अपने चेहरे चमकाने पर झूठ परोसने के विज्ञापन पर योगी महराज जी 6812 करोड़ खर्च करते हैं और यूपी प्राथमिक विद्यालयों में नमक पानी जली रोटी परोसते हैं
क्या यही है 1 ट्रिलियन डालर के इकोनॉमी वाली अर्थव्यवस्था या यही योगी जी का दोहरापन ?
‘गोरखपुर मॉडल’ की पोल खोलते-खोलते तुलना के रूप में ‘गुजरात मॉडल’ की घपलेबाज़ी की बात भी सामने आ गई। दोनों में जो बातें कॉमन हैं वो ये हैं कि दोनों जगह भाजपाई सरकार है और भाजपाई महा-भ्रष्टाचार भी।
आपसी टकराहट ने तो ‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बना दिया है।
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
मैं कहां हूँ? और आपको बीच शरीर से क्यों मौजूद नहीं हूँ!
फ़ेलोशिप पर अपने वतन से दूर आई हूँ, मगर यहां से अपनी solidarity भेज रही हूं।
जल्द आपके बीच आऊँगी। कुछ लाठियां साथ खाएंगे और मिलकर एक नया भारत बनाएंगे।
जय भीम
दिल्ली पुलिस में बैठे कुछ गुंडे जिसने बर्बरता की, बच्चियों के साथ शारीरिक हिंसा की उन सभी गुंडों को अदालत में बेनकाब किया जा रहा है!
राजनीतिक आका के इशारे पर जो बर्बरता इन गुंडों ने पुलिस के वेष में की है उसको याद रखा जाएगा।
दिल्ली पुलिस को इन गुंडों से बदनाम होने से बचाना होगा!
🚨 लोकतंत्र पर लाठी नहीं चलेगी!
छात्रों पर दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई की सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों और बार संस्थाओं ने कड़ी निंदा की है। शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है, अपराध नहीं।
"जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे तब तक हम लोग सदन में आवाज उठाते रहेंगे और जिन बच्चों की जान गई है उनके परिवारों की मांगे मानी जाएं।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, लखनऊ
दिल्ली पुलिस, मोदी-शाह की हुकूमत तो सुने ही, आम युवाओं! ये भाषण आपको ज़रूर सुनना चाहिए. इस आंदोलन में 23 दिन तक अनशन पर बैठी @neha_aisa का ये भाषण इस मोड़ पर बहुत ज़रूरी हस्तक्षेप है.
पेपर लीक क्यों हुआ, इसका जवाब शिक्षा मंत्री को देना चाहिए।
बच्चों पर लाठी क्यों चलाई गई, इसका जवाब गृहमंत्री को देना चाहिए।
इन दोनों की जवाबदेही क्यों नहीं तय हुई, इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना चाहिए।
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।