अरे अजीत भारती तुम कबसे ऐसी बात करने लगे जिसके पोस्ट में गाली की बदबू आती है जिसके पोस्ट में गंध निकलती है।
जो हर पोस्ट में दूसरों को गालियां देता है जो हर रोज आरक्षण और दलितों पर व्यक्तिगत अपमानजनक टिप्पणी और अभद्र भाषा का प्रयोग करता है महज कानून के द्वारा इलाज करने से डर गए।
@ajeetbharti इतना कांप काहे रहे हो सिर्फ कानूनन ही इलाज होगा तुम्हारी वाल गालियो और बदतमीजी से भरी पड़ी है दलित महिलाओं और उनके ऊपर जो तुमने बोला है सोशल मीडिया पर साफ देखा जा सकता है।
अब तुम रवि जाटव जैसे वकील को डराओगे 😃
2 दिन में आरक्षण विरोधी पोस्ट मेरे टाइमलाइन पर आना बंद हो गए है। आप भी करके देखे, आपको भी लाभ होगा। मैं अकेला ही क्यों लाभ लेता रहु। प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की लड़ाई को मजबूत कीजिए। @ARanganathan72 के विश्लेषण से 65% GDP प्राइवेट सेक्टर से आती हैं और इसलिए वहाँ आरक्षण लागू होना चाहिए। आरक्षण सबसे तेज गति से परिवर्तन का माध्यम है।
मैं तो कहता हूँ, एक बार शर्मा चाय वाले के बगल में बाल्मीकि चाय वाले का बोर्ड लगा कर देखो। पता लग जाएगा की चाय के कप की जाति होती है या नहीं।
क्या मुझे उत्तर भारत में किसी मुख्य बाज़ार में कोई बाल्मीकि या जाटव जैसी किसी जातियों के नाम से रेस्टोरेंट, ढाबा या चाय की दुकान दिखा सकता है?
सर्वे करो, ध्यान रहे मुख्य बाज़ार में हो, किसी जाति विशेष गाँव के पास नहीं हो। और महाराष्ट्र और तमिलनाडु, केरल के मत लेके आना। @chitraaum
चितरा बोल रही है कि आज सामान्य वर्ग और दलितों में कोई भेदभाव नहीं है
चितरा तुम्हें कसम है अपने सबसे प्रियजन की.. मेरे दो सवालों के सच -सच जवाब देना!
~ अगर तुम त्रिपाठी न होती क्या तब भी न्यूज़ एंकर बन पाती?
~ तुम जिस संस्थान में ऊँची कुर्सी पर बैठकर टेलीप्रोम्पटर से गोदी चालीसा पढ़ती हो उस संस्थान में झाड़ू, पोंछा करने वालों के अलावा कितने दलित, पिछड़े हैं?
गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज!
दो केंद्रीय मंत्री श्री जीतनराम मांझी और चिराग पासवान 𝐑𝐒𝐒 के निर्देश पर विपरीत दिशाओं में बात कर 𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 के आरक्षण खत्म करने के मूल उद्देश्य से ध्यान भटका आरक्षण सर्मथक जनभावना का आंकलन करना चाहते है। जिनका खुद का स्वतंत्र वजूद नहीं होता वो ऐसे ही 𝐁𝐮𝐧𝐜𝐡 𝐨𝐟 𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡𝐭𝐬 मानने वालों के निर्देशन में अभिनय करते है।
सर्वप्रथम तो आरक्षित कोटे से जीते ये मंत्री संविधान और आरक्षण विरोधियों की गोद में बैठ सत्ता का चरम सुख प्राप्त कर रहे है। इन्हें समाज और वैचारिकी से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आरक्षण से इन दोनों को सख़्त नफ़रत है तो ग़ैर आरक्षित सीटों से चुनाव लड़कर देख लें, ज्ञान चक्षु खुल जायेंगे।
आरक्षण विरोधी बीजेपी के साथ रहते श्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जी की पार्टियों की क्या स्पष्ट विचारधारा है, यह कोई नहीं जानता?
अगर ये पार्टियां आरक्षण समर्थक है तो हमारी सरकार में बिहार में बढ़ाई गयी 𝟔𝟓 % आरक्षण सीमा को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल क्यों नहीं कराते? ये घोर अवसरवादी और सुविधाभोगी नेता आरक्षण बढ़वायेंगे नहीं, विचारधारा की राजनीति करेंगे नहीं केवल और केवल मंत्री पद, सुरक्षा और बंगला प्राप्त करने के लिए येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहेंगे।
मोहन भागवत ने भी पहले आरक्षण समीक्षा की बात की थी, बिहार ने कान पकड़ कर अच्छे से उठक-बैठक करवा दी थी। अब फिर करेंगे तो बिहारी लोग 𝐑𝐒𝐒/𝐁𝐉𝐏 का मुर्गा बना देगा।
बसपा वाले कल्याण सिंह के करीबी 26 साल से भाजपा में रहे अजय जायसवाल को बसपा ज्वाइन करवा रहे हैं,
सपाई बसपा के निकल गए नेताओं को जोड़कर दम दिखा रही है,
है ना कमाल की बात 😂
अब सोचिए सत्ताधारी पार्टी को छोड़कर जिस पार्टी में लोग जा रहे हैं उसी में टक्कर है ना कि किसी और से टक्कर है और छोटा-मोटा व्यक्ति नहीं कल्याण सिंह का करीबी सपा कांग्रेस के झांसे में नहीं आना है,
इस बार बसपा ही विकल्प है।।
फर्जी धर्म का लॉलीपॉप पकड़ाकर मनुवादियों ने शूद्रों एवं अछूतों को सदियों से जमीन, शिक्षा, शास्त्र और संपत्ति से दूर रखा। विरोध करने पर उन्हें बर्बर प्रताड़ना दी गई।
आरक्षण के जरिए विकास के इस अंतर को पाटने की जरा सी कोशिश क्या हुई कि जातिवादी लोग गला फाड़ने लगे हैं।
In UP’s Badaun, a Dalit man, Rajesh, was picked up by Yogi’s police following an altercation at a Bhandara.
He later died in police custody.
The question is simple: what happened to Rajesh while he was in the custody of Yogi’s Police?
But this unfortunate incident reflects a larger reality: Dalits continue to face discrimination, exclusion and violence — both covert and overt.
That is why justice for Shri Mallikarjun @kharge is about far more than one incident. He is an icon of Dalit politics, dignity and justice.
Justice denied to him would send a message of impunity. Justice delivered to him would be a small but consequential symbol of justice for Dalits across India.