जामिया वाले बच्चों सावधान!
आंदोलन जामिया से लगभग 20 किमी दूर चल रहा है, लेकिन @DelhiPolice की वर्दी में बिना नेम प्लेट वाले पुलिसकर्मी जामिया के छात्रों को रोक-रोककर उनके नाम लिख रहे हैं।
आख़िर ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या इसका कोई आधिकारिक कारण बताया गया है? क्या यह उचित है?
कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि भविष्य में इन छात्रों को परेशान किया जा सकता है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं फिर से मुस्लिम युवाओं पर NSA या UAPA जैसी कड़ी धाराओं के इस्तेमाल की तैयारी तो नहीं की जा रही।
Note- इस तरह से अगर कोई भी पुलिस वाले आपको रोक कर आपका नाम पता पूछे तो उन्हें कुछ भी न बताएं जब तक कि पूछने का कोई ठोस वजह न हो!
#CJPProtest #JamiaMiliaIslamia
सुनिए, इस वीडियो को बनाने वाले छात्र क्या कह रहे हैं। 👇
"ज्यादा वर्दी का गुरूर हो तो बता दो अभी, 5 मिनट में उतरवा दूंगा"
मुजफ्फरनगर, यूपी में एक कांवड़िए की इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा को धमकी !!
कुछ कांवड़िये DJ के ऊपर चढ़े थे। इंस्पेक्टर ने उन्हें नीचे उतरने के लिए कहा था। इस पर विवाद शुरू हुआ।
पश्चिमी UP में कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है।
सोचिए, अगर अयान की तरह किसी हिंदू आदमी को इतनी बेरहमी से मारा गया होता, तो पूरा इलाका हंगामे में डूब जाता। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ होतीं, बुलडोज़र चलते, खुली नफ़रत और हिंसा की बातें होतीं। लेकिन जब किसी मुसलमान को उसकी मज़हबी पहचान की वजह से मार दिया जाता है, तो हर तरफ़ ख़ामोशी छा जाती है। न इंसाफ़ की जल्दी, न जवाबदेही, न कोई सच्ची कार्रवाई।
झारखंड के गोड्डा में रहने वाले फ़ैज़ानुल्ला सेरेब्रल पॉल्सी से ग्रसित हैं. वो हाथ से लिख नहीं पाते. लेकिन उन्होंने परीक्षा में 93.80% हासिल किए हैं. वो अपने मुंह से ही लिखते हैं. फ़ैज़ानुल्ला आम लोगों की तरह उठ-बैठ भी नहीं पाते हैं. लेकिन पढ़ाई के लिए उनके जज़्बे ने उन्हें अब सुर्खियों में ला दिया है.
रिपोर्ट: मोहम्मद सरताज आलम
शूट और कैमरा: निशांत कुमार
एडिट: दीपक जसरोटिया
बंगाल में हिंसा हो रही है। सुरक्षा बल तमाशा देख रहे हैं। मालूम नहीं इन हिंसा करने वालो पर कोई कार्रावाई होगी या नहीं! लेकिन इन सुरक्षा कर्मियों पर तो कार्रावाई होनी चाहिए, जो अपनी ड्यूटी भी अंजाम नहीं दे रहे।
Abdullah is suffering from a strange disease, and he has been in hospital for a long time without any progress..
He urgently NEEDS TO TRAVEL ABROAD FOR PROPER TREATMENT..
बिहार में करीब एक माह पहले रोशन ख़ातून नामी एक महिला की लिंच करके हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 19 लोग नामज़द हैं, जिनमें से एक को ज़मानत मिली तो उस हत्यारोपी का ऐसे स्वागत किया गया, मानो वह कोई ‘वीर’ हो! नफ़रत में सड़ चुके इस वर्ग पर लानत भेजिए!
सम्राट चौधरी के सामने चुनौतियां बहुत हैः AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा, ‘जनता ने एनडीए के हक में मैंडेट दिया है, इसलिए नई सरकार को बधाई देता हूं।मैं विपक्ष में हूं, लेकिन जनता ने उन्हें समर्थन दिया है इसलिए उन्हें मुबारकबाद देता हूं। सम्राट चौधरी बिहार के सबसे युवा सीएम हैं, उनके सामने चुनौतियां बहुत है।
#BiharPolitics #SamratChaudhary #AIMIM #NitishKumar #PoliticalNews @aimim_national
उत्तराखंड में गिरफ्तार हुए सनाउर रहमान उर्फ सत्यनिष्ठ आर्य की कहानी भी सलीम वास्तिक जैसी है –
18 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड की पौड़ी पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक सनाउर रहमान को गिरफ्तार किया है। वह यहां घूमने आया था। यह हिंदू व्यक्ति सत्यनिष्ठ आर्य उर्फ सत्यसाधु बनकर गाजियाबाद (यूपी) में वर्ष 2016 से रह रहा था। इसी नाम से उसने आधार कार्ड भी बनवा लिया था।
सोशल मीडिया खंगालने पर यह भी पता चला कि सनाउर रहमान पहले नास्तिक बना, फिर वर्ष 2018 में नाम बदलकर सत्यनिष्ठ आर्य बन गया। इसने भी सलीम वास्तिक की तरह मुस्लिम/ईसाई समाज के खिलाफ आपत्तिजनक बोलना शुरू कर दिया।
धीरे–धीरे यह भी हिंदू संगठनों की आंख का तारा हो गया और UPI से चंदा मांगकर अपनी दुकान भी आगे बढ़ाने लगा। हिंदू संगठनों के प्रोग्राम में यह मंचों पर नजर आने लगा। कई बार इसके खिलाफ शिकायतें हुईं, लेकिन UP पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पश्चिम बंगाल इलेक्शन –
दक्षिण दिनाजपुर में BJP प्रत्याशी शुभेंदु शेखर को भीड़ ने पीटा। प्रत्याशी और सुरक्षाकर्मी ने वहां से भागकर जान बचाई। हमले की वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
मजदूर हो तो ट्रेन नहीं
वोटर हो तो VIP सेवा!
BJP ने गुजरात के सूरत से स्पेशल ट्रेन चलवाई. इस ट्रेन से पश्चिम बंगाल के लोगों को भरकर वोट करने भेजा गया. ये वही सूरत स्टेशन है, जहां एक दिन पहले ट्रेन पकड़ने आए मजदूरों को लाठी मिल रही थी. वो मजदूर यूपी-बिहार के थे.
मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी, मौलाना अज़ीम उल्लाह खान, मौलाना पीर मोनीस, मौलाना हसरत मोहानी, मौलाना महमूद हसन, मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना अहमद उल्लाह शाह, मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली, मौलाना मज़हर उल हक़, मौलाना अब्दुल कलाम कासमी, मौलाना अहमद सईद देहलवी, मौलाना सैयद अता उल्लाह शाह बुखारी, मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी, मौलाना अब्दुल हामिद बदायूनी, मौलाना हिफज़ुर्रहमान स्योहारवी, मौलाना सज्जाद हैदर इल्दरिम, मौलाना इनायत उल्लाह खान मशरिकी, मौलाना बरकत उल्लाह भोपाली, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ये उन प्रमुख मौलानाओं के नाम हैं जो इस देश को आज़ाद कराने के लिए अंग्रेज़ों से लड़े थे। इनमें से कइयों को अंग्रेज़ों ने मौत की सज़ा देकर शहीद किया। और इनमें ऐसा तो एक भी मौलाना नहीं है, जिसने अंग्रेज़ों की यातनाएँ ना सही हों, जिसने जेल ना काटी हो। ये सिर्फ चंद नाम हैं, इसके अलावा उन मौलानाओं की फेहरिस्त बहुत तवील है, जिन्होंने ग़ुलाम भारत को आज़ाद कराने के लिए आजीवन संघर्ष किया।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक भी मौलाना ऐसा नहीं है, जिसने अंग्रेज़ों से माफी मांगी हो, अंग्रेज़ों से पेंशन ली हो। यह सब बताने का उद्देश्य इतना है कि बीते दिनों एक महंत मुख्यमंत्री ने एक चुनावी सभा में कहा था कि “मौलाना बंगाल की सड़कों पर झाड़ू लगाते दिखाई देंगे।” मैं यह सवाल नहीं करूँगा कि स्वाधीनता संग्राम में उस वर्ग की क्या योगदान है जिस वर्ग से ‘योगी’ आते हैं! लेकिन यह सवाल ज़रूर करूँगा कि जिस “मौलाना वर्ग” ने इस देश को आज़ाद कराने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उस “मौलाना वर्ग” से “योगी” सड़कों पर झाड़ू लगवाना क्यों चाहते हैं? क्या इस देश के प्रबुद्ध वर्ग को, इस देश की अदालतों को, इस देश के चुनाव आयोग को इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखा? अगर कोई ‘दूसरे’ समुदाय का नेता यही बयान किसी ‘दूसरे’ समुदाय के धर्म गुरुओं के लिए कह दे! तब उसके खिलाफ एक्शन नहीं होगा? यह दोहरे मापदंड क्यों हैं? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी मे इस तरह की हिप्पोक्रेसी सामान्य हो गई हैं?
बिहार से महाराष्ट्र करीब 150 मुस्लिम बच्चे ट्रेन से जा रहे थे, सभी कुर्ता-टोपी पहने, रास्ते में कटनी स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया, आरोप लगा के बच्चों कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग कि जा रही है, लेकिन परिजनों का कहना है कि वे मदरसे में पढ़ाई करने जा रहे थे।
Holding his shovel and digging the land to set up his tent, he happened to find remains of missing person in Khan Younis.
Specialist teams found out the remains belonged to father of Palestinian journalist Mohammad al Haddad. They found that he was executed before he was buried by the Israeli occupation forces..