#भीमा_कोरेगांव_गद्दार_दिवस
भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 में हुई थी। यह युद्ध ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और पेशवा बाजीराव द्वितीय की मराठा सेना के बीच लड़ा गया था। इसमें कंपनी की सेना को राष्ट्र द्रोह और भ्रष्टाचार के अपराध के लिए सामाजिक दंड भोग रहे बहिष्कृत महार जाति के सैनिक प्रमुख थे, जिस युद्ध में मराठा सेना को पराजय का सामना करना पड़ा था। यह लड़ाई भारत को विदेशी अधीनता की भेड़ियों में पूर्ण रूप से जकड़ने वाली सिद्ध हुई और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गई।
क्योंकि मध्य और उत्तरी भारत में मराठा शासन ने पूर्णतय अपना शासन बना रखा था, इस विजय के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने युद्ध में सहायता करने वाले अपराधियों को वांछित और दमनित बता कर अपने लेखों में प्रस्तुत किया, इस वर्ग के लोगों को ऐसे पदों पर नियुक्ति मिली जिससे यह लोग आम जनमानस के विरुद्ध अमानवीय व्यवहार करते रहे, अपने भ्रष्ट आचरण से आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे, क्योंकि गद्दारी का कलंक किसी भी अपराध के दाग से बड़ा होता हैं और आमजनमानस की स्मृतियों में अमिट छाप छोड़ देता हैं जिस कारण जो सामाजिक बहिष्कार 10 वर्षों के लिए था वो पीढ़ियों में बदल गया, इतिहास को छुपा कर झूठा इतिहास बना कर एक अपराधी वर्ग को शोषित, दमनित और वांछित बताया गया था।
1 जनवरी भीमा कोरेगांव क्या हैं?
@arvindchotia@arvindchotia Ji,
खाली OMR उन अभ्यर्थियों से लिए जा रहे हैं अब सीधी सीट बिक रही हैं!
यह प्रमाणित सत्य हैं। आप अगर पूछेंगे अभ्यर्थियों से आपको सब पता चल जाएंगा!
@Kapil_Jyani_ मान्यवर, आपके कहने का अर्थ हैं कि संविधान में वर्णित स्वर्ण जाति की सफलता का भी यही कारण रहा हैं, #अंबेडकर जी ने राजनैतिक महत्वाकांक्षा के कारण उन्हें शोषक घोषित किया था।
@arvindchotia@bhwj_pulkit जी, राजस्थान के सबसे भ्रष्ट शिक्षा मंत्री होने का गौरव इन्हें ही प्राप्त है, राजस्थान कांग्रेस और मान्यवर पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी को इनमें विशेष प्रतिभा नज़र आई उसी कारण से यह अध्यक्ष भी बनाए गए।
लक्ष्मणगढ़ को "नाथी के बाड़े" के नाम से प्रसिद्धि मिली है
माननीय @BhajanlalBjp
माननीय @PoliceRajasthan
माननीय @Igp_Jodhpur
माननीय @PaliPolice न्यायालय के आदेश की पालना समय पर नहीं होगी तो कानून का राज कैसे स्थापित होगा?
10/10/2025 न्यायालय उपखंड मजिस्ट्रेट रोहट के न्यायिक आदेश का पालन रिसीवर SHO रोहट पाली द्वारा नहीं किया जा रहा है।
@JaikyYadav16 एक सामाजिक जीवन जी रहे व्यक्ति की जिम्मेदारी "रोहिणी जी" से अधिक है क्यों शादी- सुदा होने के बाद भी उन्होंने असामाजिक एवं अनैतिक संबंध स्थापित किए।
वो तो "रोहिणी जी" इनके राजनैतिक जीवन की हत्या नहीं करना चाहती अन्यथा अब तक तो मुकदमा दर्ज और #Ambedkar जी का संविधान समझा देती।
@PravinJain121@arvindchotia दुर्दशा का कारण उसका विस्तृत पाठ्यक्रम हैं क्यों नहीं किसी एक विषय पर ही 3 साल Practicle और Theoretical Skilling knowledge दी जाएं, क्यों नहीं आखरी के 1 वर्ष तक केवल Experimentall & Innovational रखा जाएं।
सुधार की जरूरत कहा हैं समझिए, चोटियां जी ने व्यंग्यात्मक रूप से लिखा हैं।