे पर बदनाम करती है
तो आखिर विपक्ष बोले तो कहां? जनता की बात किस से कही जाए? कौन सुन रहा है?
भाजपा की सरकार तो अंधी बहरी है और सरकार ने विपक्ष के बोलने पर पाबंदी लगा रखी है, इसीलिए विपक्ष के लोग, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी ने मिलकर सांसदों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपना धरना प्रदर्शन कर रहे थे, यह भी इस सरकार से बर्दाश्त नहीं हुआ और जबरन गिरफ्तार कर लिया गया
भारत में तानाशाही लागू कर दिया है भाजपा की सरकार ने, जहां बोलने की आजादी पर भी रोक लगाई जा रही है
युवाओं से निवेदन है कि सभी पत्रकार एक जैसे नहीं होते
जो पत्रकार भाजपा के दलाल हैं उन्हीं का विरोध कीजिए
जो चैनल भाजपा के गुलाम हैं उन्हीं का विरोध कीजिए
जो चैनल नफरत फैला रहे हैं उन्हीं का विरोध कीजिए
हमारी आपकी बात को सच्चाई से कहने सुनने वाले तमाम निष्पक्ष और अच्छे पत्रकार भी हैं, चैनल भी हैं, उन पर गौर कीजिए, परखिए और उनका साथ दीजिए
समय आर या पार का आ चुका है, मीडिया ने यदि अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाया तो वो दिन दूर नहीं जब मीडिया वालों का बुरा हाल होगा, भाजपा भी बचा नहीं पाएगी क्योंकि भाजपाई खुद नहीं बचेंगे इतना गुस्सा है जनता के अंदर
फिर भी हम जनता से यही कहेंगे कि वोट की चोट से इस सरकार को बदलिये, इतना वोट इस भाजपा के खिलाफ डाल दीजिए कि भाजपा की जमानत जब्त हो जाए, यही एकमात्र सही रास्ता है, भाजपा हट जाएगी तो खुशहाली अपने आप आ जाएगी
"यह बच्चे संसद भवन तक इसलिए आए थे क्योंकि वह सरकार को बताना चाहते थे कि आपका सिस्टम बीमार पड़ गया, वह काम नहीं कर रहा है। उन मासूम बच्चों को लाठियां खानी पड़ी, बेटियों के कपड़े फाड़े गए।"
- श्रीमती डिम्पल यादव जी, लोकसभा सांसद
सही एलान किया जा रहा है . ये सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस पर पत्थर बाजी न हो . किसी पुलिस वाले पर हमला करने से ये आंदोलन हिंसक मोड़ पर चला जाएगा . पुलिस को भी फिर बल प्रयोग करने का बहाना मिल जाएगा .
जंतर मंतर पर योगी जी को जरुर बुलाना चाहिए, इस भाषण को दुबारा देने के लिए, ताकि देश खुद देख सके कि उनके शब्दों और ज़मीनी हकीकत में कितना अंतर है।
यही अंतर उनके दोहरे राजनीतिक चरित्र पर भी सवाल खड़े करता है।
जनता सब देख रही है,
सुन भी रही है और 2027 में अपना जवाब भी देगी।
अब सरकार फिर से क्यों लाठी चार्ज कर रही है जंतर मंतर पर।
पढ़ने लिखने वाले बच्चों को क्यों ऐसे मारा जा रहा है।
सत्ता में बैठे लोग बेऔलाद हैं इसलिये जुल्म कर रहे हैं।