रविशंकर प्रसाद द्वारा लालू जी के लिए "चारा खाना और अलकतरा पीना" जैसी शब्दावली का इस्तेमाल निहायत ही जातिवादी टिप्पणी है।
रविशंकर जी खुद बताना भूल गए कि वो क्या खाते है!
जुबान गंदी करोगे तो मिनट नहीं लगाऊंगी जगह दिखाने में, बाकी बिहारी अस्मिता का बदला चुनाव में 14 करोड़ बिहारी लेंगे।
मैं फ़र्ज़ी न्यूज़ दिखाता हूँ, मैं सच को झूट बनाता हूँ 🚨
मैं पब्लिक को उकसाता हूँ, मैं सब धर्मों को लड़ाता हूँ
है रूपिया ही मेरी पहचान,मिले जितना चाहे अपमान
मैं फर्जी पत्रकार हूँ 🔥🔥
आज यूपी में गजब हो गया
सपा प्रमुख अखिलेश यादव को जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण से रोक दिया गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हरिओम वाल्मीकि के घर जाने से रोक दिया गया।
और तालिबान को "गार्ड ऑफ ऑनर" दिया गया।
बिहार चुनाव करीब आते ही तमाम गायक-गायिकाओं को विधायक बनने की तलब लगने लगी है.
अब तक इन्हें बेरोजगारी और पलायन नहीं दिख रहा था या लाठी खाते विद्यार्थी नहीं दिख रहे थे?
गिरते पुलों, ज़हरीली शराब से हुई मौतों और अस्पताल के बाहर मरते मरीजों पर क्यों चुप थे?
अब तक कहाँ थे?
#BiharElections2025
तालिबान विदेश मंत्री ने भारतीय महिला पत्रकारों को अपनी प्रेस वार्ता से प्रतिबंधित किया
मोदी सरकार कायरों की तरह चुप नहीं रह सकती. जवाब दे, आख़िर ऐसा होने कैसे दिया गया
और पुरुष पत्रकार जो प्रेस वार्ता में बैठे रहे - लानत है आप पर
किस्सा नीतीश बाबू और चूहा बाबू का
पुल बने तो नीतीश बाबू
पुल ढहे तो चूहा बाबू
बांध बने तो नीतीश बाबू
बांध भ्रष्टाचार में ढह जाए तो चूहा बाबू
शराब पकड़ाए तो नीतीश बाबू
90 लाख लीटर शराब गायब तो चूहा बाबू
चित्रा जी भी दंग रह गई की ये चूहा बाबू कौन है
चूहों की बहार, नीतीशे सरकार
एंकर:- आप किसका समर्थन करते हैं?
"महात्मा गांधी का या सावरकर का?"
प्रशांत किशोर:- आपकी हिम्मत कैसे हुई एक ही वाक्य में गांधी जी और सावरकर का नाम लेने की, ये सवाल ही बापू का अपमान है।
यह सुनते ही एंकर शांत हो गया और लज्जित महसूस किया।
चुनाव आयोग का नया कारनामा देखिए-
नए वोटर बनने का आवेदन किया - 16 लाख 93 हज़ार लोगों ने
नए वोटर बनाए गए - 21 लाख 53 हज़ार लोग
ये भ्रष्टाचार नहीं देश के लोकतंत्र पर हमला है.
गोदी मीडिया कुछ नहीं बोलेगा…आपको बोलना होगा.
बोलिए…आवाज़ उठाइए…देश का लोकतंत्र बचाइए.
#votechoriexposed #BiharElections2025
#VoteChorGaddiChhod
बिहार के युवाओं के लिए अब तक की सबसे बड़ी घोषणा।
"सरकार बनते ही 20 दिनों के अंदर अधिनियम बनाकर 20 महीनों के भीतर जिस परिवार में सरकारी नौकरी नहीं है, उन्हें दी जाएगी।"
मतलब हर घर सरकारी नौकरी
- श्री तेजस्वी जी
आर्थिक न्याय के तहत आज हमने एक ऐतिहासिक और युगांतकारी घोषणा की है। बिहार के जिस भी परिवार में सरकारी नौकरी नहीं है ऐसे परिवारों को एक नया अधिनियम बनाकर अनिवार्य रूप से नौकरी मिलेगी।
𝟐𝟎 साल तक यह सरकार नौकरी-रोजगार नहीं दे पाई। हमारी सरकार बनते ही 𝟐𝟎 दिन के अंदर “एक विशेष नौकरी-रोजगार अधिनियम” बनाकर 𝟐𝟎 महीने में हर परिवार में नौकरी पहुंचाने का काम करेंगे। तेजस्वी ने 𝟏𝟕 महीने में 𝟓 लाख नौकरी देकर दिखाया है, अब 𝟐𝟎 महीने में हर परिवार को नौकरी देंगे। #Jobs #Bihar
"सरकार बनते ही 20 दिन के अंदर अधिनियम बनेगा कि अगले 20 महीने के अंदर जिस परिवार में सरकारी नौकरी नहीं है उसे सरकारी नौकरी दी जाएगी।"
ये अधिनियम बनाकर गारंटी दी जाएगी।
~ तेजस्वी जी
बिहार में क्रांति आने जा रही है, अब हर परिवार में सरकारी नौकरी मिलेगी।
स्वागत कीजिए
मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकना सिर्फ़ व्यक्ति नहीं, संविधान पर हमला है। यह 2014 के बाद फैलाई गई घृणा की उपज है। दलित और संवैधानिक मूल्यों से नफरत करने वालों की चुप्पी शर्मनाक है। न्यायपालिका की गरिमा बचाना लोकतंत्र की असली परीक्षा है। सुनिए @yadavtejashwi जी को।
भाजपा प्रवक्ता पहले बोलते है, प्रियंका कोइरी जाति से आती है, फिर बोलते है राजद MY की पार्टी है।
एक कोइरी, RJD को रिप्रेजेंट कर रही है और वही NDA के सांसद बोलते है "कुशवाहा, मुस्लिम और यादव का काम नहीं करूंगा।"
मतलब कुछ भी बक देना है 😂
हमने आजादी के बाद पहली बार मंसूरी समुदाय को टिकट देकर MLA और मंत्री दोनों बनाया।
सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय हमारे DNA में है।
चित्रा त्रिपाठी- ये कह रहे है तेजस्वी जी मुंगेरीलाल के हसीं सपने देख रहे है!
"मुंगेरीलाल कमीशन के सपने थे कि सभी वंचितों को उनका हक मिले, हां वो सपना हसीं था उसको पूरा करेंगे..
जल्द ये होने होने वाला है (मैं, तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद की शपथ...)
अच्छा हुआ ईको पार्क में चित्रा जी का कार्यक्रम कैंसिल हुआ, वही बगल में तेजस्वी जी के आवास के बाहर गोलियां चली थी.. गुंडाराज चल रहा है!"
भाजपा नेता सम्राट चौधरी झूठ-मूठ के हाफीडेविट और फर्जी डिग्री छिपाने के चक्कर में पड़े हैं।
अरे सीधे बोल देते कि लालू जी ज़िम्मेदार हैं, बात ख़त्म हो जाती।
देश के मुख्य न्यायाधीश के ऊपर एक आहत भावना से हलकान वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की. ख़बर यहाँ नहीं है. असली ख़बर तब पूरी होगा जब देश ये जाने कि CJI एक बुद्धिस्ट अनुसूचित जाति परिवार से आते हैं. डॉ. आंबेडकर को मानते हैं. अब आप खबर को फिर से पढ़ेंगे तो सब समझ जाएँगे कि यह कितना भयावह है.
20 सालों से बिहार कराह रहा है।
20 सालों से बिहार बाढ़ , सुखाड़, अपराध, हत्या, लूट, चोरी, बलात्कार, गुंडई, पेपरलीक, लाठीचार्ज, पलायन, बेरोजगारी, महंगाई ना जाने क्या क्या झेल कर थक चुका है , टूट चुका है।
ख़ुशी, तरक्की , रोज़गार कुछ नहीं देखा!
इस बार 20 सालों के पीड़ा का अंत करना है और उसका अंत हम सब करेंगे CM बन कर । Change Maker बन कर change लाएंगे और तेजस्वी जी को CM बनायेंगे।
14 नवंबर को इतिहास बदला जाएगा और भविष्य लिखा जाएगा। बिहार के सुनहरे भविष्य, परिवर्तन और विकास के लिए चुनाव के इस महापर्व से खुशहाली लाना है और उस खुशहाली के लिए तेजस्वी सरकार बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस बी आर गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास निंदनीय है लेकिन सरकार को इसकी गंभीरता समझ आने में इतना वक्त क्यों लगा? वरिष्ठ वकील पिल सिब्बल @KapilSibal पौने छह बजे सवाल कर चुके थे कि इस घटना पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और कानून मंत्री क्यों चुप हैं? क़ानून मंत्री को सूचना मिलते ही निंदा करनी चाहिए थी। दोपहर तक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी से लेकर केरला और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इसकी कड़ी निंदा कर दी थी। क्या सरकार को इस घटना की गंभीरता समझने में इतना वक्त लग गया? इतनी देर तक क्या गुणा भाग हो रहा था? कई दिनों से चीफ जस्टिस बी आर गवई के ख़िलाफ़ गोदी ऐंकरों के कार्यक्रम से लेकर सोशल मीडिया में अनाप शनाप बातें की जा रही थीं। उन सबको नज़रअंदाज़ किया गया। यह बेहद अफसोसनाक है कि ऐसी घटना हुई है। क्या किसी और के साथ ऐसी उदारता दिखाई जाती? क्या इसलिए सरकार ने इतना वक्त लिया क्योंकि जूता उछालने वाला सनातन का नारा लगा रहा था? बार संघ ने अच्छा किया समय रहते एक्शन लिया लेकिन जजों से लेकर सभी को इस पर बोलना चाहिए। यह रैंडम घटना नहीं है। जूता निकालने वाले का अधिकार बोध कहां से आया है? जूता निकालने की घटना का संबंध जातिगत और सामंती पृष्ठभूमि से है। आज डॉ अंबेडकर होते तो राष्ट्रीय उपवास पर चले गए होते। गांधी होते तो सबके बदले ख़ुद प्रायश्चित कर रहे होते। यह घटना संस्थाओं के ख़त्म होने के बाद इन्हें कुछ नहीं समझने के दुस्साहस का प्रदर्शन करती है।