DUSU इलेक्शंस में NSUI का जीतना इसलिए जरूरी है क्योंकि आपके सबसे बड़े नेता पूरे देश में स्टूडेंट्स की सबसे बड़ी आवाज है।
अगर इतने बड़े GenZ आंदोलन, राहुल गांधी के घंटों धरने पर बैठने के बाद NSUI लीडरशिप की गलती की वजह से ABVP चारों सीट जीत जाती है तो इसका मेसेज क्या जाएगा इससे शायद NSUI लीडरशिप अनजान है।
BJP पूरे देश को ये बताएगी कि देखो देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी के लाखों छात्रों ने फिर से नरेंद्र मोदी जी पर भरोसा जताया है, असली GenZ हमारे साथ है।
DUSU हार का ठीकरा भी गोदी मीडिया कन्हैया कुमार या जाखड़ पर नहीं बल्कि राहुल गांधी पर फोड़ेगा।
NSUI का टिकट वितरण समझ से परे है, नतीजों का इंतजार करते हैं।
कल रात 11 बजे प्रधानमंत्री जी ने पेरिस में हिन्दू मंदिर बनने पर संदेश जारी किया और बधाई दी।उसी समय देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में मलबे में दबे छात्रों को बाहर निकालने के प्रयास चल रहा थे।ये है सरकार की Genz Outreach.
@Madhurendra13 सरकार के पास चुनाव प्रचार के लिए पैसा है धर्म पर उड़ाने के लिए पैसा है फ्री बांटने के लिए पैसा
आम आदमी मरे कोई कीमत नहीं है इस देश में बीजेपी सत्ता में आने के बाद संस्थानो की जवाबदेही जीरो है
यही बदला है कोई मरे कोई जिम्मेदारी नहीं
नेहरू जी जिम्मेदार हैं?
संतरी नंगड़ो ने माल चूस-चूसकर देश भर में सात मंजिला लग्जरी ऑफिस बना लिए। लेकिन इधर पढ़ने वाले बच्चे आये दिन जर्जर इमारतों के मलबे में दबे मिलते हैं।
कोई शिकायत करता है तो बूढ़ा किलस जाता है और गुस्से में नक्सल, फूफा, मामा बड़बड़ाने लगता है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की इमारत ढहने से मोतीलाल नेहरू कॉलेज का छात्र पवन कुमार मलबे में दब गया।
एक बहन अपने भाई को हर जगह ढूंढते हुए बार-बार कह रही है “मुझे मेरे भाई से मिला दो…”
मलबे में ऐसे कई और बच्चे दबे होने की जानकारी है, जिनके परिवार अपने बच्चों को ढूंढते हुए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का दर्दनाक चेहरा है। इस भ्रष्ट और लापरवाह सिस्टम ने कई परिवारों के चिराग छीन लिए।
आखिर इन परिवारों के दर्द और छात्रों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
दिल्ली के सत्य निकेतन में -
मेयर - बीजेपी के
विधायक - बीजेपी के
सांसद - बीजेपी के
सीएम - बीजेपी की
पीएम - बीजेपी के
5-5 इंजन एक ही पार्टी के हैं फिर भी डरपोक मीडिया पूछ रहा है जिम्मेदार कौन...❓
अरे बोल दो नेहरू या राहुल गांधी या बोल दो कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है सब विश्वास कर लेंगे...
जब छात्रों की जान बचाने की जरूरत थी, तब सरकार और प्रशासन कहां थे? घटना के करीब दो घंटे बाद दिल्ली पुलिस-प्रशासन की राहत टीमें मौके पर पहुंचीं। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
जैसे ही हमें सूचना मिली NSUI की पूरी टीम मौके पर पहुंची ,वहां छात्र मलबे में दबे मिले, हमारे NSUI का साथी भी मलबे में फंसा मिला और मौके पर न फायर ब्रिगेड, न पुलिस, न मेडिकल सुविधा, न JCB!
हम वहां पहुंचकर अपने हाथों से छात्रों को मलबे से निकालने में जुट गये। हमने 3 बच्चो को निकाला,कई छात्रों की जान जा चुकी है और स्थिति बेहद दुखद है।
बच्चों को मलबे से निकालते वक्त हमें एक बच्चे के हाथ से उसकी किताब मिली। यह दृश्य बेहद भावुक और झकझोर देने वाला था ।
जिस बच्चे के हाथ में किताब होनी चाहिए थी, वही हाथ मलबे में दबा मिला। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का दर्दनाक प्रमाण है।
2024 लोकसभा में यूपी में कांग्रेस और राहुल गांधी की वजह से महागठबंधन को दलित वोट मिले थे।
अवध से लेकर पूर्वांचल में जहां-जहां कांग्रेस ने चुनाव लड़ा, वहां की 12 सीटों में बसपा को एक लाख से भी कम वोट मिले।
जहां सपा के प्रत्याशी उतरे, वहां बसपा को 1 लाख से अधिक वोट मिले।
CSDS के सर्वे के अनुसार नेता विपक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में दलितों के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरा बन चुके हैं।
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
Interesting to see how all the defence of the GDP growth figure by journalists in the business media, by government economists and the OPM wallahs, is concentrated on just one quarter, without looking at so much other long-term data that the government provides and asking the broader question: what does all this tell us about the state of the economy and the lives of people?
Without doing that, you can get all technical and still end up being completely useless.
The infinite shamelessness of CJP chaps in claiming credit for all changes in past few weeks is a massive insult to the millions who fought the regime in their own ways for 12 long years, and kept the flame of resistance burning. Then, AAP launched this outfit out of thin air, and decided to save the BJP from the inevitable. The CJP is not ahistoric or ignorant or arrogant. They are utterly shameless. Defusing the pressure. Sabotaging the natural flow of events.
Gen Z - be cautious of these puppets.
So, Facial Recognition Technology( FRT) is both illegal and stupid!
Here is evidence that FRT is deeply flawed and humbug. The Govt and Delhi Police deployed it to demonise the Jantar Mantar protests.
On the back of a totally unreliable tech Delhi Police persuaded the Supreme Court to carve out an exception for 2873 persons, through illegal categories of “criminal antecedents” and “ hardened criminals”. This narrative too stands busted.
@DelhiPolice , you know the names of the cops who molested women protesters; RAF personnel who fired the pellet gun, right wing goons whose extrajudicial confessions are available online.
Waiting for FIRs against them.
And maybe, just maybe, courts can be sceptical about the State and the technology it flaunts.
@PMishra_Journo ये तो उस स्वर्ण समाज और हिंदुओं को भी देखना है जो खुद को प्रोग्रेसिव कहता है लेकिन कितनी सांप्रदायिक और जाति कुण्ठित है कि उसको नेता बना देगा?
फिर कहते हैं कहां है भेद भाव
पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने जीडीपी के आंकड़ों पर कौन कौन सी बड़ी बातें कहीं !
◆ देखिए सबसे बड़ा सवाल, अदिति नागर के साथ
@NagarAdditi | #SBS | #SabseBadaSawal
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
Is the state of the Indian economy so dire that even Union Minister Piyush Goyal has had to take up a side hustle as the US Ambassador’s secretary?
From Vishwaguru to visa-office receptionist - what a fall.