अब सोप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में,
भोलेनाथ, मेरी राहें, मेरी खुशियाँ, सब तुम्हारे साथों में।
तुम हो वह शिव, जो अंधेरों को प्रकाश में बदल दे,
तुम्हारे ध्यान में हर पीड़ा मेरा हल्का हो जाए।
त्रिशूल की धार जैसी शक्ति, भस्म की छाया जैसी शांति,
तुम्हारे चरणों में ही मिलती है आत्मा की सच्ची संतोषांती।
ओ महादेव, गंगा जैसी शुद्धि, कैलाश जैसी शांति,
सदा रहो मेरी राहों में, सदा रहो मेरे जीवन में अंततः।