विधायक हो तो मैथिली ठाकुर जैसा!
बिहार बाढ़ की मार झेल रहा है, और बिहार की युवा विधायिका मैथिली ठाकुर बिहार के लोगों की सेवा करने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहतीं।
जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा होना ही असली जनप्रतिनिधि की पहचान है !❤️
@maithilithakur 🫡
IIT Bombay जैसी संस्था को भी अगर सरकार की नीतियों की वजह से भीड़तंत्र के आगे झुकना पड़े, तो सवाल सिर्फ एक Director के इस्तीफे का नहीं है।
अगर यही मॉडल चाहिए, तो Professors भी क्यों रहें?
पूरी IIT सरकार को सौंप दीजिए।
Director की जगह मंत्री बैठाइए, Professors की जगह इनके निकम्मे IT-celliyo को रखिए, और Academic Council भीम आर्मी को दे दीजिए।
देश की institutions ��ो मजाक बना दिया है BJP ने।
कभी आपने सोचा है कि IIT के नाम को पूरा विश्व इज़्ज़त देता था लेकिन सरकार की इस एक नाकामी के बाद IIT से विश्वास उठ जाएगा।
IIT मुंबई बेस्ट IIT माना जाता है।
ईट एलुमिनी भी अब शक के दायरे में आ जाएंगे।
IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर शिरीष केदारे ने इस्तीफ़ा लिख कर छात्र��ं को दिया।🥺
स्टूडेंट: “आप कब इस्तीफ़ा दे रहे हैं?”
प्रोफ़ेसर शिरीष केदारे: “मैं 21 सितंबर को बोर्ड को अपना इस्तीफ़ा सौंप रहा हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहता कि आप जैसे स्टूडेंट्स पढ़ाई और अपने भविष्य पर ध्यान देने के बजाय फ़ालतू के विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हों।
हम बस अपना काम कर रहे थे। हमें लगा कि स्टूडेंट्स को चीटिंग से रोकना हमारी ज़िम्मेदारी है। लेकिन अगर आपको लगता है कि यह गलत था और आप मेरा इस्तीफ़ा चाहते हैं, तो मैं इसे देने के लिए तैयार हूँ।”😤
विवेकानंद को ऐसे ही पोस्टर से नहीं हटाया गया था। इनका पूरा वैचारिक तंत्र सड़ा हुआ है। UGC पर इनके मुँह से, समाज द्वारा लगातार गालियाँ पड़ने के बाद, एक ज्ञान निकला था कि 'समाज को ऐसा लगता है कि यह अनुचित हो सकता है'।
IITs में अब मोदी एक्ट धनिया की तरह छींटा जा रहा है। और हमारी राष्ट्रवादी, समाज के एकीकरण की डींग हाँकने वाली संस्था को एक चोरी करने पर पकड़े गए विद्यार्थी की चिंता है, ना कि उस मस्तिष्क की जिसने अमेरिका में नौकरी करने ��ी जगह देश को चुना।
जो भी आशा है आपको इन जोकरों से त्याग दीजिए। ये साले देश को बेच देंगे अवसर मिलने पर।
यह लाचार आदमी कोई और नहीं IIT Bombay के डायरेक्टर सर हैं, एक वो भी समय था जब IIT Bombay की पूरी दुनियां में धाक होती थी, आज पूरी दुनियां उसी संस्थान पर हँस रही है, मोदी एक्ट ने सब बर्बाद कर देना है
Meet IIT Bombay Professor Suryanarayana Doolla:🚨
Education & Important Roles and His Mistake
- 93.4% in Class 10
- 97.8% in Class 12
- https://t.co/0BLOoRl4ig from Nagarjuna University
- https://t.co/ldCDO34sw5 from IIT Bombay
- PhD from IIT Delhi
- Organizing Chairman, JEE Advanced 2022
- Vice Chairman of JEE Advanced 2020 and 2019
His only mistake was catching a student cheating during an exam. Now, the student’s father has filed an SC/ST case against him, and he has been forced to resign.💔
And now people are demanding 10 years in jail for him. And I can guarantee you, because of this, in the future professors will think twice before catching students cheating.✍️
उत्तर प्रदेश के ललितपुर के सिलावन गांव के रहने वाले विष्णु तिवारी को र���प और SC/ST एक्ट के मामले में करीब 20 साल जेल में रहने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। विष्णु तिवारी के मु��ाबिक, साल 2000 में जमीन के विवाद को लेकर पड़ोसी परिवार से झगड़ा हुआ था। इसके बाद उन पर मारपीट, SC/ST एक्ट और पड़ोसी की बहू से रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया। वर्ष 2003 में ललितपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
विष्णु तिवारी का दावा है कि मुकदमे के दौरान उनके परिवार की करीब 5 एकड़ जमीन बिक गई और परिवार पूरी तरह बिखर गया। जेल में रहने के दौरान ���नके पिता की 2013 में मौत हो गई। इसके बाद 2014 में एक भाई और 2015 में मां की मौत हो गई। 2017 में एक और भाई की मौत हो गई। विष्णु तिवारी का कहना है कि वह 20 साल जेल में रहने के कारण अपने माता-पिता और भाइयों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके और न ही उनकी अर्थी को कंधा दे पाए। एक भाई परिवार में लगातार हुई मौतों के बाद सदमे में मानसिक रूप से बीमार हो गया।
विष्णु के मामले में 2017 में एक NGO की टीम को जानकारी मिली, जिसके बाद एक वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका मुकदमा लड़ा। 28 जनवरी 2021 को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रेप का आरोप मेडिकल साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होता और FIR भी घटना के तीन दिन बाद दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास समेत मामले के कई पहलुओं पर गौर करते हुए विष्णु तिवारी को दोषमुक्त कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 3 मार्च 2021 को विष्णु तिवारी को आगरा सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। करीब 20 साल बाद जब वह अपने गांव पहुंचे तो उनका पुश्तैनी घर जर्जर हालत में था और परिवार के अधिकांश सदस्य दुनिया में नहीं थे। रिहाई के बाद भी उन्हें रोजगार पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विष्णु का कहना है कि लोग उनके 20 साल जेल में रहने की बात जानने के बाद उन्हें काम पर रखने से बचते हैं और वह फिलहाल लखनऊ में खाना बनाने का काम कर रहे है।
विष्णु तिवारी का मामला लंबे समय तक जेल में रहने और बाद में अ��ालत से बरी होने के बाद उनके परिवार पर पड़े असर को लेकर चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद वह जेल से तो बाहर आ गए, लेकिन उनके मुताबिक 20 साल की कैद के दौरान उनका परिवार और घर दोनों उजड़ चुके थे। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को जांच के आदेश दिए थे और विष्णु तिवारी को मुआवजा देने की सिफारिश की थी।
मध्यप्रदेश के खरगौन जिले में एम्बुलेंस कीचड़ में फँस गई
फिर गर्भवती महिला को 2 किमी दूर बैलगाड़ी से ले जाया गया
और देरी होने से बच्चे की मौत हो गई।
समाचार समाप्त हुए।
इग्नोर करिए ये सब तो रोज़ का है।
प्रश्न 1 : ये करने के लिए पार्टी का पैसा ईस्तेमाल हो रहा या टैक्स पेयर्स का?
प्रश्न 2 : हमने अश्वमेध यज्ञ क्यूँ नहीं किया? दुनिया भर में घोड़ा छोड़कर भारत की ताकत का अंदाजा लगा लेते?
भीम आर्मी के गुंडों ने अलीगढ़ में सचिन राघव को पीटा, हत्या का प्रयास किया, अपमानित किया। और अब पुलिस स्टेशन भी घेर कर बैठ गए हैं। क्या सवर्णों की यही स्थिति बनी रहेगी? क्या सवर्ण होना और सड़क पर निकलना भी अपराध हो गया है?
हमारी बहन-बेटियों पर हर दिन टिप्पण�� होती है, सरकार सोई रहती है। अब भीड़ बना कर घेरा और पीटा जा रहा है। ध्यान रहे, जिस दिन सवर्ण ने इन्हीं गुंडों की तरह कानून से डरना बंद कर दिया, वह दिन बहुत विकट होगा समाज के लिए।