देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
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चलो भोपाल..चलो भोपाल ✊
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर PCC से निर्वाचन आयोग तक विशाल पैदल मार्च।
🗓️ 28 सितंबर 2026
🕚 प्रात: 11 बजे
📍 प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल
देशभर के जागरूक छात्र-युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में केवल एक शुरुआत है। अभी भी हमें लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्थाओं और अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपने एक वीडियो में हंगरी का उदाहरण देते हुए बताया था कि कैसे विक्टर ओर्बान की सरकार ने धीरे-धीरे मीडिया, न्यायपालिका और चुनावी व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित किया, जिसके बाद हंगरी को "इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी" (चुनावी तानाशाही) की श्रेणी में रखा जाने लगा।
हंगरी का यह उदाहरण हमें सीख देता है कि लोकतंत्र को कमजोर होने से बचाने के लिए नागरिकों की सतर्कता, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। हमें समय रहते लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहना होगा।
जागरूकता, संघर्ष और एकजुटता ही लोकतंत्र को मजबूत बनाने की सबसे बड़ी ताकत है।
@dhruv_rathee@RahulGandhi@INCIndia@INCMP |
#US12351
24 जून 2024, धर्मेंद्र प्रधान जब लोकसभा में शपथ लेने आए तब नारा लगा था, नीट, नीट, शेम, शेम...अगर धर्मेंद्र प्रधान में तब भी जज़्बा होता तो पेपर लीक को जड़ से ख़त्म कर देते। दो साल बाद आज 24 जुलाई 2026 है। यह वीडियो इसलिए देखिए ताकि उन लोगों को आप जवाब दे सकें जो कह रहे हैं कि प्रधान के इस्तीफे से क्या होगा। क्योंकि प्रधान फेल रहे हैं। नीट की चोरी को लेकर विपक्ष ने ठीक एक साल एक महीना पहले याद दिला दिया था। कम से कम इन दो सालों में वे नहीं कर पाए। यह तो साबित होता है।
कई दिन हो गए, कोई विपक्षी दल नहीं तोड़ा गया है ताकि देश में दहशत पसर जाए कि अब क्या होगा, कोई बचेगा या नहीं। सरकार अगर युवाओं से संवाद करना चाहती है तो राघव चड्ढा को उनके बीच भेज दे, वे जेन ज़ी स्कूल ऑफ नायकत्व के प्रोडक्ट हैं। उन्हें मालूम होगा या उन 20 सांसदों की परेड करा दे जो जनता की नब्ज़ को सुपर फास्ट गति से समझते हुए तृणमूल छोड़ कर NCPI में शामिल हो गए। जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बनाया न अटल बिहारी वाजपेयी न संघ ने सुरेंद्र नाथ बनर्जी, मुलायम सिंह यादव या नीतीश कुमार ने। NCPI के संस्थापक का कम से कम एक इंटरव्यू तो छपना ही चाहिए कि अगर विपक्ष ने ज़ुबान बंद नहीं की तो 24 घंटे के भीतर राहुल गांधी और अखिलेश यादव को छोड़ कर उनसे सारे सांसद NCPI में होंगे।
यह मान लीजिए कि इस देश में दो चार कालेज यूनिवर्सिटी को छोड़ कर सब के सब इस तरह काम कर रहे हैं जैसे युवाओं को किसी लायक नहीं बनने देना है। किसी लायक बन जाएंगे तो वे धर्म की राजनीति को ठीक से समझ जाएंगे। विपक्ष से भी सवाल करने लग जाएंगे।
मोदी जी से नफरत करने वाले कहेंगे कि ये सब झूठ है और खबर भी फर्जी है, लेकिन हकीकत ये है कि हमारे प्रधानमंत्री भी एक ऐसे ही विश्वविख्यात कालेज से पढ़कर निकले है और फर्राटेदार प्रेस कांफ्रेंस में सवालों का जवाब देते है।
नही यकीन है तो पूरा वीडियो देख लो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में ‘शांति भंग’ संबंधी धाराओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद की अवैध हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित दोषी तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के वेतन से वसूली जाए।
अदालत ने गाजियाबाद और प्रयागराज समेत कई जिलों में पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, अब शांति भंग की कार्रवाई में बाहरी जमानती की आवश्यकता नहीं होगी और केवल ₹20,000 के पर्सनल बांड पर तत्काल रिहाई दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि 24 घंटे से अधिक की अवैध हिरासत की स्थिति में राज्य सरकार को पीड़ित को ₹25,000 प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा। बाद में यह राशि दोषी अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी।
अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को 14 सितंबर 2026 तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि यूपी में किस तरह पुलिस के द्वारा नागरिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और सरकार द्वारा एैसे पुलिस अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
धन्यवाद माननीय उच्च न्यायालय।
मध्य प्रदेश की ये 'शानदार' सड़क देखिए, इसे बनाने में 'स्पेस टेक्नोलॉजी' का इस्तेमाल हुआ है।
ये BJP की 'डबल इंजन' सरकार के बेहिसाब भ्रष्टाचार का सबूत है- जहां जनता रो रही है और सत्ता में बैठे लोग मलाई खा रहे हैं।
शर्म आनी चाहिए।
भाई और बहनों.. नमस्कार
मुझे आज भी याद है, 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे, तब संसद में मनरेगा कानून आम राय से पास किया गया था। यह ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसका फायदा करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला था। खासतौर पर वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब लोगों के लिए रोजी-रोटी का जरिया बना।
रोजगार के लिए अपनी माटी, अपना गांव, अपना घर-परिवार छोड़कर पलायन करने पर रोक लगी। रोजगार का कानूनी हक़ दिया गया, साथ ही ग्राम पंचायतों को ताकत मिली। मनरेगा के जरिए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों के भारत की ओर एक ठोस कदम उठाया गया।
पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार, गरीबों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज कर मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की, जबकि कोविड के वक़्त ये गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ।
लेकिन बहुत अफसोस की बात है कि अभी हाल में सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया। न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि मनरेगा का रूप-स्वरुप बिना विचार-विमर्श किए, बिना किसी से सलाह-मशवरा किए, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए मनमाने ढंग से बदल दिया गया।
अब किसको, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, यह जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी।
कांग्रेस का मनरेगा को लाने और लागू करने में बड़ा योगदान था, लेकिन यह पार्टी से जुड़ा मामला कभी नहीं था। ये देशहित और जनहित से जुड़ी योजना थी। मोदी सरकार ने इस कानून को कमजोर करके देश के करोड़ों किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है।
इस हमले का मुकाबला करने के लिए हम सब तैयार हैं। 20 साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं।
मेरे जैसे कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं।
जय हिंद 🇮🇳
: CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी
📍 दिल्ली