हजार वर्ष तप करने का जो फल प्राप्त होता है उससे अधिक फल तत्वदर्शी संत का एक पल का सत्संग मिल जाए उससे होता है।
कबीर साहेब जी कहते हैं -
सत्संग की आधी घड़ी, तप के वर्ष हजार l
तो भी बराबर है नहीं, कहै कबीर विचार ll
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"Sant Rampal Ji Maharaj" ऐप्प
सत्संग_से_ही_सुख_है
संत रामपाल जी महाराज जी सत्संग में मोक्ष का रास्ता बताते हैं जो चारों वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण से प्रमाणित है सत्संग ही मोक्ष का द्वार है जहां पर लोग सत्य ज्ञान प्राप्त करते हैं और सत भक्ति करके सतलोक चले जाते है
सत्संग मोक्ष की धारा, कोई समझे राम का प्यारा
#सत्संग_से_ही_सुख_है
संत समागम हरि कथा बहुत दुर्लभ है।कहा है
"संत समागम, हरि कथा, तुलसी दुर्लभ दोय।
सुत दारा और लक्ष्मी यह तो घर पापी के भी होए।।"
Sant Rampal Ji Maharaj
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"Sant Rampal Ji Maharaj"
Supreme God Kabir
गीता अध्याय 16 श्लोक 23
जो साधक शास्त्रविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से
मनमाना आचरण करता है वह न सिद्धि को प्राप्त होता है न उसे कोई सुख प्राप्त होता है, न उसकी गति यानि मुक्ति होती है अर्थात् शास्त्र के विपरित भक्ति करना व्यर्थ है।
Supreme God Kabir
गीता जी के अध्याय 18 के श्लोक 64 तथा अध्याय 15 के श्लोक 4 में स्पष्ट है कि स्वयं काल ब्रह्म कह रहा है कि हे अर्जुन! मेरा उपास्य देव (इष्ट) भी वही परमात्मा (पूर्ण ब्रह्म) ही है तथा मैं भी उसी की शरण हूँ तथा वही सनातन स्थान (सतलोक) ही मेरा परम धाम है।
दुःख मेटै और सुख का दाता, पूर्ण ब्रह्म है आप विधाता । जब चाहे चोला धर आता, हुआ सुल्तानी कै खवास ।।
संत गरीबदास जी ने बताया कि कबीर साहेब जी पूर्ण परमात्मा हैं, ये दुःख समाप्त करके सुख प्रदान करते है। जब चाहे सशरीर प्रकट हो जाते हैं। कबीर साहेब ही बलख बुखारे के राजा अधम
#GodKabir_Comes_In_All_4Yugas
कबीर साहेब की समर्थता गरीब, सौ छल छिद्र मैं करूं, अपने जन के काज | हिरणाकुश ज्यूं मार हूँ, नरसिंघ धरहूँ साज ।।
संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने
#GodKabir_Appears_In_4_Yugas
त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर "मुनीन्द्र ऋषि" के रूप में आए थे। उस समय नल-नील तथा हनुमान जी को अपना सत्य ज्ञान बताकर अपनी शरण में लिया और अपने आशीर्वाद मात्र से नल-नील के शारीरिक तथा मानसिक रोग को ठीक किया था।
#GodKabir_Appears_In_4_Yugas
ज्ञानी गरूड़ है दास तुम्हारा।
तुम बिन नहीं जीव निस्तारा।।
इतना कह गरूड़ चरण लिपटाया।
शरण लेवो अविगत राया।।
सतयुग में विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को कबीर साहेब जी ने उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई और गरूड़ जी मुक्ति के अधिकारी हुए।
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कबीर साहेब की समर्थता गरीब, सौ छल छिद्र मैं करूं, अपने जन के काज | हिरणाकुश ज्यूं मार हूँ, नरसिंघ धरहूँ साज ।।
संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने
इराक देश में बलख शहर के राजा अब्राहिम सुल्तान अधम को पार करने वाले कबीर परमेश्वर हैं जैसा कि वेदों में परमेश्वर कबीर जी के 3 गुण बताए गए हैं जिसमें से तीसरा गुण है कि वह कभी भी, कहीं भी प्रकट होकर अपनी वाणियों द्वारा अपने ज्ञान का प्रचार प्रसार स्वयं करता है,