लगभग 1 साल पहले, 8 सितंबर 2025 को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2025, कोयंबतूर में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा वर्तमान चुनाव आयोग की SIR कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर आलोचनात्मक थे, जबकि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना था कि भारत में चुनाव बड़े पैमाने पर स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं. हालांकि, उन्होंने बिहार में चल रहे SIR के तरीके को गलत बताया था.
उस समय दोनों ने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर ज़ोर देते हुए कहा था कि गंभीर शिकायत आने पर चुनाव आयोग को उसकी जांच करनी चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह न रहे, न कि शिकायतकर्ता से हलफनामा मांगना चाहिए..
और अब, 1 साल बाद, 29 सितंबर 2026 को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026, कोच्चि में वही दोनों फिर एक मंच पर थे.
इस बार अशोक लवासा ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर “Trust Deficit”, यानि भरोसे की कमी, पैदा हो चुकी है और चुनाव आयोग ने इस धारणा में योगदान दिया है.
उन्होंने SIR में की गई हालिया “सुधार की कोशिश” को फ्रैक्चर के ऊपर बैंड-एड की पट्टी लगाने जैसा बताया और SIR को “conceptually fraud”, यानि बुनियादी तौर पर ही गलत बताया.
वहीं ओपी रावत जी ने भी कहा, “चीजें अब पहले जैसी नहीं हैं”. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले एक “गोल्ड स्टैंडर्ड” स्थापित किया था.
उन्होंने यह भी कहा कि अविश्वास की छाया पूरी संस्था पर नहीं, बल्कि मौजूदा तीन चुनाव आयुक्तों पर है और उन्हें सार्वजनिक रूप से सवालों का सामना करना चाहिए, वरना नुकसान चुनाव आयोग का होगा.
#SackGyaneshKumar
पत्रकार अभिनव पाण्डेय के खिलाफ बिहार सरकार ने मानहानि का केस दर्ज किया है।
अभिनव पाण्डेय पर आरोप लगा है कि उन्होने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक बातें शेयर की है।
बिहार सरकार और पुलिस का मानना है कि इस पोस्ट की वजह से समाज में शांति और सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
इसलिए BNS की धारा 356 के तहत मानहानि का मामला दर्ज किया गया है।
साथ ही बिहार पुलिस ने X से 72 घंटे के भीतर पोस्ट हटाने के लिए कहा है और IP एड्रेस के साथ अभिनव पाण्डेय की लोकेशन डेटा भी मांगा है।
ईमानदारी की ऐसी मिसाल जिसने दिलाई पैसा और सम्मान!
एक कपल टूरिस्ट अमेरिका से इंडिया घूमने आया था पहले ओ आगरा जाता है।आगरा घूमने के बाद जयपुर के लिए कैब बुक करते है।
मैडम किराया पूछती है तो कैब वाला बोलता है आप ऑनलाइन चेक कर लीजिएगा जो भी हो दे दीजियेगा।
कैब वाला इनको जयपुर ले जाकर छोड़ता है और पूछता है दुबारा कब आयेंगे आप लोग।
ये कपल टूरिस्ट कैब वाले को किराए से ₹500 Extra..1/2
मोदी सरकार में मंत्री रहे आर.के. सिंह ने SIR को लेकर चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में नाम हटाने की प्रक्रिया में क़ानून का उल्लंघन हुआ. अपने खुले ख़त में उन्होंने लोकतंत्र को लेकर भी चिंता जताई है.
#indianexpresshindi
अंग्रेज कलकत्ता से दिल्ली लाइब्रेरी ले आए थे, लेकिन मोदी सरकार दिल्ली के अंदर ही 8.5 लाख किताबों वाली 135 साल पुरानी लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा में जगह नहीं दे रही।
शास्त्री भवन की इस ऐतिहासिक library को पहले सिर्फ़ दो कमरे दिए गए अब वो भी रिजेक्ट कर दिए गए हैं।
एक नेताजी का दिल एक मशहूर अभिनेत्री पर आ गया। बात शादी तक पहुँच गई लेकिन राजनीति की पुरानी आदत बिना छानबीन के भरोसा न करना नेताजी ने अपने सेक्रेटरी को हिदायत दी, इस अभिनेत्री के बैकग्राउंड की जाँच के लिए एक प्राइवेट जासूस लगाओ। पर ध्यान रहे, जासूस को भनक भी न लगे कि यह काम मेरे लिए हो रहा है.
दो महीने बाद जासूस की गोपनीय रिपोर्ट सेक्रेटरी के ज़रिए नेताजी की टेबल पर पहुँची :लड़की का चरित्र एकदम बेदाग़ है।खानदान बेहद शरीफ़ और संभ्रांत है।
परन्तु, पिछले कुछ महीनों से इसे एक बेहद घटिया, भ्रष्ट और चरित्रहीन नेता के साथ देखा जा रहा है.अतः सावधान रहें.
🤣🤣🤣🤣
दिनांक 29/09/2026 को मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त के द्वारा मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान कानून के उल्लंघन के संबंध में लिखा था और कहा था कि उनपर फौजदारी मुकदमा होना चाहिए। इस संदर्भ में कुछ लोगो ने कहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति अधिनियम 2023 की धारा 16 के अंतर्गत उनके द्वारा किये गए कार्यो के लिए फौजदारी मुकदमा से प्रतिरक्षा (immunity) है। यह गलत है। कानून (धारा 16) उनको मात्र उन्ही कार्यो के लिए फौजदारी मुकदमे से बचाती है जो उन्होंने अपने कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान किया है। कानून का उल्लंघन किसी भी कर्तव्य निर्वहन का अंग नहीं है - अतः जो कार्य उन्होंने कानून के उल्लंघन में किये है उसके लिए उनपर फौजदारी मुकदमा हो सकता है और सज़ा भी हो सकती है।
2 अक्टूबर, गांधी जयंती पर सिर्फ़ फोटो पर माला न चढ़ाएँ, सत्याग्रह कीजिए। उस अंतिम व्यक्ति के लिए, जिसके पास एक चीज़ थी—‘वोट का अधिकार’—जो उसका छीना जा रहा है, और इस पाप के अपराधी ज्ञानेश कुमार जी के इस्तीफ़े के लिए।
जंतर मंतर सत्याग्रह
2 अक्टूबर, सुबह 11 बजे
जंतर मंतर, नई दिल्ली
कैमरे पर बहुत कुछ बोल नहीं सकता. बिहार में क़ानून व्यवस्था ध्वस्त है. एक लड़की के साथ दुर्घटना हो गई. मैंने पटना के SSP को फोन किया, पर नहीं उठाया.
ये बात विपक्ष की तरफ से नहीं, बीजेपी के राज्य सभा सांसद शंभु शरण पटेल कह रहे हैं.
आप वोट देने के योग्य हैं. अधिकारी भी आपको योग्य मानता है. लेकिन सॉफ़्टवेयर उस फ़ैसले को दर्ज न होने दे तो आपका संवैधानिक हक़ किसके हाथ में है?
मनोज कुमार झा की दलील है कि चुनाव सिर्फ़ पोलिंग वाले दिन का सवाल नहीं है.
#ElectionCommission#ECI#VoterList#Democracy#Vaichariki
Priyanka Gandhi के बयान से नेताओं को सीख क्यों लेनी चाहिए? महिलाओं के प्रति संवेदनाएं खत्म क्यों होती जा रही हैं?
Watch the Full Video on YouTube with @Abhinavpinch
Yesterday, @IndianExpress reported an unprecedented rupture inside the Election Commission: TWO of its three members objecting on record, 14 times in 10 months, to decisions taken without their knowledge.
Today, the second part of our investigation looks at the concern Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi flagged most often: Who really controls our electoral rolls?
We followed that question to Goa, where we found something deeply concerning.
Stay with me....
(1/14) 🧵
रितिका चोपड़ा से सुनिए गोवा SIR की कहानी
चुनाव आयोग में हुई पूरी गड़बड़ी जानने के लिए देखिए हमारी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.