कल, AICC के अहमदाबाद अधिवेशन 'न्यायपथ' में कांग्रेस ने देश के बहुजनों को हिस्सेदारी देकर, सामाजिक न्याय को मज़बूत करने के लिए 3 ऐतिहासिक संकल्प लिए हैं।
1. हम राष्ट्रीय कानून लाकर आरक्षण की 50% सीमा को खत्म करेंगे।
2. केंद्रीय कानून बनाकर SC/ST Sub Plan को कानूनी आकार देंगे और इन वर्गों की जनसंख्या के आधार पर बजट में हिस्सेदारी देंगे।
3. संविधान के अनुच्छेद 15(5) में निर्धारित SC, ST और OBC के निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के अधिकार को लागू करवाएंगे।
देश के बहुजनों के लिए हमारा संदेश साफ है - आपके भविष्य से जुड़े इन मुद्दों पर हमारा साथ निभाएं, हाथ को मज़बूत बनाएं...क्योंकि, हाथ बदलेगा हालात!
कहां चली गई 56 इंच की छाती?
अमेरिका का राष्ट्रपति टैरिफ थोपता है, मोदी जी चूं तक नहीं करते।
आर्थिक तूफान आने वाला है, करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा – वे छुप कर बैठे हैं।
बांग्लादेश का प्रधानमंत्री भारत के खिलाफ उल्टा बोलता है, उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता।
जब इंदिरा गांधी जी से पूछा गया था - Do you lean left or right?
तब उन्होंने कहा था, “मैं न दाएं झुकती हूं, न बाएं – मैं हिंदुस्तान की प्रधानमंत्री हूं, सीधे खड़ी रहती हूं।”
लेकिन आज के प्रधानमंत्री सीधे मत्था टेक देते हैं।
मैंने इंदिरा गांधी जी से सवाल पूछा था कि आपके दुनिया में न रहने पर लोगों को आपके बारे में क्या बोलना और सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा-
• राहुल, मैं सिर्फ अपना काम करती हूं। मेरे न रहने पर लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं, उसकी परवाह मुझे नहीं है।
• मेरा फोकस सिर्फ अपने काम पर है। मेरे न रहने पर दुनिया अगर मुझे भूल भी जाए तो मुझे मंजूर है, क्योंकि मैंने अपना काम सही तरीके से किया है।
यही मेरी भी सोच है कि लोग क्या सोचते हैं, उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता।
: AICC के अधिवेशन में नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 अहमदाबाद, गुजरात
बीजेपी दलितों को मंदिर में नहीं जाने देती है, और अगर कोई चला जाए तो वे मंदिर को धुलवाते हैं – ये हमारा धर्म नहीं है।
हमारा धर्म वो है जो सबको इज़्ज़त देता है, हर व्यक्ति का आदर करता है।
कांग्रेस और बीजेपी में यही फर्क है – हमारे दिलों में सबके लिए मोहब्बत और इज़्ज़त है, जबकि उनके दिलों में सिर्फ नफ़रत।
हम इस देश को नफ़रत का बाज़ार नहीं बनने देंगे - मोहब्बत की दुकान खोल कर न्याय का हिंदुस्तान बनाएंगे।
बीजेपी की दलित विरोधी और मनुवादी सोच का एक और उदाहरण!
बीजेपी लगातार दलितों को अपमानित और संविधान पर आक्रमण करती आ रही है।
इसलिए संविधान का सिर्फ सम्मान नहीं, उसकी सुरक्षा भी ज़रूरी है।
मोदी जी, देश संविधान और उसके आदर्शों से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं जो बहुजनों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानती है।
In the Budget Session of Parliament, Congress-led Standing Committees made several suggestions to improve the lives of Indians.
The Committee on Agriculture, chaired by Charanjit Singh Channi ji, expanded on its previous call for a legal MSP and recommended additional compensation for stubble collection, along with a number of key protections for farmers and fishermen.
Under Saptagiri Ulaka ji, the Rural Development Committee advocated for the expansion and strengthening of MNREGA, urging the removal of unnecessary obstacles.
The Committee on Education, Women, Children, Youth and Sports, led by Digvijaya Singh ji, called for recruiting more teachers, reforms to end paper leaks and higher and timely-paid honorariums for Anganwadi workers.
Meanwhile, the External Affairs Committee, chaired by Dr. Shashi Tharoor, emphasised the need for safeguards for Indian migrant workers abroad.
These are just a few examples of the Congress Party’s commitment to people’s welfare. Even while in Opposition, we will continue to use every democratic institution to fight for the rights and well-being of the people of India.
आखिरकार मोदी जी ने दिया "tariffs" का करारा जवाब!
पेट्रोल-डीज़ल पर tax और गैस सिलेंडर का दाम और बढ़ा दिया।
महंगाई से त्रस्त जनता को सरकारी लूट का एक और तोहफ़ा पकड़ा दिया!
बिहार के युवाओं में जोश है, कुछ कर दिखाने का - और सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश है, उन्हें अवसर और समर्थन नहीं दिलाने का।
"पलायन रोको, नौकरी दो" यात्रा में आज बेगूसराय की सड़कों पर हज़ारों युवाओं की भावना, उनका कष्ट और संकल्प साफ़ दिखा।
बेरोज़गारी और पलायन के खिलाफ ये आवाज़ अब बदलाव की पुकार बन चुकी है। बिहार अब चुप नहीं बैठेगा, युवा और अन्याय नहीं सहेगा - अपने अधिकार, रोजगार और न्याय की लड़ाई डट कर लड़ेगा।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने आज 'पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा' में कदमताल कर यात्रा के संदेश को मजबूती के साथ बुलंद किया।
बिहार के युवाओं को पलायन नहीं, उन्हें खुद के प्रदेश में रोजगार मिले- ये हमारी यात्रा का लक्ष्य है।
ये यात्रा बिहार के संघर्ष की आवाज और उम्मीद है। हम वर्षों से अन्याय झेल रहे राज्य के नौजवानों को 'न्याय का हक' दिलाकर रहेंगे।
📍 बेगूसराय, बिहार
बिहार के युवा साथियों, मैं 7 अप्रैल को बेगूसराय आ रहा हूं, पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने।
लक्ष्य है कि पूरी दुनिया को बिहार के युवाओं की भावना दिखे, उनका संघर्ष दिखे, उनका कष्ट दिखे।
आप भी White T-Shirt पहन कर आइए, सवाल पूछिए, आवाज़ उठाइए - सरकार पर आपके अधिकारों के लिए दबाव बनाने के लिए, उसे हटाने के लिए।
यहां रजिस्टर कर White T-Shirt Movement से जुड़िए: https://t.co/mRc6JIxNkX
आइए, हम मिलकर बिहार को अवसरों वाला राज्य बनाएं।
हाल ही में मेरी मुलाक़ात दलित और आदिवासी समुदायों से जुड़े रिसर्चरों, कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों से हुई। उन्होंने मांग की कि एक राष्ट्रीय कानून बनाया जाए, जो केंद्रीय बजट का एक निश्चित हिस्सा दलितों और आदिवासियों के लिए सुनिश्चित करे।
कर्नाटक और तेलंगाना में ऐसा कानून पहले से लागू है और वहां इन समुदायों को ठोस लाभ मिला है। UPA सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भी दलितों और आदिवासियों के लिए "उप-योजनाओं" (Sub-Plans) की शुरुआत की थी। लेकिन मोदी सरकार के दौरान इस प्रावधान को कमज़ोर कर दिया गया है और बजट का बहुत कम हिस्सा इन वर्गों तक पहुंच रहा है।
दलित और आदिवासी लंबे समय से हक़ और प्रतिनिधित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज हमें यह सोचने की ज़रूरत है कि उन्हें सत्ता में भागीदारी और शासन में आवाज़ देने के लिए और क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
हमें एक ऐसे राष्ट्रीय कानून की ज़रूरत है जो दलितों और आदिवासियों को लक्षित करके और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाओं के लिए बजट में एक उचित हिस्सा सुनिश्चित करे।
Cutting cakes with Chinese diplomats while they occupy our land amounts to nothing short of celebrating the sacrifice of our brave martyrs!
Prime Minister Modi and the BJP's "foreign policy" continues its spineless tradition - bowing before every foreigner, when we should be standing straight.
When will the PM answer how the govt will get back the 4,000 sq. km. encroached by China or respond to the economically devastating 26% tariffs imposed by the United States?