कामसुख में मोहित होकर मूढ़बुद्धि व्यक्ति योग की इच्छा रखता है, परन्तु भोगों से योग का फल प्राप्त नहीं होता।
स्त्री के बाहुपाश में पड़कर व्यक्ति विवेकहीन हो जाता है और उस क्षण प्रभु का स्मरण नहीं करता, बल्कि स्त्री के अंगों से सुख का अनुभव करता है।
कामवासना में पुरुष अक्सर कमजोर हीं होते हैं वो सबकुछ एकबार मे हीं ले लेना चाहते हैं।
जबकि पुरुष स्वभाव के विपरीत स्त्री धीरवान होती है, वो हर आलिंगन का सिख धीरे धीरे लेकर सिसकना चाहती है। स्त्री का प्रेम सागर की तरह धीर होती है। पुरुष के उद्याम वेग को अपने मे समाहित कर लेती है ।
देश का इतिहास 1991 के संकट को याद करेगा सबसे पहले आपको याद करेगा।आपने सूझ बुझ से देश को उस संकट से निकालने में कामयाब रहे साथ ही देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में कामयाब रहे आप भारत के इतिहास में सबसे बेहतरीन वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री के रूप में याद किए जाएंगे।
#ManmohanSingh